सोमवती अमावस्या क्या है
अमावस्या वह नव-चंद्र (अमावस) दिन है जो प्रत्येक चंद्र पक्ष को समाप्त करता है। जब यह अमावस्या सोमवार को पड़ती है, तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। चूँकि सोमवार भगवान शिव और चंद्रमा का दिन है, यह संयोग दुर्लभ और विशेष शक्तिशाली माना जाता है। यह शिव-पार्वती की उपासना, पितरों के सम्मान और विवाहित स्त्रियों द्वारा पति की दीर्घायु की प्रार्थना का दिन है।
महत्व और यह कब पड़ती है
सोमवती अमावस्या का कोई निश्चित मास नहीं होता - यह केवल उन्हीं महीनों में आती है जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़े, जो वर्ष में बस दो या तीन बार ही हो सकता है। यह दुर्लभता इसे गहराई से शुभ बनाती है। यह दांपत्य सुख, दिवंगत पितरों को शांति और दोषों से राहत देती मानी जाती है। 2026 में सोमवती अमावस्या वर्ष में सोमवार को पड़ती है; सही तिथि और समय के लिए वंदना पंचांग पर पुष्टि करें।
सोमवती अमावस्या पूजा विधि
दिन स्वच्छता और भक्ति से बिताएँ: 1. प्रातः जल्दी उठें और स्नान करें, यथासंभव पवित्र नदी में; संभव न हो तो स्नान जल में थोड़ा गंगा जल मिलाएँ। 2. सूर्योदय पर सूर्य को अर्घ्य (जल) दें। 3. भगवान शिव और माँ पार्वती की उपासना करें, शिवलिंग पर बेल पत्र, श्वेत पुष्प, दूध और जल अर्पित करें। 4. अपने पितरों का स्मरण कर प्रार्थना करें, और यदि विधि जानते हों तो तर्पण करें। 5. किसी पीपल वृक्ष के पास जाएँ, उसकी जड़ में जल दें और दीप व पवित्र धागा अर्पित करें। 6. जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र या अनाज दान करें। अनेक विवाहित स्त्रियाँ दिनभर व्रत रखती हैं और संध्या पूजा के बाद इसे खोलती हैं।
पीपल वृक्ष परिक्रमा (108 परिक्रमा)

पीपल वृक्ष पवित्र है और भगवान विष्णु, ब्रह्मा व शिव का एक साथ निवास माना जाता है। सोमवती अमावस्या पर विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु हेतु पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं। परिक्रमा करते हुए वे प्रत्येक चक्र पर तने के चारों ओर एक सफेद रक्षा सूत्र (सूती धागा) लपेटती हैं और जल, दूध, चंदन, पुष्प तथा जलता दीप अर्पित करती हैं। प्रत्येक परिक्रमा के साथ परिवार के कल्याण व सामंजस्य की प्रार्थना की जाती है।
सोमवती अमावस्या के सरल उपाय
इस दिन के कुछ पारंपरिक उपाय: 1. पितरों की शांति हेतु पीपल वृक्ष व पितरों को काले तिल मिले जल अर्पित करें। 2. समृद्धि हेतु संध्या को पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीप जलाएँ। 3. शिवलिंग पर कच्चा दूध व जल चढ़ाएँ और 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें। 4. दान का पुण्य पाने हेतु गाय, कुत्ते, पक्षी व जरूरतमंदों को भोजन कराएँ। 5. दिवंगत बुजुर्गों का स्मरण करते हुए बहती नदी में दीप प्रवाहित करें या पुष्प अर्पित करें। ये कर्म पितृ दोष दूर करते, दांपत्य सामंजस्य लाते और स्थिर भाग्य को आमंत्रित करते माने जाते हैं।
लाभ और आध्यात्मिक महत्व
सोमवती अमावस्या को श्रद्धा से रखना दीर्घ, सुखी दांपत्य, पितरों को शांति व पितृ दोष से मुक्ति, और पूरे परिवार के लिए शिव-पार्वती के आशीर्वाद देता माना जाता है। पवित्र स्नान, दान और पीपल पूजन मन को शुद्ध करते और संचित नकारात्मकता को धो देते हैं। चूँकि यह दिन चंद्रमा के दिन को अमावस्या से जोड़ता है, यह आंतरिक शांति, ध्यान और मौन आत्मचिंतन के लिए भी आदर्श माना जाता है।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
सोमवती अमावस्या क्या है?+
यह वह अमावस्या (अमावस दिन) है जो सोमवार को पड़ती है। चूँकि सोमवार भगवान शिव और चंद्रमा को पवित्र है, यह दुर्लभ संयोग उपासना व उपायों हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है।
विवाहित स्त्रियाँ पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा क्यों करती हैं?+
पीपल में विष्णु, ब्रह्मा व शिव का वास माना जाता है। विवाहित स्त्रियाँ प्रत्येक चक्र पर धागा लपेटते हुए 108 परिक्रमा करती हैं, पति की दीर्घायु व कल्याण की प्रार्थना करते हुए।
2026 में सोमवती अमावस्या कब पड़ती है?+
सोमवती अमावस्या केवल तभी आती है जब अमावस्या सोमवार को पड़े, वर्ष में बस दो या तीन बार। 2026 की सही तिथि व समय के लिए वंदना पंचांग पर पुष्टि करें।
सोमवती अमावस्या पर कौन से उपाय किए जाते हैं?+
पीपल व पितरों को काले तिल मिला जल दें, पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीप जलाएँ, शिवलिंग पर अभिषेक करें, और गाय, पक्षी व जरूरतमंदों को दान-भोजन कराएँ।
क्या सोमवती अमावस्या पितरों के सम्मान हेतु शुभ है?+
हाँ। अमावस्या पारंपरिक रूप से पितरों से जुड़ी है, और सोमवती अमावस्या तर्पण, दान व प्रार्थना हेतु विशेष शुभ है जो दिवंगत बुजुर्गों को शांति और पितृ दोष से राहत देती है।
क्या सोमवती अमावस्या पर व्रत रखना चाहिए?+
अनेक विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु हेतु दिनभर व्रत रखती हैं और संध्या पूजा के बाद इसे खोलती हैं। व्रत वैकल्पिक है; सच्चा स्नान, उपासना व दान मुख्य कर्म हैं।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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