भगवान अय्यप्पा और सबरीमला की पहाड़ी
सबरीमला पश्चिमी घाट के पेरियार वन के भीतर केरल में स्थित एक पर्वतीय मंदिर है, जो भगवान अय्यप्पा को समर्पित है, जो शिव और मोहिनी के नैष्ठिक ब्रह्मचारी पुत्र हैं। वे धर्म शास्ता, धर्म के रक्षक रूप में योग मुद्रा में विराजमान हैं। यह मंदिर विश्व की सबसे बड़ी वार्षिक तीर्थयात्राओं में से एक है, जहाँ लाखों भक्त आते हैं जो एक-दूसरे को केवल स्वामी कहकर संबोधित करते हैं।
अय्यप्पा की कथा
अय्यप्पा को पंडलम के निःसंतान राजा ने शिशु रूप में पाया, उनके गले में एक घंटी बँधी थी, इसलिए उनका नाम मणिकंदन रखा गया। रानी की दिखावटी बीमारी ठीक करने के लिए वे बाघिन का दूध लाने निकले, इसी दौरान उन्होंने राक्षसी महिषी का दमन कर अपना दिव्य उद्देश्य पूरा किया। अपने दिव्य धाम लौटने से पहले उन्होंने एक बाण चलाया जो सबरीमला पर गिरा और वहाँ मंदिर बनाने को कहा, सच्चे तप के बाद चढ़कर आने वाले सभी को आशीर्वाद देते हुए।
41 दिन का व्रतम
सबरीमला तीर्थयात्रा की मुख्य विशेषता 41 दिन का व्रतम (मंडल तप) है जिसे हर तीर्थयात्री यात्रा से पहले धारण करता है। इस अवधि में भक्त: 1. काले या नीले वस्त्र और तुलसी या रुद्राक्ष की माला पहनता है। 2. सादा शाकाहारी भोजन करता और ब्रह्मचर्य व सत्य में रहता है। 3. नंगे पैर चलता, सादगी से सोता और क्रोध व नशे से बचता है। 4. सबको अय्यप्पा रूप में देखता और स्वामी नाम से संबोधित होता है। व्रतम शरीर व मन को शुद्ध करता है ताकि दर्शन केवल यात्रा नहीं बल्कि सच्ची तपस्या का फल हो।
18 पवित्र सीढ़ियाँ (पथिनेट्टु पडिकल)

गर्भगृह तक पवित्र पथिनेट्टु पडिकल, अर्थात 18 पवित्र सीढ़ियों, पर चढ़कर पहुँचा जाता है, जिन्हें केवल सिर पर इरुमुडि केट्टु (दो भाग वाली पवित्र पोटली) धारण करने वाले तीर्थयात्री ही चढ़ सकते हैं। अठारह सीढ़ियाँ उन इंद्रियों, गुणों और चरणों की प्रतीक मानी जाती हैं जिन पर साधक को दिव्यता तक पहुँचने के लिए विजय पानी होती है। व्रतम के बाद इन पर चढ़ना सांसारिक आसक्तियों से ऊपर उठकर भगवान अय्यप्पा के समक्ष खड़े होने का प्रतीक है।
मकरविलक्कु और पर्व काल
मंदिर मुख्यतः मंडल-मकरविलक्कु काल (मध्य नवंबर से मध्य जनवरी) में खुलता है। चरम क्षण मकरविलक्कु है जो मकर संक्रांति (लगभग 14 जनवरी) को होता है, जब दूर पहाड़ियों पर पवित्र मकर ज्योति प्रकट होती है और मंदिर के आभूषण (तिरुवाभरणम) शोभायात्रा में लाकर देवता को सजाए जाते हैं। लाखों लोग इसे देखने एकत्र होते हैं, जो तीर्थ वर्ष का सबसे पवित्र क्षण है।
दर्शन समय और यात्रा सुझाव
आधार नगर पंबा है, जहाँ से तीर्थयात्री लगभग 4-5 किमी की चढ़ाई कर मंदिर तक पहुँचते हैं। व्यावहारिक सुझाव: 1. पूरा 41 दिन का व्रतम करें और आरंभ से पहले पुजारी के साथ इरुमुडि केट्टु तैयार करें। 2. दोपहर की धूप और भीड़ से बचने हेतु चढ़ाई जल्दी आरंभ करें। 3. ठंडी रातों के लिए जल, सामान्य दवाएँ और गरम वस्त्र साथ रखें। 4. स्थिर गति से चलें और चिह्नित स्थानों पर विश्राम करें। 5. स्वच्छता व अनुशासन बनाए रखें, पूरे मार्ग में जप होंठों पर रखें।
शरणम् मंत्र

हर अय्यप्पा तीर्थयात्री शरणागति के एक निरंतर जप के साथ चलता है:
स्वामिये शरणम् अय्यप्पा
इसका अर्थ है 'हे भगवान अय्यप्पा, मैं आपकी शरण में हूँ।' व्रतम, चढ़ाई और दर्शन भर दोहराया जाने वाला यह जप मन को देवता पर स्थिर रखता और अहंकार को घोलता है, पूरी यात्रा को एक चलती-फिरती प्रार्थना बना देता है।
पाठकों के प्रश्न
सबरीमला कहाँ है और देवता कौन हैं?+
सबरीमला केरल के पेरियार वन में स्थित एक पर्वतीय मंदिर है, जो भगवान अय्यप्पा को समर्पित है, जो शिव और मोहिनी के ब्रह्मचारी पुत्र हैं और धर्म शास्ता रूप में पूजे जाते हैं।
41 दिन का व्रतम क्या है?+
यह यात्रा से पहले का मंडल तप है जिसमें तीर्थयात्री काले वस्त्र पहनते, सादा शाकाहारी भोजन करते, ब्रह्मचर्य व सत्य में रहते और शरीर-मन शुद्ध करने हेतु अय्यप्पा का नाम जपते हैं।
18 पवित्र सीढ़ियाँ क्या हैं?+
पथिनेट्टु पडिकल गर्भगृह तक जाने वाली 18 पवित्र सीढ़ियाँ हैं, जिन्हें केवल इरुमुडि केट्टु धारण करने वाले तीर्थयात्री चढ़ते हैं। ये उन इंद्रियों और गुणों की प्रतीक हैं जिन पर साधक को विजय पानी होती है।
मकरविलक्कु क्या है?+
मकरविलक्कु लगभग 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर मनाया जाने वाला महान पर्व है, जब पवित्र मकर ज्योति प्रकट होती है और मंदिर के आभूषण शोभायात्रा में लाकर अय्यप्पा को सजाए जाते हैं।
अय्यप्पा मंत्र क्या है?+
जप 'स्वामिये शरणम् अय्यप्पा' है, जिसका अर्थ है 'हे भगवान अय्यप्पा, मैं आपकी शरण में हूँ'। तीर्थयात्री इसे व्रतम, चढ़ाई और दर्शन भर दोहराते हैं।
तीर्थयात्री मंदिर तक कैसे पहुँचते हैं?+
आधार नगर पंबा से तीर्थयात्री लगभग 4-5 किमी की चढ़ाई करते हैं। जल्दी आरंभ करना, जल व गरम वस्त्र साथ रखना, स्थिर गति से चलना और पूरे मार्ग जप करते रहना सर्वोत्तम है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
Meet the Vandnaa editorial team →Explore on Vandnaa
संबंधित लेख

पद्मनाभस्वामी मंदिर - महत्व और दर्शन मार्गदर्शिका
9 मिनट पढ़ें

सप्तपुरी - 7 पवित्र मोक्ष नगरियाँ और महत्व
10 मिनट पढ़ें

अमरनाथ यात्रा - महत्व और हिम शिवलिंग दर्शन
9 मिनट पढ़ें

शिव आरती – ॐ जय शिव ओमकारा लिरिक्स हिंदी में
13 मिनट पढ़ें

ॐ नमः शिवाय मंत्र के फायदे और अर्थ
9 मिनट पढ़ें

गणेश आरती – जय गणेश देवा लिरिक्स हिंदी में
8 मिनट पढ़ें