कमला महाविद्या कौन हैं
कमला, जिन्हें कमलात्मिका भी कहा जाता है, दश महाविद्या में दसवीं और अंतिम हैं। वे देवी लक्ष्मी का तांत्रिक रूप हैं, धन, सौंदर्य, समृद्धि और कल्याण की परम दात्री। उनका नाम कमल से आया है - पवित्रता, समृद्धि और आध्यात्मिक विकास का पुष्प। जहाँ लक्ष्मी की घरों में व्यापक उपासना होती है, वहीं कमला उसी कृपा को उसके गहरे, अधिक आंतरिक महाविद्या रूप में दर्शाती हैं, भौतिक समृद्धि को आध्यात्मिक पूर्णता से जोड़ती हैं।
कमला का स्वरूप
कमला को तेजोमय स्वर्ण वर्ण में, पूर्ण विकसित कमल पर विराजमान, दो हाथों में कमल धारण किए और शेष दो हाथों से आशीर्वाद व अभय प्रदान करते दर्शाया जाता है। उन्हें अक्सर चार हाथियों द्वारा स्वर्ण कलशों से जल अर्पित कर स्नान कराते दिखाया जाता है, गज लक्ष्मी का यह उत्कृष्ट चित्र राजसी समृद्धि और दिव्य कृपा का प्रतीक है। प्रत्येक तत्व - कमल, स्वर्ण, हाथी - पवित्रता, समृद्धि और दिव्य माता की सदा प्रवाहमान उदारता का प्रतीक है।
कमला क्या प्रदान करती हैं
कमला का आह्वान धन, समृद्धि, सौंदर्य, संतति, सामंजस्य और समग्र कल्याण के आशीर्वाद हेतु किया जाता है। क्षणिक भाग्य के विपरीत, वे ऐसी समृद्धि देती हैं जो स्थिर, धर्मसंगत और आंतरिक संतोष सहित होती है।
- स्थिर आर्थिक वृद्धि और दरिद्रता से मुक्ति
- घर में सामंजस्य, स्वास्थ्य और प्रसन्नता
- सौंदर्य, लावण्य और मंगलमय जीवन
- लोभ या आसक्ति के बिना धन का उपभोग करने की प्रज्ञा
कमला बीज मंत्र

कमला का प्रमुख मंत्र लक्ष्मी की प्रचुर कृपा का आह्वान करता है:
ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्री कमला देव्यै नमः
एक छोटा रूप जो अक्सर जपा जाता है:
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमलवासिन्यै स्वाहा
बीज 'श्रीं' लक्ष्मी और समृद्धि का बीज है, जबकि 'ह्रीं' दिव्य माता की शक्ति का आह्वान करता है। भक्ति से जपने पर यह मंत्र ऐसी समृद्धि आकर्षित करता माना जाता है जो शुभ और स्थायी हो।
उपासना और गुरु मार्गदर्शन पर एक टिप्पणी
महाविद्या के रूप में कमला के दोनों पक्ष हैं - एक कोमल गृहस्थ रूप और एक गहरा तांत्रिक रूप। सरल उपासना सहज व सुलभ है: उन्हें कमल या लाल पुष्प अर्पित करें, घी का दीपक जलाएँ, और उनका मंत्र जपें, विशेषकर शुक्रवार और दीपावली पर, जो लक्ष्मी के सबसे शुभ समय हैं। कमला से जुड़ी अधिक उन्नत श्री विद्या और तांत्रिक साधनाएँ केवल किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में, केवल लाभ की इच्छा से नहीं बल्कि विनम्रता व कृतज्ञता के भाव से करनी चाहिए।
महाविद्या में महत्व
कमला सिखाती हैं कि भौतिक समृद्धि और आध्यात्मिक कृपा परस्पर विरोधी नहीं हैं। जैसे कमल कीचड़ में खिलकर भी उससे अछूता रहता है, वैसे ही वे भक्त को सिखाती हैं कि धन और संसार के बीच रहते हुए भी लोभ में न फँसे। कमला की उपासना करके भक्त केवल धन नहीं बल्कि समृद्धि को सत्कार्य में लगाने का आंतरिक संतुलन चाहते हैं, परिवार, धर्म व दान का सहारा बनते हैं, और दिव्य माता को हर आशीर्वाद का सच्चा स्रोत मानते हैं।
कमला की उपासना के सर्वोत्तम समय

शुक्रवार लक्ष्मी और कमला को प्रिय हैं, और दीपावली, शरद पूर्णिमा तथा अक्षय तृतीया उनकी उपासना के सबसे शुभ दिनों में हैं। प्रातःकाल और संध्या दीपदान का समय आदर्श है। घर को और विशेषकर पूजा व धन-स्थान को स्वच्छ रखना, प्रतिदिन दीप जलाना और ताजे पुष्प अर्पित करना उनकी कृपा को पूरे वर्ष आमंत्रित व बनाए रखने के सरल उपाय हैं।
पाठकों के प्रश्न
कमला महाविद्या कौन हैं?+
कमला, जिन्हें कमलात्मिका भी कहते हैं, दश महाविद्या में दसवीं और अंतिम हैं। वे देवी लक्ष्मी का तांत्रिक रूप हैं, धन, सौंदर्य, समृद्धि और कल्याण की परम दात्री।
कमला लक्ष्मी से कैसे भिन्न हैं?+
कमला लक्ष्मी जैसी ही कृपा हैं किंतु उनके गहरे, अधिक आंतरिक महाविद्या रूप में। वे तांत्रिक परंपरा के भीतर भौतिक समृद्धि को आध्यात्मिक पूर्णता से जोड़ती हैं।
कमला मंत्र क्या है?+
एक प्रमुख मंत्र 'ॐ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्री कमला देव्यै नमः' है। बीज 'श्रीं' लक्ष्मी और समृद्धि का बीज है।
कमला माता भक्तों को क्या आशीर्वाद देती हैं?+
वे भक्तों को धन, समृद्धि, सौंदर्य, संतति, सामंजस्य और कल्याण का आशीर्वाद देती हैं - ऐसी समृद्धि जो स्थिर, धर्मसंगत और आंतरिक संतोष सहित हो।
कमला की उपासना के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+
शुक्रवार कमला को प्रिय हैं, और दीपावली, शरद पूर्णिमा तथा अक्षय तृतीया सबसे शुभ दिनों में हैं। प्रातःकाल और संध्या दीप का समय आदर्श है।
क्या कमला की उपासना के लिए गुरु आवश्यक है?+
कमल या लाल पुष्प, दीपक और उनके मंत्र के साथ सरल उपासना के लिए किसी विशेष दीक्षा की आवश्यकता नहीं। उन्नत श्री विद्या और तांत्रिक साधनाएँ केवल योग्य गुरु के मार्गदर्शन में करनी चाहिए।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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