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भगवान भैरव: मंत्र, महत्व, पूजा विधि व रूप
Deity Worship

भगवान भैरव: मंत्र, महत्व, पूजा विधि व रूप

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित अप्रैल 2, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

भगवान भैरव कौन

भगवान भैरव भगवान शिव का उग्र रूप - ब्रह्मांड की रक्षा हेतु उग्र रूप लेने पर बने। कोतवाल (काशी के), विशेषतः वाराणसी के।

ब्रह्मांडीय कथा - ब्रह्मा का अहंकार बढ़ने पर, शिव के क्रोध से भैरव प्रकट - ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काटा। श्राप से भिक्षु रूप में काशी तक भटके, वहाँ श्राप मुक्त।

उग्र व प्रेममय क्यों - उग्रता रक्षात्मक। नकारात्मकता डराते पर भक्तों को कभी नुकसान नहीं।

दो मुख्य रूप -

  • काल भैरव (समय-भैरव) - सबसे पूजित। काशी रक्षक।
  • बटुक भैरव (बाल-भैरव) - कोमल रूप, गृहस्थों हेतु।

8 रूप (अष्ट भैरव) - असितांग, रुरु, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण, संहार।

शक्तिशाली भैरव मंत्र

1. बीज मंत्र - 'ॐ ह्रीं भैरवाय नमः।' दैनिक 108 बार।

2. काल भैरव मंत्र - 'ॐ कालभैरवाय नमः।'

3. बटुक भैरव (कोमल) - 'ॐ ह्रीं बटुक-भैरवाय आपद-उद्धरणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।'

4. भैरव गायत्री - 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महा-भैरवाय धीमहि, तन्नो भैरवः प्रचोदयात्।'

5. काल भैरव अष्टकम् - शंकराचार्य द्वारा। 5-7 मिनट। काशी में प्रसिद्ध।

दैनिक अभ्यास - स्तर 1 मंत्र 108 बार। शनिवार संध्या सरसों तेल का दीया।

कुत्ते का संबंध - भैरव का वाहन काला कुत्ता। आवारा कुत्तों को भोजन = भैरव पूजा।

भैरव पूजा विधि व सर्वोत्तम समय

सर्वोत्तम समय - रविवार या शनिवार संध्या। मध्यरात्रि उन्नत हेतु।

सर्वोत्तम दिन - शनिवार, रविवारकालाष्टमी (अष्टमी कृष्ण पक्ष)। काल भैरव जयंती (नवंबर)।

आवश्यक - भैरव चित्र, काला/लाल कपड़ा, काले तिल, सरसों तेल का दीया, कपूर, काले तिल लड्डू, गुड़, उड़द दाल, लाल फूल।

चरण - 1. काला/लाल/श्वेत वस्त्र 2. दक्षिण/नैऋत्य मुख 3. संकल्प 4. सरसों तेल का दीया (5 बत्ती) 5. लाल सिंदूर/काला तिल तेल तिलक 6. काले तिल + लाल फूल 7. 'ॐ ह्रीं भैरवाय नमः' 108 बार 8. काल भैरव अष्टकम् (वैकल्पिक) 9. आरती 10. प्रसाद 11. आवारा कुत्ते को काले तिल लड्डू

कालाष्टमी मासिक। काल भैरव जयंती वार्षिक।

नियम - कुत्तों का अनादर न, समर्पित पूजा क्षेत्र, सूर्यास्त के बाद, कुत्तों को भोजन।

भैरव पूजा के लाभ

भैरव पूजा के लाभ

1. भय निवारण। 2. काला जादू से रक्षा। 3. समय-बंधित कष्ट। 4. यात्रा रक्षा। 5. पितृ दोष निवारण। 6. न्यायालय मामले। 7. अहंकार दलन। 8. बच्चों की रक्षा। 9. मानसिक विकार। 10. शिव तक सीधा मार्ग।

काशी संबंध - काशी जाने वाले तीर्थयात्री पहले काल भैरव दर्शन करते।

41-दिन तीव्र।

सामान्य गलतियाँ व निष्कर्ष

गलतियाँ -

  • कुत्तों का अनादर
  • दोपहर पूजा
  • चमकीले रंग
  • सरसों तेल छोड़ना
  • सहज आचरण
  • कुत्तों को भोजन न
  • बिना गुरु तंत्र
  • नुकसान हेतु प्रयोग
  • कालाष्टमी छोड़ना
  • 'मामूली शिव रूप' मानना

तीन स्तर -

  • स्तर 1 - साप्ताहिक शनि/रवि
  • स्तर 2 - दैनिक + मासिक कालाष्टमी
  • स्तर 3 - समर्पित भैरव साधक

अंतिम चिंतन - भैरव रक्षा करते जब अन्य नहीं कर सकते।

इस शनिवार संध्या शुरू करें।

जय भैरव बाबा।

त्वरित उत्तर

क्या घर पर पूजा सुरक्षित?+

हाँ, स्तर 1 मंत्र सुरक्षित।

कुत्तों को भोजन क्यों?+

भैरव का वाहन काला कुत्ता।

क्या बच्चे पूजा कर सकते?+

बड़े बच्चे बटुक भैरव से।

शनि से संबंध?+

शनिवार दोनों का दिन। संयुक्त पूजा प्रभावी।

शुरुआती मंत्र?+

'ॐ ह्रीं भैरवाय नमः' - 108 बार।

भैरव व हनुमान में रक्षा का अंतर?+

हनुमान दैनिक-अनुकूल। भैरव बड़े खतरे हेतु।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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