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शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम: आरोग्य की प्राचीन रक्षिका
Pilgrimage

शीतला माता मंदिर, गुरुग्राम: आरोग्य की प्राचीन रक्षिका

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित मई 18, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

गुरुग्राम की शीतला माता

गुरुग्राम के बाहरी छोर पर प्राचीन शीतला माता मंदिर स्थित है, जो उत्तर भारत भर में स्वास्थ्य की रक्षिका, विशेषकर बच्चों की रक्षिका, और त्वचा रोगों तथा चेचक से बचाने वाली देवी के रूप में पूजी जाती हैं। भक्त उन्हें देवी का करुणामयी, मातृसुलभ स्वरूप मानते हैं।

यह मंदिर हरियाणा के महत्वपूर्ण देवी धामों में से एक है, जहां दिल्ली एनसीआर और उससे बाहर से भी भक्त आते हैं।

इतिहास और कृपी कथा

स्थानीय परंपरा के अनुसार, यह स्थल कृपी से जुड़ा माना जाता है, जो महाभारत काल से संबंधित हैं, और जिनकी भक्ति इस धाम की उत्पत्ति से जुड़ी हुई स्मरण की जाती है। पीढ़ियों में स्थानीय भक्ति से यह मंदिर क्षेत्र के सबसे अधिक दर्शन किए जाने वाले शीतला धामों में से एक बन गया।

यद्यपि सटीक ऐतिहासिक विवरण कथा के साथ गुंथे हुए हैं, भक्त इस स्थल की पवित्रता को निर्विवाद मानते हैं, और उसी श्रद्धा के साथ दर्शन करते हैं जो उनके परिवार पीढ़ियों से लेकर आए हैं।

महत्व और भक्तों की श्रद्धा

भक्त शीतला माता के पास परंपरा के अनुसार अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, त्वचा रोगों से राहत और परिवार के सामान्य कल्याण की कामना लेकर आते हैं। शीतला धामों में एक विशिष्ट प्रथा है ताजा पका भोजन नहीं बल्कि ठंडा, बासी भोजन (बासौड़ा) अर्पित करना, जो देवी के शीतलता और ज्वर से राहत के संबंध में निहित है।

चैत्र नवरात्रि और शीतला अष्टमी के दिन मंदिर विशेष रूप से भीड़भाड़ वाला रहता है, जब परिवार साथ मिलकर उनका आशीर्वाद लेने आते हैं।

दर्शन मार्गदर्शिका और समय

दर्शन मार्गदर्शिका और समय

यह मंदिर सामान्यतः सुबह जल्दी खुलता है और दिनभर सुलभ रहता है, और निश्चित समय पर आरती होती है। शीतला अष्टमी, जो सामान्यतः चैत्र माह में आती है, इस धाम के वर्ष का सबसे व्यस्त दिन होता है।

भक्तों को सलाह दी जाती है कि विशेषकर इस पर्व के आसपास यात्रा से पहले वर्तमान समय की जानकारी ले लें।

शीतला माता मंदिर कैसे पहुंचें

यह मंदिर गुरुग्राम के बाहरी छोर पर स्थित है, जहां दिल्ली एनसीआर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। गुरुग्राम का रेलवे स्टेशन और निकटवर्ती दिल्ली हवाई अड्डा अन्य शहरों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य परिवहन केंद्र हैं।

स्थानीय टैक्सी और बसें शहर के केंद्र को मंदिर से जोड़ती हैं, जिससे एनसीआर क्षेत्र के भक्तों के लिए यह एक सुविधाजनक एक-दिवसीय यात्रा बन जाती है।

जप हेतु मंत्र और सार

भक्त इस धाम में स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करते समय ॐ शीतलायै नमः का जप करते हैं।

शीतला माता की पूजा की सौम्य, शीतल प्रकृति, जो स्वास्थ्य और मां की अपने बच्चों के प्रति देखभाल पर केंद्रित है, भक्तों को स्मरण कराती है कि देवी की कृपा प्रायः जीवन के सबसे सरल सुखों में प्रकट होती है, और पूजा प्रेम और विश्वास का कार्य है, व्यापार नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीतला माता किस लिए जानी जाती हैं?+

उन्हें स्वास्थ्य की रक्षिका, विशेषकर बच्चों की रक्षिका, और त्वचा रोगों तथा चेचक से बचाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है।

बासौड़ा प्रथा क्या है?+

भक्त ताजा पका भोजन नहीं बल्कि ठंडा, बासी भोजन अर्पित करते हैं, यह परंपरा देवी के शीतलता और ज्वर से राहत के संबंध से जुड़ी है।

मंदिर में सबसे अधिक भीड़ कब होती है?+

शीतला अष्टमी, जो सामान्यतः चैत्र माह में आती है, चैत्र नवरात्रि के साथ सबसे व्यस्त दिन होता है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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