कैला देवी कौन हैं
पूर्वी राजस्थान के करौली नगर के निकट कालीसिल नदी के तट पर प्राचीन कैला देवी मंदिर स्थित है। कैला देवी को दुर्गा का रूप माना जाता है, जिन्हें राजस्थान और आसपास के राज्यों में एक शक्तिशाली और करुणामयी माता के रूप में पूजा जाता है।
यह मंदिर क्षेत्र के सबसे अधिक दर्शनार्थ शक्ति मंदिरों में से एक है, जहां राजस्थान के साथ-साथ मध्य प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी भक्त पहुंचते हैं।
इतिहास और कथा
स्थानीय परंपरा के अनुसार कैला देवी युगों-युगों से इस क्षेत्र और यहां के लोगों की रक्षक रही हैं, नदी तट पर उनकी उपस्थिति को पीढ़ियों से यात्रियों और ग्रामवासियों की सुरक्षा से जोड़ा जाता है। मंदिर को स्वयं सदियों पुराना माना जाता है, प्रचलित मान्यता के अनुसार यहां की प्रतिमा स्वयंभू है, जिसकी सेवा वर्षों से पुजारी परिवारों द्वारा की जाती रही है।
समय के साथ यह छोटा सा स्थानीय पूजा स्थल क्षेत्र के सबसे प्रमुख तीर्थ केंद्रों में से एक बन गया, जिसकी ख्याति घर लौटते भक्तों द्वारा सुनाई गई आशीर्वाद की कथाओं से फैलती गई।
महत्व और भक्तों की कामनाएं
श्रद्धालु कैला देवी के पास सुरक्षा, समृद्धि और हृदय की सच्ची मन्नतों की पूर्ति की कामना लेकर आते हैं। अनेक भक्त तपस्या और भक्ति के रूप में पैदल यात्रा करते हैं, विशेष रूप से मेले के दौरान कई दिनों तक चलकर मंदिर तक पहुंचते हैं।
आदिशक्ति के हर रूप की तरह, भक्त कैला देवी की कृपा को श्रद्धा और समर्पण से जुड़ा मानते हैं, न कि किसी सौदे से, यह स्मरण कराते हुए कि देवी हृदय की सच्चाई का उत्तर देती हैं।
दर्शन और लक्खी मेला

मंदिर में दिनभर आरती और दर्शन की सामान्य परंपरा चलती रहती है। इसका सबसे बड़ा अवसर है लक्खी मेला, चैत्र नवरात्रि के दौरान लगने वाला विशाल मेला, जिसमें पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बताई जाती है, यही इस मेले का नाम भी है।
मेले के दौरान मंदिर परिसर और आसपास का नगर भक्तों के सागर में बदल जाता है, जहां दिन-रात निरंतर भजन, कीर्तन और दर्शन की कतारें लगी रहती हैं।
करौली कैसे पहुंचें
कैला देवी मंदिर पूर्वी राजस्थान के करौली नगर से लगभग 30 किलोमीटर दूर, रणथंभौर क्षेत्र के निकट स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन करौली में है, जबकि सवाई माधोपुर भी एक भलीभांति जुड़ा हुआ निकटवर्ती रेल केंद्र है। निकटतम हवाई अड्डा जयपुर में है।
अनेक श्रद्धालु इस तीर्थयात्रा को रणथंभौर की यात्रा के साथ जोड़ते हैं, जिससे यह यात्रा आध्यात्मिक और प्राकृतिक दोनों अनुभवों से भरपूर बन जाती है।
जप का मंत्र और सार
कैला देवी के चरणों में भक्त यह मंत्र जपते हैं:
"जय कैला माता, करौली वाली, भक्तों की रक्षा करने वाली" अर्थ: "करौली की मां कैला की जय हो, जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।"
लक्खी मेले में कैला देवी की ओर चलते भक्तों की अनवरत धारा यह स्मरण कराती है कि धैर्य और श्रद्धा के साथ की गई तीर्थयात्रा स्वयं एक उपासना है। यह श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई सौदा नहीं, एक-एक कदम करके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कैला देवी मंदिर में लक्खी मेला क्या है?+
यह चैत्र नवरात्रि के दौरान लगने वाला भव्य मेला है, जिसमें मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में बताई जाती है, यही इस मेले के नाम का कारण भी है।
कैला देवी कौन हैं?+
वे दुर्गा का एक स्वरूप हैं, जिनकी पूजा करौली के निकट कालीसिल नदी के तट पर होती है, और जिन्हें राजस्थान व आसपास के राज्यों में पूजा जाता है।
भक्त सामान्यतः कैला देवी मंदिर कैसे पहुंचते हैं?+
अनेक भक्त विशेष रूप से मेले के दौरान भक्ति और तपस्या के रूप में पैदल यात्रा करते हैं, हालांकि मंदिर सड़क मार्ग से भी सुलभ है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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