वह दिन जब देवता जागते हैं
मकर संक्रांति एकमात्र प्रमुख हिंदू पर्व जो चंद्र तिथि से नहीं - सूर्य के मकर राशि में प्रवेश से तय होता। प्राचीन ब्रह्मांडविज्ञान के अनुसार यह उत्तरायण (सूर्य की उत्तर यात्रा) का आरंभ, जिसे हिंदू शास्त्र 'देवताओं का दिवस' कहते - 6 माह का काल जब दिव्य प्राणी जागृत।
मकर संक्रांति 2027 गुरुवार, 14 जनवरी 2027 को है। भारत भर में पोंगल (तमिलनाडु), लोहड़ी-पूर्व (पंजाब - लोहड़ी 13 जनवरी), बिहू (असम), खिचड़ी (UP-बिहार), संक्रांति (महाराष्ट्र-कर्नाटक) रूप मनाई।
यह 3 ब्रह्मांडीय परिवर्तन एक साथ - (1) सूर्य मकर राशि प्रवेश व उत्तरायण आरंभ, (2) लंबे दिन (शीत संक्रांति 21 दिसंबर थी), (3) शीत फसल कटाई आरंभ। आध्यात्मिक रूप से सूर्य उपासना, गंगा स्नान, तिल-गुड़ दान, व पितृ दोष निवारण के लिए वर्ष का सर्वाधिक शक्तिशाली दिन।
🙏 वंदना ऐप के मकर संक्रांति मॉड्यूल में सूर्य नमस्कार ऑडियो, 12-नाम सूर्य स्तोत्र, व शहरवार पुण्य काल समय।
पुण्य काल समय व श्रेष्ठ स्नान स्थान
📅 संक्रांति तिथि - गुरुवार, 14 जनवरी 2027 🕒 संक्रांति क्षण (सूर्य मकर प्रवेश) - 14 जनवरी 2027, दोपहर 2:48 🌅 पुण्य काल - सुबह 6:39 – सायं 5:24 (10 घंटे 45 मिनट) 🌅 महा पुण्य काल (सर्वाधिक शुभ) - सुबह 6:39 – 8:18 (सूर्योदय के बाद पहले 1.5 घंटे)
महा पुण्य काल में स्नान + दान + मंत्र = वर्ष के किसी अन्य पुण्य काल का × 1000 गुना पुण्य।
श्रेष्ठ स्नान स्थान (पुण्य क्रम में) -
- त्रिवेणी संगम, प्रयागराज (माघ मेला / कुंभ के दौरान)
- हरिद्वार, वाराणसी, पटना, गढ़ मुक्तेश्वर पर गंगा
- मथुरा, वृंदावन, दिल्ली पर यमुना
- नासिक पर गोदावरी
- ओंकारेश्वर, महेश्वर पर नर्मदा
- विजयवाड़ा, पंढरपुर पर कृष्णा
- कन्याकुमारी पर समुद्र-स्नान (तीन सागर संगम) - दक्षिण भारतीयों हेतु सर्वाधिक शक्तिशाली
घर स्नान विधि (नदी न पहुँच सकें) - स्नान बाल्टी में 1-2 चम्मच गंगाजल + चुटकी काला तिल + 1 तुलसी पत्र। डालते समय जपें - 'ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वती। नर्मदे सिंधु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।' यह 7 पवित्र नदियों का आह्वान।
स्नान के दौरान पूर्व मुख। स्नान बाद हथेली से सूर्य को 3 बार अर्घ्य, 'ॐ सूर्याय नमः' जपते।
🌟 2027 विशेष - प्रयागराज महा कुंभ - प्रयागराज का अगला महा कुंभ 2025 में आरंभ व 2026-27 में जारी। मकर संक्रांति 2027 पर प्रयागराज स्नान मार्कण्डेय पुराण के अनुसार 100 अश्वमेध यज्ञों का पुण्य देता।
मकर संक्रांति के 12 सूर्य मंत्र
सूर्य अर्घ्य देते समय इन 12 नामों का जप। एक मंत्र प्रति अर्घ्य = कुल 12 अर्घ्य। यह परंपरागत सूर्य द्वादश नामावली।
1. ॐ मित्राय नमः - सबके मित्र को 2. ॐ रवये नमः - दीप्तिमान को 3. ॐ सूर्याय नमः - अंधकार-नाशक सूर्य को 4. ॐ भानवे नमः - प्रकाशक को 5. ॐ खगाय नमः - आकाश-यात्री को 6. ॐ पूष्णे नमः - पोषक को 7. ॐ हिरण्य-गर्भाय नमः - स्वर्ण-गर्भ सर्जक को 8. ॐ मरीचये नमः - उषा के स्वामी को 9. ॐ आदित्याय नमः - अदिति के पुत्र को 10. ॐ सवित्रे नमः - उत्तेजक को 11. ॐ अर्काय नमः - पूज्य को 12. ॐ भास्कराय नमः - प्रकाश-कर्ता को
अतिरिक्त - सूर्य बीज मंत्र (विशेष आशीर्वाद हेतु 108x) - ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
आदित्य हृदय स्तोत्र - यह सर्वाधिक शक्तिशाली सूर्य स्तोत्र (अगस्त्य मुनि ने रावण युद्ध से पहले राम को सिखाया)। मकर संक्रांति प्रातः पाठ अन्य किसी दिन का 10x पुण्य देता। पूर्ण स्तोत्र 31 श्लोक; लगभग 10 मिनट। वंदना ऐप पर ऑडियो सहित।
तिल-गुड़ अर्पण के समय विशेष कथन - 'तिल-गुड़ घ्या, गोड़-गोड़ बोला।' (तिल-गुड़ लो, अब से मीठा बोलो।) - आज के दिन वृद्धों, मित्रों, यहाँ तक कि पुराने प्रतिद्वंद्वियों के साथ आदान-प्रदान का परंपरागत मराठी आशीर्वाद।
तिल-गुड़ का महत्व व आज दान करने की 11 वस्तुएँ

तिल व गुड़ क्यों -
- तिल भगवान विष्णु, सूर्य, व पितृ से जुड़ा। आज तिल खाना 7 जन्मों के पाप जलाता (पद्म पुराण)। काला तिल विशेषतः पितृ दोष साफ करता।
- गुड़ संचित अच्छे कर्म की ऊष्मा का प्रतीक - कड़वा गन्ना रस लंबी धीमी गर्मी से मीठे स्वर्ण गुड़ में बदला। मानव जीवन भी ऐसा।
- साथ में, तिल-गुड़ अतीत (तिल = पूर्वज) व भविष्य (गुड़ = आगे की मिठास) मिलाते। साथ खाना आपकी कर्म समयरेखा का सामंजस्य।
तिल-गुड़ के रूप -
- तिल-गुड़ के लड्डू (उत्तर भारत में सर्वाधिक लोकप्रिय)
- तिलकुट (बिहार, झारखंड)
- पोंगल सक्करै (तमिलनाडु - चावल + तिल + गुड़)
- संक्रांति खिचड़ी (UP - पर 'असली' संक्रांति व्यंजन तिल-गुड़ मीठा)
- तिल पुली (महाराष्ट्र)
- येल्लु-बेल्ला (कर्नाटक - तिल, गुड़, मूँगफली, सूखा नारियल)
11 दान वस्तुएँ (महा पुण्य काल) - 1. तिल (कच्चा काला तिल) - सर्वाधिक महत्वपूर्ण, पितृ दोष हटाए 2. गुड़ - कर्म मीठा करे 3. खिचड़ी (कच्ची या पकी) - समृद्धि हेतु इंद्र आशीर्वाद 4. ऊनी कंबल - शीत रक्षा दान 5. गर्म वस्त्र - वृद्ध गरीबों हेतु 6. तिल तेल - मंदिरों में दीये हेतु 7. गाय का घी - होम के लिए सूर्य का प्रिय 8. ताँबे का सिक्का / बर्तन - सूर्य ताँबे से जुड़े 9. लाल फूल - संध्या पूजा हेतु ब्राह्मणों को 10. ब्राह्मण को कंबल - पितृ मोक्ष गारंटी 11. गौ दान (एक दिन गोशाला चारा प्रायोजन) - सबसे बड़ा पुण्य
मकर संक्रांति पर वर्जित -
- बाल, नाखून, दाढ़ी न काटें (शरीर सूर्य ऊर्जा अवशोषित कर रहा)
- क्रोध या कठोर वचन नहीं (विशेषतः माता-पिता पर)
- मांसाहार, मदिरा, धूम्रपान नहीं
- पूजा कक्ष की झाड़ू-पोंछा नहीं (अन्यत्र सफाई ठीक)
- किसी से तिल-गुड़ मना नहीं - यह पुराने बैर तोड़ने का दिन
भारत भर में मकर संक्रांति: पोंगल, लोहड़ी, उत्तरायण और क्षेत्रीय नाम
भारत में मकर संक्रांति की तुलना में कोई भी त्योहार देश की सांस्कृतिक विविधता को इतनी स्पष्टता से नहीं दर्शाता।
तमिलनाडु - पोंगल: चार दिवसीय त्योहार। मुख्य दिन चावल और दाल खुले में मिट्टी के बर्तन में पकाई जाती है - उबलकर बाहर आना शुभ!
गुजरात - उत्तरायण: मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का उत्सव। पतंग आत्मा का प्रतिनिधित्व करती है।
पंजाब, हरियाणा - लोहड़ी: मकर संक्रांति से एक दिन पहले - अलाव, भांगड़ा, गिद्दा।
असम - माघ बिहू: अस्थायी संरचनाएं बनाना, दावत, फिर जलाना।
आंध्र प्रदेश - संक्रांति: भोगी, संक्रांति, कानुमा - तीन दिवसीय उत्सव।
वंदना ऐप पर क्षेत्रीय मकर संक्रांति पूजा गाइड उपलब्ध है।
मकर संक्रांति विशेष: तिल गुड़, चिक्की और पारंपरिक मिठाइयों की रेसिपी
"तिळ गूळ घ्या, गोड गोड बोला" - मकर संक्रांति के भोजन की परंपरा को यह मराठी कहावत पूरी तरह से पकड़ती है।
तिल और गुड़ क्यों? जनवरी में तिल शरीर में गर्मी उत्पन्न करता है। गुड़ लोहा, कैल्शियम प्रदान करता है। दोनों मिलकर सर्दी का आदर्श पोषण बनाते हैं।
तिल लड्डू: सामग्री: 2 कप तिल (भुने), 1.5 कप गुड़, 2 बड़ा चम्मच घी, इलायची विधि: गुड़ पिघलाएं, सॉफ्ट बॉल स्टेज तक पकाएं। तिल डालें, जल्दी मिलाएं। गोल लड्डू बनाएं।
चिक्की (तिल की गजक): गुड़ को हार्ड क्रैक स्टेज तक पकाएं, तिल मिलाएं, ट्रे में डालें, काटें।
खिचड़ी: मकर संक्रांति का सार्वभौमिक आरामदायक भोजन।
पोंगल (सक्करई पोंगल): चावल + मूंग दाल + गुड़ + घी + इलायची।
वंदना ऐप पर मकर संक्रांति व्यंजनों के वीडियो और क्षेत्रीय विविधताएं उपलब्ध हैं।
मकर संक्रांति का आध्यात्मिक महत्व: उत्तरायण, पितृ तर्पण और मोक्ष

मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर में सबसे गहन आध्यात्मिक महत्व वहन करती है।
उत्तरायण और दक्षिणायन: भगवद्गीता (अध्याय 8): उत्तरायण में मरने वाले उच्चतम प्रकाश प्राप्त करते हैं। भीष्म ने इसीलिए बाणों की शैय्या पर महीनों प्रतीक्षा की।
सूर्य पूजा: पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य अर्घ्य कई वर्षों की नियमित पूजा के बराबर माना जाता है।
पितरों के लिए तर्पण: मकर संक्रांति पितृ पक्ष के बाद पूर्वज-अर्पण का सबसे महत्वपूर्ण दिन है।
कुंभ मेला: कुंभ मेला हमेशा मकर संक्रांति पर शुरू होता है - पहला शाही स्नान।
तिल का महत्व: पद्म पुराण के अनुसार तिल विष्णु से उत्पन्न हुआ - तिल अर्पण विष्णु को प्रत्यक्ष भेंट है।
वंदना ऐप पर मकर संक्रांति के लिए सूर्य तर्पण मंत्र उपलब्ध हैं।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
मकर संक्रांति हमेशा 14 (या कभी 15) जनवरी पर ही क्यों - चंद्र तिथि पर नहीं?+
क्योंकि यह सूर्य पर आधारित, चंद्रमा पर नहीं। विशेष रूप से, यह उस सटीक सौर क्षण को चिह्नित करता जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता। पृथ्वी के अक्ष में हल्की डगमगाहट (अक्षीय अग्रसरण) के कारण, यह क्षण हर 70-80 वर्ष में लगभग 1 दिन खिसकता। प्राचीन काल में संक्रांति 21-22 दिसंबर (शीत संक्रांति) पर थी। आज 14-15 जनवरी पर। 2400 ईस्वी तक 16 जनवरी पर। तिथि कैलेंडर की घड़ी से नहीं, ब्रह्मांड की घड़ी से तय।
मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाई जातीं?+
मकर संक्रांति पर पतंगबाज़ी के स्वास्थ्य व आध्यात्मिक दोनों कारण। स्वास्थ्य - प्रातः शीत सूर्य में घंटों खड़े रहना विटामिन D अवशोषण करता व 6 माह के अंधेरे शीत के बाद सर्केडियन ताल रीसेट करता। आध्यात्मिक रूप से, उठती पतंग आत्मा का सूर्य - दिव्य स्रोत - की ओर उठने का प्रतीक। गुजरात में जहाँ पतंगबाज़ी चरम (प्रसिद्ध उत्तरायण पर्व), आकाश चलती प्रार्थना बन जाता। पतंग को उड़ाने वाले से जोड़ने वाला धागा (मांझा) आत्मा का शरीर से जुड़ाव - अस्थायी पर मूल्यवान।
क्या पोंगल मकर संक्रांति ही है?+
पोंगल मकर संक्रांति का तमिल रूप - वही खगोलीय घटना, हल्के भिन्न अनुष्ठान। पोंगल 4 दिन - दिन 1 (भोगी) पुरानी वस्तुओं को जलाना; दिन 2 (सूर्य पोंगल - अन्यत्र मकर संक्रांति वही) मुख्य दिन - खुले सूर्य में मिट्टी के बर्तन में पोंगल चावल पकाना जब तक उबल कर बाहर न निकले (शुभ संकेत); दिन 3 (मट्टू पोंगल) पूरे वर्ष हल खींचने वाले पशुओं की पूजा; दिन 4 (कानुम पोंगल) पारिवारिक मिलन। दोनों एक ही सूर्य उपासना मूल साझा करते। 'पोंगल' (गुड़ व घी सहित मीठा चावल) उत्तर भारत के तिल-गुड़ संयोजन के समान - मीठा चावल मीठे कर्म का प्रतीक।
क्या पवित्र नदी न पहुँच सकें तो घर पर मकर संक्रांति पूजा कर सकता/सकती हूँ?+
बिल्कुल। अधिकांश भक्त घर पर पूजा करते। स्नान बाल्टी में कुछ बूँद गंगाजल मिलाएँ सप्त-नदी मंत्र जपते - यह साधारण जल को पवित्र जल में बदलता। स्नान बाद पूर्व मुख, हथेली से सूर्य को 12 अर्घ्य, 12 सूर्य नामों का पाठ, प्रसाद रूप तिल-गुड़ खाना, व दोपहर से पहले किसी जरूरतमंद को कुछ दान। भाव सूर्य तक पहुँचता चाहे आप गंगा में खड़े हों या स्नानघर में। NRI व विदेशी हिंदू इसी तरह हर वर्ष सफलतापूर्वक करते।
पितृ दोष झेल रहे लोगों हेतु मकर संक्रांति में क्या विशेष है?+
पितृ पक्ष (सितंबर) के बाद पितृ दोष उपायों हेतु मकर संक्रांति दूसरा सबसे शक्तिशाली दिन। क्यों? क्योंकि आज उत्तरायण आरंभ - और प्राचीन ऋषि (सबसे प्रसिद्ध भीष्म पितामह) उच्च लोकों की प्राप्ति हेतु उत्तरायण में ही शरीर त्यागते थे। अतः आज पृथ्वी व पितृ लोक के बीच ब्रह्मांडीय 'द्वार' खुले। मकर संक्रांति पर काला तिल दान, तिल-जल तर्पण, व 5 ब्राह्मण भोजन 1 वर्ष की पितृ शांति देता। पुष्ट पितृ दोष वाले कई परिवार वार्षिक करते - यह बड़े पितृ पक्ष अनुष्ठानों का पूरक।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

पितृ पक्ष 2026: तिथि, श्राद्ध विधि, तर्पण मंत्र और 16 दिन पूर्वज क्यों आते हैं
11 मिनट पढ़ें

पितृ दोष: 10 लक्षण, 7 वास्तविक कारण और 9 शक्तिशाली उपाय (2026 पूर्ण गाइड)
12 मिनट पढ़ें

गंगा सप्तमी 2026: तिथि, स्नान मुहूर्त, मंत्र और क्यों एक डुबकी से 7 जन्मों के पाप धुल जाते हैं
9 मिनट पढ़ें

ब्रह्म मुहूर्त: क्या है, 11 वैज्ञानिक लाभ और 4 बजे बिना असफलता उठने का तरीका
9 मिनट पढ़ें
