त्र्यंबकेश्वर कहाँ है
त्र्यंबकेश्वर दसवाँ ज्योतिर्लिंग है, जो महाराष्ट्र में नासिक के निकट त्र्यंबक नगर में, शहर से लगभग 28 किमी दूर स्थित है। यह ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में उठता है, जहाँ से पवित्र गोदावरी नदी - 'दक्षिण की गंगा' - का उद्गम होता है। वर्तमान मंदिर, सुंदर काले पत्थर में, 18वीं सदी में पेशवा शासक बालाजी बाजीराव ने बनवाया। यह नगर कुंभ मेले के चार स्थलों में से एक है, जो पवित्र स्नान पर्व में लाखों को खींचता है।
त्रिमुखी लिंग
त्र्यंबकेश्वर को सभी ज्योतिर्लिंगों में अद्वितीय बनाने वाली बात इसके तीन मुख हैं जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) - सृष्टिकर्ता, पालक और संहारक - तीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लिंग गर्भगृह के भीतर एक छोटी कुंड में विराजमान है और आमतौर पर रत्नजड़ित चाँदी के मुकुट से ढका रहता है, जो केवल विशेष अवसरों पर प्रकट होता है। युगों में लिंग कुछ घिस गया है, जिसे भक्त इस पवित्र स्थल की महान प्राचीनता व अपार उपासना का प्रतीक मानते हैं।
कथा और गोदावरी
कथा के अनुसार, ऋषि गौतम पर एक गाय की मृत्यु का झूठा दोष लगा, तब उन्होंने उस पाप को धोने हेतु पवित्र गंगा को धरती पर लाने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। प्रसन्न होकर शिव ने ब्रह्मगिरि पर अपनी जटाओं से गोदावरी के रूप में नदी छोड़ी और यहाँ ज्योतिर्लिंग रूप में रहना चुना। इसीलिए गोदावरी को गौतमी गंगा भी कहते हैं। यों मंदिर शिव की कृपा को एक महान नदी की पावन शक्ति से जोड़ता है।
काल सर्प और नारायण नागबली पूजा

त्र्यंबकेश्वर भारत में काल सर्प दोष निवारण पूजा और नारायण नागबली अनुष्ठान का सबसे प्रसिद्ध स्थल है, जो सर्प-संबंधी दोष, पितृ कष्ट और विवाह व संतान की बाधाओं के निवारण हेतु किया जाता है। ये पूजाएँ प्रशिक्षित पुरोहित एक से तीन दिन में, गोदावरी तट पर कठोर विधि से संपन्न करते हैं। देशभर से भक्त विशेषकर इन्हीं उपायों हेतु यहाँ आते हैं, जिससे यह नगर शांति अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र बन गया है।
दर्शन और यात्रा सुझाव
मंदिर आमतौर पर प्रातः लगभग 5:30 बजे खुलता है और दिनभर लगभग 9:00 बजे रात्रि तक दर्शन देता है, प्रातः व संध्या आरती के साथ; कुंभ व पर्वों के दौरान समय की पुष्टि करें। नासिक निकटतम शहर है जिसमें रेल व वायु संपर्क हैं, और 28 किमी दूर त्र्यंबक तक बारंबार बसें व टैक्सियाँ चलती हैं। समय बचाने हेतु विशेष सशुल्क दर्शन पंक्ति उपलब्ध है। गर्भगृह के भीतर लिंग स्पर्श हेतु पारंपरिक नियम लागू हो सकते हैं, अतः मंदिर कर्मचारियों का अनुसरण करें और शालीन वस्त्र पहनें।
जप हेतु शिव मंत्र
भक्त दर्शन के समय पंचाक्षर मंत्र का जप करते हैं:
ॐ नमः शिवाय
मंदिर के स्वास्थ्य, उपचार व दोष निवारण से संबंध को देखते हुए, अनेक महामृत्युंजय मंत्र भी पढ़ते हैं:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
इसी मंत्र में त्र्यम्बक (त्रिनेत्रधारी प्रभु) नाम आता है, जो इसे यहाँ की उपासना हेतु गहराई से उपयुक्त बनाता है।
पर्व और कुंभ मेला

महाशिवरात्रि बड़े उत्साह से मनाई जाती है, अभिषेक व रात्रि जागरण के साथ। सिंहस्थ कुंभ मेला, जो यहाँ लगभग हर बारह वर्ष में बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश पर होता है, पवित्र गोदावरी स्नान हेतु लाखों तीर्थयात्रियों व साधुओं को खींचता है। श्रावण मास और त्रिपुरी पूर्णिमा में भी बड़े समागम होते हैं। देवता की वार्षिक रथ यात्रा (कुशावर्त) शोभायात्रा एक प्रिय स्थानीय पर्व है जो नगर को भक्ति से भर देता है।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
त्र्यंबकेश्वर लिंग में क्या विशेष है?+
त्र्यंबकेश्वर एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जिसके तीन मुख हैं, जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। लिंग एक छोटी कुंड में विराजमान है और आमतौर पर रत्नजड़ित चाँदी के मुकुट से ढका रहता है।
त्र्यंबकेश्वर से कौन सी नदी निकलती है?+
गोदावरी, जिसे दक्षिण की गंगा कहते हैं, त्र्यंबकेश्वर में ब्रह्मगिरि पर्वत से उद्गम लेती है। ऋषि गौतम के इसे लाने के कारण इसे गौतमी गंगा भी कहते हैं।
त्र्यंबकेश्वर काल सर्प पूजा के लिए प्रसिद्ध क्यों है?+
त्र्यंबकेश्वर काल सर्प दोष निवारण और नारायण नागबली पूजा का सबसे प्रसिद्ध स्थल है, जो गोदावरी तट पर सर्प-संबंधी दोष, पितृ कष्ट और विवाह व संतान की बाधाओं के निवारण हेतु किया जाता है।
त्र्यंबकेश्वर कैसे पहुँचें?+
नासिक, लगभग 28 किमी दूर, रेल व वायु संपर्क वाला निकटतम शहर है। नासिक से त्र्यंबक तक बारंबार बसें व टैक्सियाँ चलती हैं, और मंदिर में समय बचाने हेतु सशुल्क दर्शन पंक्ति उपलब्ध है।
त्र्यंबकेश्वर में कुंभ मेला कब होता है?+
सिंहस्थ कुंभ मेला लगभग हर बारह वर्ष में होता है, जब बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। लाखों तीर्थयात्री व साधु त्र्यंबक व नासिक में पवित्र गोदावरी में स्नान हेतु एकत्र होते हैं।
त्र्यंबकेश्वर में कौन सा मंत्र जपना सर्वोत्तम है?+
दर्शन के समय 'ॐ नमः शिवाय' जपें। महामृत्युंजय मंत्र यहाँ विशेष उपयुक्त है, क्योंकि यह शिव को त्र्यम्बक, त्रिनेत्रधारी प्रभु, के रूप में संबोधित करता है, जो इस मंदिर का ही नाम है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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