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पूजा में आचमन क्या है - अर्थ, महत्व और विधि
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पूजा में आचमन क्या है - अर्थ, महत्व और विधि

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 4, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

आचमन क्या है

आचमन पूजा के आरंभ में दाहिनी हथेली से तीन बार थोड़ा जल पीने का अनुष्ठान है। यह शब्द आचमन से आया है, जिसका अर्थ है घूँट लेना या कुल्ला करना। यह लगभग हर हिंदू पूजा, संध्या और व्रत में मुख्य अनुष्ठान आरंभ होने से पहले किया जाने वाला पहला शुद्धिकरण कर्म है। देखने में सरल होते हुए भी, आचमन भीतरी व बाहरी शुद्धि का गहरा अर्थपूर्ण भाव है।

महत्व और अर्थ

आचमन उपासना के तीन उपकरणों - शरीर, वाणी और मन - को शुद्ध करता है। जल पवित्र और स्वयं-शोधक माना जाता है, इसलिए भगवान का नाम लेते हुए इसे पीना भीतरी अशुद्धियों को धोता और उपासक को स्थिर करता है। यह सांसारिक गतिविधि से पवित्र, एकाग्र अवस्था में स्पष्ट परिवर्तन का चिह्न है। इस तैयारी के बिना परंपरा मानती है कि आगे की पूजा में शुद्धि का अभाव रहता है।

विष्णु के तीन नाम

आचमन तीन बार जल पीकर किया जाता है, हर बार भगवान विष्णु का एक नाम बोलते हुए:

1. ॐ केशवाय नमः - एक घूँट। 2. ॐ नारायणाय नमः - दूसरा घूँट। 3. ॐ माधवाय नमः - तीसरा घूँट।

तीन घूँटों के बाद ॐ हृषीकेशाय नमः और ॐ गोविंदाय नमः कहते हुए दाहिने हाथ पर जल डाला जाता है। ये नाम विष्णु की सर्वव्यापी उपस्थिति का आह्वान करते हैं ताकि उपासक शुद्ध व रक्षित हो।

आचमन कैसे करें - चरण दर चरण

आचमन कैसे करें - चरण दर चरण

1. स्वच्छ पंचपात्र (छोटा पात्र) जल और चम्मच (उद्धरणी) के साथ पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। 2. दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लें, ब्रह्म तीर्थ (अंगूठे के मूल पर रखा जल) बनाते हुए। 3. ॐ केशवाय नमः से घूँट लें, फिर ॐ नारायणाय नमः से, और तीसरी बार ॐ माधवाय नमः से। 4. ॐ हृषीकेशाय नमः कहते हुए दाहिना हाथ धोएँ। 5. गीले हाथ से आँख, कान, नाक और कंधों को हल्के से स्पर्श करें। 6. अब शांत, शुद्ध मन से मुख्य पूजा आरंभ करें।

शास्त्रीय आधार

आचमन धर्मशास्त्रों और स्मृतियों में किसी भी अनुष्ठान, भोजन या पवित्र कर्म से पहले आचार (सदाचरण) के आवश्यक अंग के रूप में निर्धारित है। यह अभ्यास इस विचार से जुड़ा है कि जल दिव्य की शुद्धकारी उपस्थिति वहन करता है। घूँट लेते समय विष्णु का नाम लेकर उपासक स्वीकार करता है कि सच्ची शुद्धि केवल जल से नहीं, बल्कि सर्वव्यापी ईश्वर के स्मरण से आती है।

रोज़ का उपयोग और उदाहरण

आचमन दैनिक पूजा, संध्या वंदन, हवन, व्रत संकल्प और शास्त्र पाठ से पहले किया जाता है। उदाहरण के लिए, सत्यनारायण कथा या लक्ष्मी पूजा से पहले परिवार पहले आचमन करता है। एक छोटी घरेलू आरती भी एक एकाग्र आचमन से आरंभ हो सकती है। यह एक छोटी आदत है जो दिव्य की उपस्थिति में मन को स्थिर करके एक सामान्य कर्म को उपासना में बदल देती है।

करें और न करें

करें और न करें

करें: स्वच्छ, ताज़ा जल का प्रयोग करें, शांति से बैठें, अंगूठे के मूल से केवल थोड़ा जल पिएँ, और नामों का सजगता से उच्चारण करें। न करें: घूँट लेते समय आवाज़ न करें, बड़े घूँट न निगलें, अशुद्ध हाथ-पैर से आचमन न करें, या इसे यंत्रवत् जल्दबाज़ी में न करें। पिया गया जल केवल कंठ भिगोने जितना हो, कभी व्यर्थ न गिराया जाए।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

पूजा में आचमन क्या है?+

आचमन पूजा के आरंभ में दाहिनी हथेली से तीन बार जल पीने का कर्म है, हर बार विष्णु का एक नाम बोलते हुए, ताकि उपासना से पहले शरीर, वाणी व मन शुद्ध हो।

आचमन के समय कौन से मंत्र बोले जाते हैं?+

तीन नाम 'ॐ केशवाय नमः', 'ॐ नारायणाय नमः' और 'ॐ माधवाय नमः' हैं, हर घूँट के साथ एक। फिर 'ॐ हृषीकेशाय नमः' से हाथ धोया जाता है।

आचमन तीन बार क्यों किया जाता है?+

तीन घूँट शरीर, वाणी व मन - उपासना के तीन उपकरणों - को शुद्ध करते हैं। हर घूँट विष्णु के एक नाम के साथ अर्पित होता है ताकि तीनों शुद्ध होकर पूजा के योग्य बनें।

आचमन के लिए किस दिशा में मुख करना चाहिए?+

आचमन करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुख करें, स्वच्छ जल पात्र और चम्मच के साथ शांति से बैठकर। ये दिशाएँ उपासना के लिए शुभ मानी जाती हैं।

क्या कोई भी आचमन कर सकता है?+

हाँ। पूजा, संध्या या किसी पवित्र कर्म की तैयारी करने वाला कोई भी आचमन कर सकता है। इसके लिए केवल स्वच्छ हाथ, ताज़ा जल और शांत, भक्तिपूर्ण मन चाहिए, आयु या लिंग की परवाह किए बिना।

क्या आचमन जल पीने जैसा ही है?+

नहीं। आचमन एक अनुष्ठान है, प्यास बुझाना नहीं। अंगूठे के मूल से केवल थोड़ा जल विष्णु के नाम बोलते हुए पिया जाता है, शुद्धि व भक्ति के भाव से।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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