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विजया एकादशी 2027 - व्रत कथा, पूजा विधि और विजय दिलाने वाला व्रत
Vrat & Fasting

विजया एकादशी 2027 - व्रत कथा, पूजा विधि और विजय दिलाने वाला व्रत

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 10, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

विजया एकादशी क्या है?

विजया एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है, यानी कृष्ण पक्ष का ग्यारहवां दिन। इसका नाम ही इसका फल बताता है - विजया अर्थात विजय। वर्ष की चौबीस एकादशियों में यह उन भक्तों के लिए विशेष मानी जाती है जो किसी कठिन संघर्ष का सामना कर रहे हों - कोई मुकदमा, परीक्षा, बीमारी या कोई असंभव सा लगने वाला कार्य। स्कंद पुराण जैसे ग्रंथ इसे वह व्रत बताते हैं जो भक्त और सफलता के बीच की बाधाएं दूर करता है। हर एकादशी की तरह यह भी भगवान विष्णु को समर्पित है। यह व्रत कोई जादू नहीं है - यह समर्पण का दिन है, जब भक्त कहता है, "मैं स्वयं को शुद्ध करूं और विजय आपकी कृपा से मिले।" यही विनम्र प्रयास और श्रद्धा विजया एकादशी का सार है।

विजया एकादशी 2027 तिथि

विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण एकादशी को मनाई जाती है, जो 2027 में फरवरी-मार्च के आसपास पड़ेगी। एकादशी तिथि हर वर्ष अलग समय पर शुरू और समाप्त होती है, और पारण का समय द्वादशी के आरंभ तथा आपके शहर के सूर्योदय पर निर्भर करता है। इसलिए यहां कोई निश्चित घड़ी का समय नहीं दिया गया है। व्रत शुरू करने से पहले वंदना पंचांग पर सटीक व्रत तिथि, एकादशी तिथि का आरंभ-समापन और अपने शहर का पारण मुहूर्त अवश्य देखें। 1. देखें कि आपके शहर में सूर्योदय के समय एकादशी तिथि है या नहीं - इसी से व्रत का दिन तय होता है। 2. अगली सुबह द्वादशी के पारण समय को नोट करें। 3. यदि दो तिथियां दी हों (स्मार्त और वैष्णव), तो गृहस्थ प्रायः पहली और संन्यासी दूसरी का पालन करते हैं। संदेह हो तो अपनी कुल परंपरा का अनुसरण करें। 4. दशमी की संध्या के भोजन और द्वादशी के पारण की योजना पहले से बना लें, ताकि व्रत का दिन व्यवस्थाओं के बजाय पूजा के लिए मुक्त रहे।

महत्व - यह एकादशी विजय क्यों दिलाती है

पद्म पुराण और स्कंद पुराण में वर्णन है कि ब्रह्मा जी ने नारद मुनि को विजया एकादशी की महिमा बताई - यह व्रत अनेक जन्मों के पाप नष्ट करने और वहां सफलता दिलाने में समर्थ है जहां सारे मानवीय प्रयास विफल हो चुके हों। इसकी विशेष महिमा भगवान राम से जुड़ी है - यदि धर्म के साक्षात स्वरूप प्रभु ने स्वयं अपने सबसे बड़े युद्ध से पहले यह व्रत किया, तो यह हमें सिखाता है कि सबसे समर्थ व्यक्ति को भी प्रयास के साथ प्रार्थना जोड़नी चाहिए। भक्ति की दृष्टि से यह व्रत "विजय" की परिभाषा ही बदल देता है। व्रत की असली जीत अपनी ही चंचलता, क्रोध और संदेह पर है - वे भीतरी शत्रु जो किसी बाहरी युद्ध से पहले ही हमें हरा देते हैं। भक्त विष्णु जी से केवल अनुकूल परिणाम नहीं, बल्कि वह मानसिक स्थिरता मांगते हैं जो हर परिणाम को सहने योग्य और हर प्रयास को पवित्र बना दे। कई परिवार किसी बच्चे की परीक्षा, नौकरी के साक्षात्कार या बड़े निर्णय से पहले यह एकादशी साथ मिलकर रखते हैं, और चिंता के मौसम को श्रद्धा के साझा कर्म में बदल देते हैं।

विजया एकादशी व्रत कथा - समुद्र के सामने भगवान राम

विजया एकादशी व्रत कथा - समुद्र के सामने भगवान राम

जब रावण ने माता सीता का हरण किया, तो भगवान राम वानर सेना के साथ दक्षिण की ओर बढ़े, पर विशाल समुद्र ने उनका मार्ग रोक दिया। लंका उस पार थी और बड़े-बड़े योद्धा भी समुद्र के आगे असहाय थे। श्रीराम ने लक्ष्मण से पूछा कि कोई उपाय है क्या। लक्ष्मण ने पास ही आश्रम में रहने वाले ऋषि बकदाल्भ्य के पास चलने का सुझाव दिया, जो प्राचीन विधियों के ज्ञाता थे। ऋषि ने प्रभु का हर्षपूर्वक स्वागत किया और कहा: "फाल्गुन कृष्ण एकादशी को विजया नामक व्रत पूर्ण विधि से करें - जल से भरा कलश स्थापित करें, श्री हरि की पूजा करें, रात्रि उनके स्मरण में जागकर बिताएं और द्वादशी को पारण करें। यह व्रत असंभव कार्यों में विजय दिलाता है।" भगवान राम ने सेना सहित यह व्रत किया। शीघ्र ही समुद्र ने मार्ग दिया, पत्थरों का सेतु बना और लंका पर विजय हुई। तभी से भक्त अपने जीवन के समुद्रों का सामना करते समय विजया एकादशी का व्रत रखते हैं।

विजया एकादशी पूजा विधि - चरण दर चरण

परंपरागत विधि कथा में वर्णित कलश-केंद्रित पूजा का ही अनुसरण करती है। 1. दशमी की संध्या को सूर्यास्त से पहले एक सादा सात्विक भोजन करें और शांत मन से जल्दी सो जाएं। 2. एकादशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें और भगवान विष्णु के सम्मुख व्रत और अपनी प्रार्थना का संकल्प लें। 3. अनाज की छोटी ढेरी पर जल से भरा कलश स्थापित करें; उसके पास या ऊपर श्री विष्णु या श्री राम का चित्र अथवा मूर्ति रखें। 4. पंचामृत, तुलसी दल (एक दिन पहले तोड़े हुए), पीले पुष्प, चंदन, धूप और दीपक अर्पित करें। 5. विजया एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें और दिन भर विष्णु मंत्रों का जप करें। 6. संध्या को आरती करें और स्वास्थ्य अनुमति दे तो भजन व नाम-जप के साथ हल्का जागरण करें। 7. अगली सुबह द्वादशी को कलश और अनाज किसी सुपात्र को दान करें, फिर मुहूर्त में पारण करें।

विजया एकादशी पर जपने योग्य मंत्र

जप को लंबा और जल्दबाजी भरा रखने के बजाय सरल और स्थिर रखें। इस दिन के लिए तीन मंत्र विशेष उपयुक्त हैं। 1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय - ओम् नमो भगवते वासुदेवाय - "भगवान वासुदेव को नमन।" विष्णु जी का द्वादशाक्षर मंत्र; तुलसी माला से 108 बार जपें। 2. ॐ नमो नारायणाय - ओम् नमो नारायणाय - "नारायण को नमन।" अष्टाक्षर मंत्र, दिन भर निरंतर स्मरण के लिए सर्वोत्तम। 3. श्री राम जय राम जय जय राम - श्री राम जय राम जय जय राम - "श्री राम की जय।" प्रभु की विजय से जुड़ी इस एकादशी पर अत्यंत उपयुक्त; कुछ मालाएं भी मन को साहस से भर देती हैं। एकादशी पर प्रातः या संध्या में विष्णु सहस्रनाम का पाठ विशेष पुण्यदायी माना जाता है, और कई भक्त रामचरितमानस के सुंदरकांड का एक अध्याय भी जोड़ते हैं। यदि आप जप में नए हैं, तो एक ही मंत्र चुनकर पूरे दिन उसी पर टिके रहें; गहराई विविधता से नहीं, पुनरावृत्ति से आती है।

पारण नियम और विजया एकादशी के लाभ

पारण नियम और विजया एकादशी के लाभ

पारण यानी व्रत खोलना द्वादशी की सुबह निर्धारित समय में ही होना चाहिए - हरि वासर (द्वादशी की पहली चौथाई) में कभी नहीं, और द्वादशी समाप्त होने के बाद भी नहीं। अपने शहर का सटीक पारण समय वंदना पंचांग पर देखें। व्रत धीरे से खोलें: पहले तुलसी जल, फिर फल या हल्का सात्विक भोजन। खाने से पहले किसी ब्राह्मण, गाय या जरूरतमंद को भोजन कराना इस परंपरा का प्रिय अंग है। इस व्रत से जुड़े लाभ इस प्रकार माने जाते हैं: 1. लंबे समय से अटके कार्यों में सफलता, ईमानदार प्रयास के साथ। 2. पुराने पापों के भार से मुक्ति, जैसा कथा में संचित पापों के नाश का वचन है। 3. साहस और मन की स्पष्टता - वह भीतरी विजय जो हर बाहरी विजय से पहले आती है। 4. गहरी भक्ति, क्योंकि भगवान के लिए भूखा बिताया दिन हृदय की भूख की दिशा ही बदल देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजया एकादशी 2027 में कब है?+

विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण एकादशी को आती है, जो 2027 में फरवरी-मार्च के आसपास पड़ेगी। तिथि का समय हर वर्ष बदलता है और पारण आपके शहर पर निर्भर करता है, इसलिए सटीक तिथि और मुहूर्त वंदना पंचांग पर देखें।

भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत क्यों किया?+

कथा के अनुसार, जब समुद्र ने लंका का मार्ग रोका तो ऋषि बकदाल्भ्य ने भगवान राम को यह व्रत करने की सलाह दी। प्रभु और उनकी सेना के व्रत के बाद लंका का सेतु बना और विजय मिली - इसीलिए इसका नाम विजया पड़ा।

विजया एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?+

अनाज, चावल, दालें, प्याज और लहसुन वर्जित हैं। भक्त फल, दूध, दही, मेवे और साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, राजगीरा व समा चावल जैसी फलाहारी चीजें लेते हैं। निर्जला रखने वाले अन्न-जल दोनों त्यागते हैं; अपने स्वास्थ्य के अनुसार स्तर चुनें।

विजया एकादशी का सही पारण समय क्या है?+

पारण द्वादशी की सुबह सूर्योदय के बाद, द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले की अवधि में किया जाता है, और हरि वासर (द्वादशी की पहली चौथाई) में कभी नहीं। सटीक समय शहर और वर्ष के अनुसार बदलता है, इसलिए वंदना पंचांग पर देखें।

क्या परीक्षा या मुकदमे में सफलता के लिए विजया एकादशी रख सकते हैं?+

हां, कठिन कार्यों का सामना करते समय भक्त परंपरागत रूप से यह व्रत रखते हैं। पर याद रखें, व्रत भक्ति है, सौदा नहीं - उपवास के साथ सच्चा प्रयास करें और परिणाम भगवान विष्णु की इच्छा पर विश्वास रखते हुए उन्हें समर्पित करें।

विजया एकादशी पर कौन सा मंत्र सर्वोत्तम है?+

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय एकादशी का प्रमुख मंत्र है, जिसे तुलसी माला पर 108 बार जपा जाता है। इस एकादशी का संबंध भगवान राम से होने के कारण कई भक्त श्री राम जय राम जय जय राम का जप या विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करते हैं।

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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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