जागते ही मंत्र क्यों जपें
नींद के बाद का पहला विचार पूरे दिन के मनोभाव को रंग देता है। हिंदू परंपरा इस कोमल क्षण का उपयोग करती है, जिसे प्रातः स्मरण (प्रातःकाल का स्मरण) कहते हैं, ताकि संसार के दौड़ने से पहले मन को ईश्वर की ओर मोड़ा जा सके।
यह साधना सरल और सुंदर है: बिस्तर में रहते हुए अपनी हथेलियों को देखें और भीतर बसी देवियों तथा पवित्र स्थान का स्मरण करें, फिर अपने पैर भूमि पर रखने से पहले धरती माता से क्षमा माँगें। इस तरह दिन का आरंभ हृदय को चिंता या हड़बड़ी के बजाय कृतज्ञता, विनम्रता और शांत, शुभ आरंभ से भर देता है।
प्रातः मंत्र - श्लोक, लिप्यंतरण और अर्थ
1. जागने पर हथेलियों को देखते हुए (कराग्रे वसते लक्ष्मीः):
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती, करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।
अर्थ: हाथ के अग्रभाग में लक्ष्मी का वास है, मध्य में सरस्वती, और मूल में गोविन्द (विष्णु)। इसलिए प्रातःकाल अपने हाथों के दर्शन करने चाहिए।
2. धरती पर पैर रखने से पहले (समुद्रवसने देवि):
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले । विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे ॥
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमण्डले, विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्शं क्षमस्व मे।
अर्थ: हे समुद्रों को वस्त्र रूप में धारण करने वाली देवी, पर्वतों के मण्डल वाली, हे विष्णु की पत्नी, आपको नमस्कार; मेरे पैरों के स्पर्श के लिए मुझे क्षमा करें। यह बिस्तर से उतरने से पहले धरती माता से कहा जाता है।
प्रातःकाल इन मंत्रों का उपयोग कैसे करें
- जागते ही स्थिर रहें: फोन उठाने से पहले अपनी खुली हथेलियों पर कोमलता से दृष्टि रखें।
- कराग्रे वसते लक्ष्मीः जपें: इसे एक या तीन बार पढ़ें, हाथों को देखते हुए और वहाँ बसी तीनों देवताओं का स्मरण करते हुए।
- उतरने से पहले: जब आप फर्श पर पैर रखने वाले हों, समुद्रवसने देवि जपकर धरती माता से क्षमा माँगें, फिर दाहिने पैर से उतरें।
- कृतज्ञता का क्षण जोड़ें: नए दिन और सुरक्षित जागने के लिए ईश्वर का धन्यवाद करें।
- फिर आगे बढ़ें: हाथ-मुँह धोएँ, स्नान करें और अपनी प्रातः दिनचर्या या विस्तृत पूजा जारी रखें। पूरी साधना एक मिनट से कम लेती है और शांत वातावरण बनाती है।
प्रातः मंत्रों के लाभ

- शांत, सकारात्मक आरंभ: तनाव और स्क्रीन के हावी होने से पहले मन ईश्वर की ओर मुड़ता है।
- कृतज्ञता और विनम्रता: धरती माता और देवताओं का स्मरण जीवन तथा संसार के प्रति आदर जगाता है।
- दैनिक आधार: एक निश्चित, सरल अनुष्ठान आध्यात्मिक अनुशासन बनाता है जिसे निभाना सरल है।
- सजगता: हथेलियों को देखना आत्म-जागरूकता का क्षण है, जो स्मरण कराता है कि पवित्रता आपके भीतर और चारों ओर बसती है।
- बेहतर सुबह: शांति से आरंभ आगे तक चलता है, जिससे शेष दिन अधिक स्थिर रहता है।
ये मंत्र कुछ जटिल नहीं माँगते - केवल स्मरण का एक स्थिर क्षण, जो समय के साथ हर दिन से आपके मिलने का ढंग बदल देता है।
त्वरित उत्तर
कराग्रे वसते लक्ष्मीः मंत्र क्या है?+
यह जागने पर हथेलियों को देखते हुए पढ़ा जाने वाला श्लोक है - 'कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती, करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्।' यह हाथ में बसी लक्ष्मी, सरस्वती और गोविन्द का सम्मान करता है।
हम सुबह सबसे पहले अपनी हथेलियों को क्यों देखते हैं?+
परंपरा मानती है कि अंगुलियों के अग्रभाग में लक्ष्मी, हथेली के मध्य में सरस्वती, और मूल में गोविन्द का वास है। जागने पर हाथों को देखना धन, ज्ञान और ईश्वर के आशीर्वाद से दिन आरंभ करने का तरीका है।
उतरने से पहले हम धरती से क्षमा क्यों माँगते हैं?+
समुद्रवसने देवि श्लोक पृथ्वी को देवी के रूप में प्रणाम करता है और उस पर पैर रखने के लिए क्षमा माँगता है। यह दिन आरंभ होने से पहले समस्त जीवन को आधार देने वाली पृथ्वी के प्रति विनम्रता और आदर जगाता है।
क्या इन प्रातः मंत्रों के जप से पहले स्नान आवश्यक है?+
नहीं। ये दो मंत्र जागते ही, बिस्तर छोड़ने से पहले - स्नान से पहले जपे जाते हैं। पूर्ण पूजा स्नान के बाद होती है, परंतु प्रातः स्मरण उसी पहले जागने के क्षण के लिए है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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