शिव अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
शिव अष्टोत्तर शतनामावली भगवान शिव (महादेव, भोलानाथ, महाकाल) के 108 दिव्य नामों वाला पवित्र स्तोत्र है। 'अष्टोत्तर' का अर्थ '108' (अष्ट = 8 + उत्तर = 100) और 'शतनामावली' का अर्थ 'सौ नामों की माला'। हर 108 नामों में से एक शिव के एक पहलू को दर्शाता - उनकी हिमालयन तपस्या (तपस्वी) से लेकर ब्रह्मांडीय नृत्य (नटराज), उग्र विनाशकारी रूप (रुद्र) से लेकर सबसे करुणामय पहलू (शंकर) तक। यह स्तोत्र शिव पुराण व पद्म पुराण में मिलता, और शैव गृहस्थों के दैनिक संध्या वंदनम् अनुष्ठान का हिस्सा। बीज मंत्रों के विपरीत जिन्हें सटीक उच्चारण चाहिए, अष्टोत्तर क्षमाशील - शिव 'भोला भण्डारी' जो भाव को सटीक संस्कृत से अधिक प्रतिक्रिया देते। स्तोत्र 10-12 मिनट लेता, प्रातः/सायं पूजा में फिट। यह सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, और श्रावण मास के दौरान सबसे अधिक पठित शिव प्रार्थना। दक्षिण भारतीय शिव मंदिर (तमिलनाडु, कर्नाटक) हर अभिषेकम् में पाठ करते। अष्टोत्तर किसी भी शिव भक्त हेतु 'पूर्ण प्रार्थना' मानी - एक अभ्यास में भक्ति, आह्वान, समर्पण मिलाती।
शिव के सम्पूर्ण 108 नाम (संस्कृत + अर्थ)
हर नाम 'ॐ' से शुरू और 'नमः' पर समाप्त। नाम 1-24: ॐ शिवाय (शुभ), ॐ महेश्वराय (महान स्वामी), ॐ शम्भवे (आनंद दात्री), ॐ पिनाकिने (पिनाक धनुषधारी), ॐ शशिशेखराय (चंद्र-मुकुटधारी), ॐ वामदेवाय, ॐ विरूपाक्षाय (त्रिनेत्र), ॐ कपर्दिने (जटाधारी), ॐ नीललोहिताय (नीलकण्ठ लाल शरीर), ॐ शंकराय, ॐ शूलपाणये (त्रिशूलधारी), ॐ खट्वांगिने, ॐ विष्णुवल्लभाय (विष्णु प्रिय), ॐ शिपिविष्टाय, ॐ अम्बिकानाथाय, ॐ श्रीकंठाय (सुंदर कंठ), ॐ भक्तवत्सलाय (भक्त-प्रेमी), ॐ भवाय, ॐ शर्वाय (राक्षस संहारक), ॐ त्रिलोकेशाय (त्रिलोक स्वामी), ॐ शितिकंठाय, ॐ शिवप्रियाय, ॐ उग्राय (उग्र), ॐ कपालिने (कपालधारी)। नाम 25-48: ॐ कामारिने (काम शत्रु), ॐ अन्धकासुर सूदनाय (अन्धक-वध), ॐ गंगाधराय (गंगा-धारक), ॐ ललाटाक्ष (ललाट तृतीय नेत्र), ॐ कालकालाय (मृत्यु के मृत्यु), ॐ कृपानिधये (कृपा-निधि), ॐ भीमाय, ॐ परशुहस्ताय (परशुधारी), ॐ मृगपाणये (हिरण-हस्त), ॐ जटाधराय, ॐ कैलासवासिने, ॐ कवचिने, ॐ कठोराय, ॐ त्रिपुरांतकाय (त्रिपुर-नाशक), ॐ वृषांगाय, ॐ वृषभारूढाय (नंदी-वाहन), ॐ भस्मोद्धूलित विग्रहाय (भस्म-लेपित), ॐ सामप्रियाय, ॐ स्वरमयाय, ॐ त्रयीमूर्तये, ॐ अनीश्वराय, ॐ सर्वज्ञाय (सर्वज्ञ), ॐ परमात्मने, ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय (चंद्र-सूर्य-अग्नि नेत्र)। नाम 49-72 में हविष, यज्ञमयाय, सोमाय, पंचवक्त्राय (पञ्चमुख), सदाशिवाय, विश्वेश्वराय, वीरभद्राय, गणनाथाय, प्रजापतये, हिरण्यरेतसे, दुर्द्धर्षाय, गिरीशाय, गिरिशाय, अनघाय, भुजंगभूषणाय, भर्गाय, गिरिधन्वने, गिरिप्रियाय, कृत्तिवाससे, पुरारारये, भगवते, प्रमथाधिपाय, मृत्युंजयाय, सूक्ष्मतनवे शामिल। नाम 73-96 में जगद्व्यापिने, जगद्गुरवे, व्योमकेशाय, महासेनजनकाय, चारुविक्रमाय, रुद्राय, भूतपतये, स्थाणवे, अहर्याय, भुवनतेश्वराय, सद्योजाताय, अनाद्याय, भस्मोद्व्युयतिगाय, पिनाकिने, शूलपाणिने, विश्वरूपाय, सहस्राक्षाय, सहस्रपादे, अपवर्गप्रदाय, अनंतात्मने, तारकाय, परमेश्वराय, महेश्वराय, हरिहरविधिमूर्ताय। नाम 97-108: ॐ महाकालाय, ॐ कलाश्रीये, ॐ कृत्तिकंठाय, ॐ लम्बोदराय, ॐ महाप्रभु, ॐ सर्वात्मने, ॐ योगपते, ॐ भगवते, ॐ पद्मनाभाय, ॐ महात्माय, ॐ चतुर्मुखाय, ॐ महादेवाय। समापन - 'इति श्री शिवाष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम्'।
शिव के 108 नाम दैनिक जप के 7 लाभ
1. संचित कर्म हटाता (संस्कार दहन) - शिव महाकाल, समय व कर्म के नाशक। 41 दिनों दैनिक 1 माला कर्म-भार हल्का करती। भक्त पुराने अपराधबोध, पछतावे से 'मुक्त' महसूस। 2. मृत्यु भय व अनित्यता का उपचार - शिव मृत्यु के स्वामी (महाकाल)। 'मृत्युंजय' व 'कालकालाय' नाम थानाटोफोबिया से प्रतिरक्षा। अंतिम बीमारी रोगियों के अंत शांति से सामना हेतु विशेष शक्तिशाली। 3. शनि व राहु महादशा निवारण - शनि शिव के शिष्य और राहु शिव से डरता। साढ़े साती या राहु महादशा वाले दैनिक अष्टोत्तर भक्त बाधाओं में नाटकीय कमी बताते। 4. पुराने क्रोध, व्यसन, तमस का उपचार - शिव ने तृतीय नेत्र से काम जलाया। दैनिक जप व्यसनों, सोशल मीडिया, क्रोध-प्रकरण को हराने हेतु आंतरिक अग्नि बनाता। 5. कण्ठ, आवाज़, श्वास उपचार - शिव 'नीलकंठ' (कण्ठ में ब्रह्मांडीय विष धारण किया)। गायक, शिक्षक, दमा रोगी, थायरॉइड रोगी मापने योग्य सुधार बताते। 6. विवाह व दाम्पत्य सामंजस्य - शिव-पार्वती सर्वोच्च दिव्य युगल। सोमवार दैनिक जप करने वाले अविवाहित संगत साथी पाते; विवाहित नवीन सामंजस्य पाते। अष्टोत्तर में 'अर्धनारीश्वर' नाम विशेष विवाह समर्थन। 7. मोक्ष का प्रत्यक्ष मार्ग - स्कंद पुराण कहता मृत्यु के समय शिव के 108 नाम जप मोक्ष देता। दैनिक अभ्यास मन को अंतिम क्षण शिव स्मरण के लिए तैयार करता - परम आध्यात्मिक लक्ष्य।
दैनिक जप विधि

श्रेष्ठ दिन: सोमवार (शिव का दिन), शनिवार, प्रदोष (13वीं तिथि), महाशिवरात्रि (सर्वोच्च)। मंगलवार से नई शुरुआत न करें। श्रेष्ठ समय: ब्रह्म मुहूर्त (4-6 AM) या प्रदोष काल (4:30-7 PM)। महाशिवरात्रि पर मध्यरात्रि। सामग्री: 1. रुद्राक्ष माला (108, 5-मुखी)। 2. बिल्व (बेल) पत्र - शिव का सर्वाधिक पवित्र पौधा। 3. भस्म तिलक। 4. श्वेत पुष्प या आक के फूल। 5. लिंगम हो तो ठंडा दूध/जल/पंचामृत अभिषेक। 6. सूती बत्ती घी दीया। 7. आसन पर श्वेत वस्त्र। तैयारी (5 मिनट): 8. ठंडा स्नान। 9. श्वेत वस्त्र। 10. श्वेत/ऊनी आसन पर पूर्व/उत्तर मुख। 11. ललाट पर भस्म त्रिपुण्ड्र। संकल्प: 12. दाहिनी अंजली जल। बोलें: 'मैं [नाम], गोत्र [गोत्र], इस [तिथि], शिव अष्टोत्तर 108 नाम [प्रयोजन] हेतु जपता हूँ'। जल भूमि पर। जप (12-15 मिनट): 13. 'ॐ' तीन बार धीमे। 14. 'ॐ नमः शिवाय' 11 बार। 15. अष्टोत्तर जपें - 108 नाम, प्रति नाम एक मनका। गति: 6-8 सेकंड प्रति नाम। 16. वैकल्पिक: हर नाम पर एक बिल्व पत्र (108 कुल - पवित्र संख्या)। समापन (5 मिनट): 17. नाम 108 के बाद 'इति श्री शिवाष्टोत्तर शतनामावली सम्पूर्णम्'। 18. कपूर + दीये से आरती। 'ॐ जय शिव ओंकारा' या 'कर्पूरगौरं करुणावतारम्'। 19. प्रसाद - बिल्व जल, पंचामृत, खीर। 20. 5-10 मिनट मौन - 'अवशोषण' काल जब शिव ऊर्जा आप में स्थिर। 21. 30 मिनट तक किसी से न बोलें - ऊर्जा एकीकृत हो।
जप हेतु श्रेष्ठ पर्व व दिन
साप्ताहिक: सोमवार (सोमवार) शिव हेतु THE दिन। शनिवार द्वितीय-श्रेष्ठ - शनि शिव के शिष्य। मासिक: प्रदोष व्रत (हर पक्ष की 13वीं तिथि, माह में दो बार) - सायं गोधूलि पर जपें। मासिक शिवरात्रि (हर माह कृष्ण पक्ष की 14वीं तिथि) - मध्यरात्रि। वार्षिक प्रमुख पर्व: 1. महाशिवरात्रि (फाल्गुन कृष्ण 14, फरवरी-मार्च) - रात के 4 प्रहरों में 4 बार जपें सर्वोच्च आशीर्वाद हेतु। 2. सावन/श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) - श्रावण के हर सोमवार 11 अष्टोत्तर। वर्ष का शिव साधना हेतु सबसे शक्तिशाली मास। 3. कार्तिक पूर्णिमा (अक्टू-नव) - त्रिपुरारि पूर्णिमा, जब शिव ने त्रिपुरासुर को मारा। 4. सावन शिवरात्रि (सावन का अंतिम सोमवार) - द्वितीय महाशिवरात्रि के समान। 5. श्रावण में प्रदोष - सावन मास में अति-शक्तिशाली प्रदोष। अशुभ दिन: नई शुरुआत हेतु मंगलवार टालें (यह हनुमान का दिन)। संबंधी की मृत्यु के अगले दिन टालें (सूतक काल - 13वीं क्रिया तक प्रतीक्षा)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या शिव अष्टोत्तर महा मृत्युंजय या रुद्राष्टकम् के समान है?+
नहीं - तीनों शिव प्रार्थनाएं परन्तु भिन्न। शिव अष्टोत्तर: 108 नाम, भक्ति, 10-12 मिनट, दैनिक। महा मृत्युंजय: 1 मंत्र (32 स्वर), स्वास्थ्य/मृत्यु सुरक्षा हेतु, 108 बार 8-10 मिनट। रुद्राष्टकम्: तुलसीदास के अवधी में 8 श्लोक, अधिक काव्यात्मक, 6-8 मिनट। भक्ति + सामान्य आशीर्वाद हेतु अष्टोत्तर, स्वास्थ्य संकट हेतु महा मृत्युंजय, गंभीर पीड़ा हेतु रुद्राष्टकम्।
क्या दीया के लिए सरसों तेल या घी प्रयोग करूँ?+
शिव हेतु केवल घी। सरसों तेल हनुमान, शनि, और भैरव (शिव के उग्र रूप) हेतु। शुद्ध गाय का घी सूती बत्ती मानक। दैनिक शिव पूजा हेतु तिल का तेल भी स्वीकार्य। आरती हेतु कपूर अनिवार्य - शिव एकमात्र देवता जहाँ कपूर वैकल्पिक नहीं आवश्यक माना जाता।
क्या महिलाएं मासिक धर्म के दौरान शिव अष्टोत्तर जप सकती हैं?+
मानसिक जप अनुमत। लिंगम स्पर्श, अभिषेक, और बिल्व अर्पण टालें। शिव हिंदू परंपरा में एकमात्र देवता जिन्होंने 'मैं किसी प्राकृतिक प्रक्रिया में अशुद्धता नहीं देखता' (शिव पुराण) कहा। कई शैव परंपराएं मासिक धर्म के दौरान महिला साधकों को स्पष्ट रूप से अनुमति देती। रिकॉर्ड पाठ सुनें, मन में दोहराएं, ध्यान-मुद्रा में शिव की कल्पना।
अष्टोत्तर और रुद्रम् में अंतर क्या?+
रुद्रम् (कृष्ण यजुर्वेद से श्री रुद्रम्) 11 अनुवाकों का बहुत लंबा वैदिक स्तोत्र (~30 मिनट)। रुद्राभिषेकम् - सबसे विस्तृत शिव अनुष्ठान - में प्रयोग, 11 सामग्रियों के अभिषेक के साथ। अष्टोत्तर पश्च-वैदिक (पौराणिक), छोटा (10-12 मिनट), दैनिक भक्ति हेतु। प्रामाणिकता क्रम: श्री रुद्रम् > अष्टोत्तर > चालीसा > सरल भजन। विशेष दिनों (महाशिवरात्रि, प्रदोष) पर गहन शिव साधना हेतु रुद्रम् श्रेष्ठ। दैनिक हेतु अष्टोत्तर इष्टतम।
यदि समय की कमी से सभी 108 नाम न जप सकूँ तो?+
तीन विकल्प: (1) केवल 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार (5-6 मिनट) - दैनिक सुरक्षा हेतु समान शक्तिशाली। (2) अष्टोत्तर के पहले 12 नाम (12 ज्योतिर्लिंगों का प्रतिनिधित्व) - 2-3 मिनट, तंग कार्यक्रम हेतु। (3) सप्ताहांत पूर्ण अष्टोत्तर, साप्ताहिक दिनों दैनिक ॐ नमः शिवाय। पूर्णता से अधिक निरंतरता। शिव ने स्कंद पुराण में स्वयं कहा: 'भाव से जपा मेरा एक नाम यांत्रिक रूप से जपे हज़ारों के बराबर।'
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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