कौन हैं हरि पर्बत की शारिका देवी
श्रीनगर के ऊपर उठे हरि पर्बत पहाड़ी पर शारिका देवी का धाम है, जिन्हें कश्मीरी भक्त जगदंबा का ही एक रूप मानकर पूजते हैं। अधिकांश मंदिरों से अलग, यहां देवी किसी तराशी मूर्ति में नहीं बल्कि एक प्राकृतिक शिला में हैं, जिस पर श्री चक्र यंत्र अंकित है और जिसमें अठारह भुजाओं वाला स्वरूप विराजमान माना जाता है।
शारिका देवी को चक्रेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है, और यह पहाड़ी कश्मीर के सबसे पवित्र स्थलों में गिनी जाती है, जिसकी रक्षा स्वयं देवी अपने शिखर से करती हैं।
हरि पर्बत और देवी की कथा
मान्यता है कि हरि पर्बत कभी एक असुर से पीड़ित था, और देवी ने मैना पक्षी का रूप धारण कर एक कंकड़ उस असुर पर गिराया, जो बढ़ते-बढ़ते यही पहाड़ी बन गया और असुर को उसके नीचे दबा दिया गया। इसीलिए इस पहाड़ी को देवी की शक्ति का साक्षात स्वरूप माना जाता है।
सदियों से इस स्थल की सतत उपासना होती रही है, और पहाड़ी के मध्य में बना छोटा शारिका देवी मंदिर कश्मीरी हिंदू समुदाय की भक्ति का केंद्र रहा है।
चक्रेश्वरी पूजन का महत्व
भक्तों का विश्वास है कि शारिका देवी की उपासना से रक्षा प्राप्त होती है, बाधाएं दूर होती हैं और सच्ची प्रार्थनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर के केंद्र में स्थित श्री चक्र यंत्र देवी पूजा में एक शक्तिशाली प्रतीक माना जाता है, जो देवी के निराकार, दिव्यतम स्वरूप को दर्शाता है।
कई कश्मीरी पंडित परिवार पर्वों और महत्वपूर्ण अवसरों पर हरि पर्बत के दर्शन को आवश्यक मानते हैं, और पहाड़ी पर चढ़ना स्वयं में एक भक्ति कर्म समझा जाता है।
दर्शन मार्गदर्शिका और पर्व

यह धाम सामान्यतः दिन भर दर्शन के लिए खुला रहता है, और भक्त पहाड़ी पर सीढ़ियां चढ़कर यहां पहुंचते हैं। नवरात्रि दर्शन के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय है, जब मंदिर में भक्तों की निरंतर भीड़ देवी को प्रणाम करने आती है।
चूंकि समय मौसम के अनुसार बदल सकता है, श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि सुबह या देर शाम की यात्रा से पहले स्थानीय जानकारी अवश्य ले लें।
हरि पर्बत कैसे पहुंचें
हरि पर्बत श्रीनगर शहर के भीतर ही स्थित है, जिससे यह शहर के किसी भी कोने से स्थानीय परिवहन द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। श्रीनगर का हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन शहर को शेष भारत से जोड़ते हैं।
इस पहाड़ी को अक्सर श्रीनगर के अन्य धामों के साथ जोड़कर देखा जाता है, और भक्त सामान्यतः चढ़ाई और दर्शन के लिए कुछ घंटे निकालते हैं।
मंत्र और सार
यहां भक्त ॐ शारिकायै नमः अथवा व्यापक देवी मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडाये नमः का जप करते हुए प्रार्थना करते हैं।
कथा के अनुसार देवी की शक्ति से बदला हुआ हरि पर्बत भक्तों को स्मरण कराता है कि श्रद्धा एक पहाड़ को भी तीर्थ बना सकती है, और पूजा अंततः एक व्यापार नहीं बल्कि प्रेम और विश्वास का कार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शारिका देवी के स्वरूप में क्या विशेष है?+
देवी को तराशी मूर्ति के बजाय श्री चक्र यंत्र अंकित प्राकृतिक शिला के रूप में पूजा जाता है, और उन्हें चक्रेश्वरी के नाम से जाना जाता है।
हरि पर्बत को पवित्र क्यों माना जाता है?+
मान्यता है कि यह पहाड़ी तब बनी जब देवी ने पक्षी का रूप धारण कर एक कष्टकारी असुर पर कंकड़ गिराया, जो बढ़ते-बढ़ते पहाड़ी बन गया।
हरि पर्बत के दर्शन के लिए कब जाना चाहिए?+
नवरात्रि विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है, हालांकि यह धाम वर्षभर भक्तों का स्वागत करता है; समय की जानकारी स्थानीय स्तर पर लेना उचित है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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