सावन इतना पवित्र क्यों है
सावन (श्रावण) हिंदू चंद्र पंचांग का पाँचवाँ माह और भगवान शिव का सबसे पवित्र माह है। वर्षा के इन सप्ताहों में, भक्त शिव की विशेष प्रेम से पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, और शिवलिंग पर जल तथा बिल्व (बेल) पत्र अर्पित करते हैं।
परंपरा कहती है कि समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा हेतु घातक हलाहल विष पिया, और उन्हें शीतल करने के लिए देवताओं ने जल चढ़ाया और बेल पत्र अर्पित किए। यह श्रावण में हुआ था, इसलिए भक्त उनके त्याग के सम्मान में पूरे माह शिव को जल और बेल पत्र अर्पित करते हैं। इसलिए सावन गहरी भक्ति, संयम और प्रार्थना का समय है, जब शिव की कृपा सबसे मुक्त रूप से बहती मानी जाती है।
सावन में क्या करें
ये साधनाएँ पूरे माह शिव के आशीर्वाद का आह्वान करती हैं:
- जलाभिषेक करें: शिवलिंग पर प्रतिदिन जल (और विशेष दिनों पर दूध, शहद या पंचामृत) अर्पित करें, श्रेष्ठतः स्नान के बाद सुबह।
- बेल पत्र अर्पित करें: शिवलिंग पर बिल्व (बेल) पत्र चढ़ाएँ - यह शिव को सबसे प्रिय अर्पण है। भांग, धतूरा, श्वेत पुष्प और अक्षत भी अर्पित किए जाते हैं।
- शिव मंत्र जपें: 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय मंत्र और शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ करें।
- सावन सोमवार व्रत रखें: सोमवार को शिव के लिए व्रत रखें, और अविवाहित कन्याएँ सोलह सोमवार या मंगला गौरी व्रत रख सकती हैं।
- रुद्राक्ष धारण करें और दीप अर्पित करें: शिव के समक्ष घी या तेल का दीप जलाएँ और भक्ति के चिह्न रूप में रुद्राक्ष धारण करें।
- दान और करुणा का अभ्यास करें: भोजन दान करें, गायों को खिलाएँ, जरूरतमंद की सहायता करें, और मन को शांत, सत्यनिष्ठ व संतुष्ट रखें।
- शिव मंदिर जाएँ: विशेषकर सोमवार और सावन शिवरात्रि पर, शिव मंदिर में अपनी प्रार्थना अर्पित करें।
सावन में क्या न करें
संयम और पवित्रता के इस माह में, भक्त परंपरागत रूप से इनसे बचते हैं:
- मांसाहार और मदिरा: मांस, मछली, अंडे और नशीली वस्तुएँ कड़ाई से टाली जाती हैं क्योंकि यह माह सात्विक जीवन और पवित्रता का है।
- प्याज और लहसुन: बहुत से भक्त शरीर और मन को शांत व सात्विक रखने के लिए प्याज-लहसुन जैसे तामसिक भोजन से बचते हैं।
- हरी पत्तेदार सब्जियाँ: परंपरा श्रावण में कई हरी पत्तेदार सब्जियों से बचने की सलाह देती है। व्यावहारिक कारण यह है कि वर्षा में ये कीड़ों के प्रति संवेदनशील और पचने में कठिन हो जाती हैं।
- कुछ पर दूध / भाद्रपद में बैंगन: कुछ लोग सावन में दूध पीने से बचते हैं क्योंकि यह शिव को अर्पित होता है; बैंगन अगले माह में अधिक टाला जाता है, पर बहुत लोग हल्का सात्विक भोजन रखते हैं।
- क्रोध, कटु वचन और कलह: यह माह शांति का आह्वान करता है, इसलिए क्रोध, निंदा, असत्य और संघर्ष से बचें।
- बाल/नाखून काटना या दाढ़ी बनाना (कुछ परंपराओं में): कुछ परिवार अनुशासन के चिह्न रूप में इन और अन्य सांसारिक भोगों से बचते हैं; यह क्षेत्र और प्रथा अनुसार बदलता है।
- शिवलिंग या अनुष्ठानों का अनादर: शिवलिंग पर कभी तुलसी, केतकी पुष्प या हल्दी न चढ़ाएँ, और कभी टूटे बेल पत्र अर्पित न करें।
सोमवार व्रत और नियमों के पालन के लाभ

सावन सोमवार व्रत: सोमवार भगवान शिव का दिन है, इसलिए सावन के सोमवार माह का हृदय हैं। सावन सोमवार पर भक्त:
- जल्दी स्नान करें, संकल्प लें और शिवलिंग पर बेल पत्र सहित जलाभिषेक करें।
- व्रत रखें - कुछ केवल फल और जल (फलाहार) लेते हैं, अन्य संध्या पूजा के बाद एक सात्विक भोजन करते हैं।
- 'ॐ नमः शिवाय' जपें और सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ें।
- अविवाहित कन्याएँ प्रायः अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना हेतु यह व्रत रखती हैं, और विवाहित स्त्रियाँ परिवार के कल्याण हेतु।
सावन के नियमों के पालन के लाभ:
- भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा और आशीर्वाद
- मन की शांति, पवित्रता और आत्म-अनुशासन
- विघ्नों और आंतरिक नकारात्मकता का निवारण
- सात्विक, हल्के वर्षा-अनुकूल आहार से स्वास्थ्य लाभ
- संकल्प की दृढ़ता और भक्ति की ओर मुड़ा हृदय
सावन की सच्ची भावना कठोर नियम-पालन नहीं बल्कि प्रेमपूर्ण अनुशासन है - जीवन को सरल बनाने, हृदय को शुद्ध करने और भगवान शिव के निकट आने का एक माह।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
सावन में कुछ खाद्य पदार्थ क्यों टाले जाते हैं?+
सावन सात्विक जीवन का माह है, इसलिए शरीर और मन को शुद्ध रखने के लिए मांसाहार, मदिरा, प्याज और लहसुन टाले जाते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियाँ भी टाली जाती हैं, आंशिक रूप से क्योंकि वर्षा में ये कीड़ों के प्रति संवेदनशील और पचने में कठिन हो जाती हैं।
सावन सोमवार व्रत क्या है?+
सावन सोमवार व्रत श्रावण के सोमवारों को रखा जाने वाला भगवान शिव का सोमवार व्रत है। भक्त बेल पत्र सहित जलाभिषेक करते हैं, 'ॐ नमः शिवाय' जपते हैं, व्रत कथा पढ़ते हैं और व्रत रखते हैं। अविवाहित कन्याएँ प्रायः अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना हेतु इसे रखती हैं।
सावन में शिवलिंग पर कभी क्या नहीं चढ़ाना चाहिए?+
तुलसी पत्र, केतकी पुष्प और हल्दी कभी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाने चाहिए, और बेल पत्र टूटे या फटे नहीं होने चाहिए। शिव को सबसे प्रिय अर्पण जल, बेल पत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा और भांग हैं।
सावन माह के मुख्य क्या करें कौन से हैं?+
शिवलिंग पर प्रतिदिन जलाभिषेक और बेल पत्र अर्पित करें, 'ॐ नमः शिवाय' और महामृत्युंजय मंत्र जपें, सावन सोमवार व्रत रखें, दीप जलाएँ, दान और करुणा का अभ्यास करें, सात्विक भोजन करें, और शिव मंदिर जाएँ - विशेषकर सोमवार को।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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