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सूर्य देव आरती और चालीसा - बोल, अर्थ, लाभ और रविवार उपासना
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सूर्य देव आरती और चालीसा - बोल, अर्थ, लाभ और रविवार उपासना

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 2, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

सूर्य देव कौन हैं

सूर्य देव सूर्य भगवान हैं, प्रत्यक्ष देवता जिनका प्रकाश पृथ्वी के समस्त जीवन का भरण करता है। सात घोड़ों से जुते और अरुण द्वारा हाँके स्वर्ण रथ पर सवार, वे स्वास्थ्य, जीवनशक्ति, आत्मा के स्वामी और शनि, यम व यमुना के पिता हैं। ऊर्जा व स्वयं काल के स्रोत होने के कारण, सूर्य की उपासना दृढ़ स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, नेतृत्व और तेजोमय, रोगमुक्त शरीर के लिए की जाती है।

महत्व और रविवार उपासना

रविवार सूर्य देव का दिन है, जब भक्त व्रत रखते, एक समय भोजन करते, नमक से बचते और लाल या केसरिया वस्त्र पहनते हैं। सबसे बड़े सूर्य पर्व छठ पूजा, मकर संक्रांति और रथ सप्तमी हैं। उदित सूर्य की ओर जल चढ़ाना - अर्घ्य - प्रातः उनकी उपासना का हृदय है और शरीर, नेत्र व प्राणशक्ति को सुदृढ़ करता माना जाता है। रविवार को सूर्य चालीसा व आरती का पाठ सूर्य दोष दूर कर सफलता लाता माना जाता है।

सूर्य चालीसा - सार और प्रारंभिक दोहा

सूर्य चालीसा सात-अश्व रथ के तेजोमय स्वामी, अंधकार व रोग के नाशक की स्तुति करती है। प्रारंभिक दोहा:

कनक बदन कुंडल मकर, मुकुट देह दीप्तिमान। बंदों सूर्य प्रभाकर, दीनन को सुख-दान।

चौपाई (उदाहरण): जय जय सूर्य देव दिन-कर स्वामी, जग के पालन हर अंतर-जामी। सप्ताश्व रथ चढ़ि प्रभु आये, अंधकार जग से मिट जाये।

छंद सूर्य को प्रकाश, स्वास्थ्य, यश और हर अंधकार पर विजय की शक्ति के दाता रूप में महिमामंडित करते हैं।

सूर्य देव आरती

सूर्य देव आरती

सूर्योदय पर अर्घ्य अर्पित कर सूर्य की ओर मुख कर यह आरती गाएँ:

ॐ जय सूर्य भगवाना, स्वामी जय सूर्य भगवाना। सप्ताश्व रथ सोहे, अति शुभ सुख-दाता। चराचर के तुम स्वामी, जग के पालन-हारा। तव दर्शन पाये से, मिट जाये अंधियारा।

प्रकाश की ओर हाथ जोड़ें, फिर आने वाले दिन के लिए स्वास्थ्य, स्पष्टता और शक्ति की प्रार्थना करें।

सूर्य अर्घ्य और रविवार पूजा विधि

1. सूर्योदय से पहले उठें, स्नान कर स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र पहनें। 2. ताँबे के पात्र (लोटे) में जल भरें, लाल पुष्प, रोली और थोड़े चावल डालें। 3. उदित सूर्य की ओर मुख कर धीरे-धीरे जल को अर्घ्य रूप में चढ़ाएँ, धारा में से प्रकाश को आने दें। 4. अर्पण करते समय ॐ सूर्याय नमः या सूर्य गायत्री का 7 या 11 बार जप करें। 5. सूर्य चालीसा और फिर आरती पढ़ें। 6. चाहें तो रविवार व्रत रखें, बिना नमक एक समय भोजन करें, और गेहूँ, गुड़ या लाल वस्त्र दान करें। ताँबे का प्रयोग करें, और अर्घ्य जल वहाँ न गिरने दें जहाँ उस पर पैर पड़े।

सूर्य उपासना के लाभ

सूर्य देव की उपासना स्वास्थ्य, दृष्टि, हड्डियों व हृदय को सुदृढ़ करती, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति व नेतृत्व बढ़ाती और यश, शासकीय कृपा व करियर सफलता लाती मानी जाती है। आत्मा के स्वामी होने के कारण उनकी उपासना मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक, ऊर्जावान दृष्टिकोण देती है। नियमित अर्घ्य व पाठ सूर्य दोष और जीवन में सूर्य की कमजोरी को कम करते भी माने जाते हैं।

ध्यान रखने योग्य बातें

ध्यान रखने योग्य बातें

सूर्योदय के एक घंटे के भीतर अर्घ्य दें ताकि कोमलतम, सर्वाधिक लाभकारी किरणें मिलें, और तेज सूर्य में सीधे न देखें। ताँबे के पात्र का प्रयोग करें, क्योंकि ताँबा सूर्य से जुड़ा है, और अर्पण में लाल पुष्प व रोली रखें। रविवार को व्रत हो तो नमक से बचें, अपने पिता व बड़ों का सम्मान करें (सूर्य पिता का प्रतीक है), और आचरण में सच्चे रहें, क्योंकि सूर्य सत्य और आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

सूर्य देव कौन हैं?+

सूर्य देव सूर्य भगवान हैं, प्रत्यक्ष देवता जिनका प्रकाश समस्त जीवन का भरण करता है। वे सात घोड़ों के रथ पर सवार और स्वास्थ्य, जीवनशक्ति व आत्मा के स्वामी हैं।

सूर्य मंत्र क्या है?+

सरल मंत्र 'ॐ सूर्याय नमः' है, और शक्तिशाली सूर्य गायत्री भी जपी जाती है। इन्हें रविवार को सूर्योदय पर अर्घ्य देते समय 7 या 11 बार पढ़ा जाता है।

सूर्य अर्घ्य कैसे दिया जाता है?+

ताँबे के पात्र में जल, लाल पुष्प, रोली और चावल भरें, उदित सूर्य की ओर मुख करें, और सूर्य मंत्र जपते हुए धीरे-धीरे जल चढ़ाएँ, धारा में से प्रकाश को आने दें।

सूर्य देव की उपासना के लिए कौन सा दिन सर्वोत्तम है?+

रविवार सूर्य का दिन है। भक्त व्रत रखते, लाल या केसरिया पहनते, सूर्योदय पर अर्घ्य देते और सूर्य चालीसा व आरती पढ़ते हैं। रथ सप्तमी और छठ उनके सबसे बड़े पर्व हैं।

सूर्य उपासना के क्या लाभ हैं?+

यह स्वास्थ्य, दृष्टि व हृदय को सुदृढ़ करती, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति व नेतृत्व बढ़ाती, यश व करियर सफलता लाती और जीवन में सूर्य दोष कम करती मानी जाती है।

क्या अर्घ्य देते समय सूर्य को देख सकते हैं?+

सूर्योदय के एक घंटे के भीतर अर्घ्य दें जब किरणें कोमल हों, और गिरती जलधारा से कोमल प्रकाश देखें। तेज दोपहर के सूर्य में सीधे कभी न देखें।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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