अभिषेक क्या है और शिव को प्रिय क्यों है
अभिषेक का अर्थ है देव का अनुष्ठानिक स्नान - यहाँ, मंत्र जपते हुए शिवलिंग पर पवित्र द्रव डालना। जब केवल जल से किया जाए तो इसे जलाभिषेक कहते हैं; कई अर्पणों (दूध, दही, शहद आदि) से यह रुद्राभिषेक का अंग है।
भगवान शिव भोलेनाथ के नाम से जाने जाते हैं - सरल, सहज प्रसन्न होने वाले प्रभु। परंपरा मानती है कि वे प्रेम से दिए गए जल और बेल पत्र के सरलतम अर्पण से ही संतुष्ट हो जाते हैं, किसी वैभव की माँग नहीं करते। यही कारण है कि अभिषेक, विशेषकर सावन (श्रावण) माह में जलाभिषेक, उनकी पूजा का सबसे प्रिय रूप है, जिसे लाखों लोग गंगा जल लाकर उनके स्थान पर अर्पित करते हुए रखते हैं।
अभिषेक में क्या अर्पित करें (क्रम से)
पूर्ण अभिषेक में अर्पण एक-एक करके शिवलिंग पर डाले जाते हैं, बीच में थोड़ा स्वच्छ जल सहित, ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र जपते हुए:
1. जल: शुद्ध जल, श्रेष्ठ है गंगा जल - पहला और सबसे आवश्यक अर्पण। 2. दूध: कच्चा, बिना उबला दूध, पतली धार में डालें। 3. दही: शीतलता और पोषण के लिए। 4. घी: थोड़ा शुद्ध घी। 5. शहद: भक्ति में मधुरता के लिए। 6. शक्कर / शर्करा: प्रभु को अर्पित मधुरता। (ये पाँच - दूध, दही, घी, शहद, शक्कर - मिलकर पंचामृत बनाते हैं।) 7. सुगंधित जल: थोड़े चंदन या गुलाब सहित जल, या पुनः गंगाजल, अंतिम धार के रूप में।
अभिषेक के बाद शिवलिंग को धीरे से पोंछें और चंदन, बेल पत्र, धतूरा, श्वेत पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और भोग अर्पित करें।
जलाभिषेक विधि
1. तैयारी: स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और जल (हो तो गंगाजल), अभिषेक सामग्री, बेल पत्र और एक लोटा एकत्र करें। 2. संकल्प: उत्तर या पूर्व की ओर मुँह कर बैठें, हाथ जोड़ें और भक्ति से अभिषेक करने का सरल संकल्प लें। 3. जल से आरंभ: ॐ नमः शिवाय जपते हुए शिवलिंग पर स्थिर धार में स्वच्छ जल डालें। धीरे डालें, कभी बलपूर्वक नहीं। 4. क्रम से अर्पण: अन्य अर्पण जोड़ें - दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत) - प्रत्येक के बीच थोड़े जल की धार सहित, मंत्र जारी रखते हुए। 5. अंतिम धार: स्वच्छ जल या गंगाजल से समाप्त करें ताकि केवल शुद्ध जल शेष रहे। 6. श्रृंगार: तीन रेखाओं में चंदन लगाएँ, बेल पत्र (चिकनी ओर नीचे, तीन-तीन में), श्वेत पुष्प और धतूरा रखें, और अक्षत अर्पित करें। 7. धूप, दीप, भोग: धूप, दीप और सरल भोग अर्पित करें। 8. मंत्र और आरती: महामृत्युंजय मंत्र जपें और शिव आरती करें। 9. प्रदक्षिणा: अर्ध परिक्रमा करें (शिव परिक्रमा परंपरागत रूप से जलाधारी तक आधी की जाती है और लौट आते हैं)। 10. प्रणाम: झुकें और भोलेनाथ से किसी भूल के लिए क्षमा माँगें।
ध्यान रखने योग्य बातें (और बचने योग्य)

कुछ पारंपरिक बातें जो बहुत भक्त ध्यान में रखते हैं:
- बेल पत्र शिव को प्रिय है। तीन (या अधिक) पत्तियों वाले ताजे पत्ते अर्पित करें; परंपरा कहती है कि वे फटे या छिद्र वाले न हों। चिकनी ओर शिवलिंग की ओर रखी जाती है।
- कुछ वस्तुओं से बचें: परंपरा मानती है कि तुलसी, केतकी (केवड़ा) पुष्प, हल्दी और कुमकुम सामान्यतः शिव को अर्पित नहीं किए जाते (हल्दी और कुमकुम अधिकतर देवी के लिए)।
- धीरे डालें और छींटे मारने के बजाय पतली, स्थिर धार का प्रयोग करें।
- परिक्रमा केवल आधी करें, जलाधारी से प्रवाह का सम्मान करते हुए, फिर लौट आएँ।
- स्वच्छता: ताजी, अदूषित वस्तुएँ और स्वच्छ जल प्रयोग करें।
- सावन सबसे शुभ है: सोमवारों (सावन सोमवार) और पूरे श्रावण माह में जलाभिषेक शिव को विशेष प्रिय माना जाता है।
सबसे बढ़कर, स्मरण रखें कि शिव भोलेनाथ हैं - सच्चे हृदय से एक लोटा जल भी उन्हें प्रसन्न करता है।
त्वरित उत्तर
जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर है?+
जलाभिषेक केवल जल से शिवलिंग को स्नान कराना है, सरलतम अर्पण। रुद्राभिषेक पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) जैसे कई अर्पणों के साथ अधिक विस्तृत अभिषेक है, जो रुद्र मंत्रों के जप सहित किया जाता है।
शिव को क्या अर्पित नहीं करना चाहिए?+
परंपरा के अनुसार तुलसी, केतकी (केवड़ा) पुष्प, हल्दी और कुमकुम सामान्यतः भगवान शिव को अर्पित नहीं किए जाते। हल्दी और कुमकुम मुख्यतः देवी को अर्पित होते हैं। बेल पत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा और भांग शिव को विशेष प्रिय हैं।
सावन में जलाभिषेक विशेष क्यों है?+
सावन (श्रावण) माह भगवान शिव का सबसे प्रिय माह माना जाता है। भक्त सावन सोमवारों और पूरे माह जलाभिषेक करते हैं, बहुत लोग गंगा जल (कांवर) लाकर उनके स्थान पर अर्पित करते हैं, यह मानते हुए कि इस काल में उनकी कृपा सबसे सहज बहती है।
बेल पत्र कैसे अर्पित करें?+
तीन पत्तियों वाला ताजा बेल पत्र अर्पित करें, श्रेष्ठ है अखंड और बिना छिद्र, स्वच्छ जल में धोकर। चिकनी ओर शिवलिंग की ओर रखी जाती है। 'ॐ नमः शिवाय' के साथ बेल पत्र अर्पित करना शिव को विशेष प्रिय माना जाता है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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