नारतियांग में किसकी पूजा होती है
मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों में बसा नारतियांग दुर्गा मंदिर भारत के सबसे विशिष्ट शक्तिपीठों में से एक है, जहाँ अखिल भारतीय देवी पूजा इस क्षेत्र की अपनी जनजातीय परंपराओं के साथ सहज रूप से घुलमिल गई है।
यह मंदिर सदियों से आस्थाओं के मिलन स्थल के रूप में खड़ा है, और जयंतिया राजपरिवार ने ऐतिहासिक रूप से इसके रखरखाव और पूजा में केंद्रीय भूमिका निभाई है।
मंदिर से जुड़ी कथा
शक्तिपीठ परंपरा के अनुसार, मान्यता है कि दक्ष यज्ञ की घटनाओं और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के हस्तक्षेप के पश्चात सती के शरीर का एक अंश इस स्थान पर गिरा, जिससे वह भूमि पवित्र हुई जहाँ आज यह मंदिर खड़ा है।
पीढ़ियों से इस मंदिर की स्थापना की कथा स्थानीय जयंतिया परंपरा के साथ-साथ चली आई है, जिससे एक ऐसा मंदिर बना जहाँ देवी का सम्मान संस्कृतनिष्ठ अनुष्ठान और क्षेत्र की अपनी भक्ति रीतियों, दोनों के द्वारा परस्पर सम्मान के साथ किया जाता है।
महत्व और भक्तों की कामनाएँ
नारतियांग आने वाले श्रद्धालु शक्ति, सुरक्षा और समृद्धि हेतु देवी का आशीर्वाद माँगते हैं, जैसा किसी भी शक्तिपीठ में किया जाता है, जबकि यह मंदिर जयंतिया पहाड़ियों की देवी के प्रति दीर्घकालीन भक्ति के प्रतीक के रूप में गहरा सांस्कृतिक महत्व भी रखता है।
परंपरा के अनुसार:
- भक्त देवी से शक्ति, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं
- यह मंदिर अखिल भारतीय और स्थानीय जनजातीय भक्ति के सुंदर मेल को दर्शाता है
- जयंतिया राजपरिवार के ऐतिहासिक संरक्षण का सम्मानपूर्वक स्मरण किया जाता है
हर शक्तिपीठ की भाँति, यहाँ की पूजा भी श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, व्यापार नहीं।
दर्शन मार्गदर्शिका और पर्व

इस मंदिर में सबसे महत्वपूर्ण आयोजन दुर्गा पूजा के समय होता है, जब मंदिर शास्त्रीय देवी पूजा और जयंतिया पहाड़ियों की विशिष्ट स्थानीय रीतियों, दोनों को दर्शाने वाले अनुष्ठानों से जीवंत हो उठता है। इस अवधि का माहौल इस विशिष्ट परंपरा-मेल को देखने के इच्छुक भक्तों और आगंतुकों को आकर्षित करता है।
शेष वर्ष के दौरान मंदिर में पूजा की एक शांत लय बनी रहती है, जिसे स्थानीय पुजारी और आसपास का समुदाय संभालते हैं।
कैसे पहुँचें
नारतियांग मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में स्थित है, जो भारत के पूर्वोत्तर का एक सुरम्य पहाड़ी क्षेत्र है। निकटतम बड़ा नगर जोवाई है, और यह मंदिर मेघालय की प्राकृतिक सुंदरता तथा भक्ति विरासत के मेल को देखने आने वाले आगंतुकों के लिए एक सामान्य पड़ाव है।
यह क्षेत्र मेघालय की राजधानी शिलांग से सड़क मार्ग द्वारा भलीभाँति जुड़ा है, जिससे नारतियांग राज्य की पहाड़ियों और पवित्र स्थलों की व्यापक यात्रा के हिस्से के रूप में सुगम है।
जप हेतु मंत्र और समापन विचार
भक्त अपनी प्रार्थना इस सरल मंत्र के साथ अर्पित करते हैं: "ॐ दुर्गायै नमः" (देवी दुर्गा को नमन)
यह मंत्र, जो देवी पूजा में सर्वत्र प्रचलित है, यहाँ भी देश के किसी भी शक्तिपीठ जितनी ही निष्ठा से जपा जाता है।
नारतियांग भक्तों को यह स्मरण कराता है कि देवी की उपस्थिति किसी एक भाषा या रीति की मोहताज नहीं। जहाँ भी श्रद्धा खुले हृदय से एकत्रित होती है, वहाँ वे अपनी ही रीति में, पूर्णता के साथ सम्मानित होती हैं।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
नारतियांग दुर्गा मंदिर शक्तिपीठों में क्यों विशिष्ट है?+
नारतियांग इस बात के लिए विशिष्ट है कि यहाँ अखिल भारतीय देवी पूजा मेघालय की जयंतिया पहाड़ियों की स्थानीय जनजातीय परंपराओं के साथ घुलमिल गई है, जिससे परस्पर सम्मान का एक मंदिर बना है।
नारतियांग मंदिर का ऐतिहासिक रूप से रखरखाव किसने किया?+
जयंतिया राजपरिवार ने ऐतिहासिक रूप से नारतियांग दुर्गा मंदिर के रखरखाव और पूजा में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिसकी विरासत आज भी सम्मानपूर्वक स्मरण की जाती है।
नारतियांग मेघालय के शेष हिस्सों से कैसे जुड़ा है?+
नारतियांग जयंतिया हिल्स जिले में स्थित है, जो मेघालय की राजधानी शिलांग से सड़क मार्ग द्वारा भलीभाँति जुड़ा है, जिससे यह राज्य की पहाड़ियों और पवित्र स्थलों की व्यापक यात्रा के हिस्से के रूप में सुगम है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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