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हम कुछ दिनों में नाखून या बाल क्यों नहीं काटते
Spiritual Wisdom

हम कुछ दिनों में नाखून या बाल क्यों नहीं काटते

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

वास्तविक कारणों वाली एक पुरानी प्रथा

अनेक हिंदू घरों में बुजुर्ग हमें कुछ दिनों में नाखून या बाल काटने से कोमलता से रोकते हैं - प्रायः मंगलवार, गुरुवार और शनिवार। यह केवल अंधविश्वास लग सकता है, पर यह प्रथा भक्ति, ग्रह तर्क और बिजली व स्वच्छ ब्लेड से पहले के समय की बहुत व्यावहारिक स्वच्छता को मिलाती है। 'क्यों' समझना एक अंधे नियम को सार्थक, सचेत चुनाव में बदल देता है।

अपने देवता के दिन कभी नहीं

एक मूल सिद्धांत है जिस देवता की आप उपासना करते हैं उसके दिन नाखून या बाल न काटना, क्योंकि वह दिन पवित्रता और भक्ति के लिए है, सजने-संवरने और 'व्यर्थ' के लिए नहीं। मंगलवार हनुमान व मंगल का, गुरुवार विष्णु, बृहस्पति व गुरु का, और शनिवार शनि का दिन है। इन दिनों नाखून या बाल काटना देवता का अनादर और दिन की शुभ ऊर्जा को बिखेरना अनुभव किया जाता है। अनेक लोग अपने व्रत के दिन तथा एकादशी, अमावस्या व पूर्णिमा को भी इससे बचते हैं।

ग्रह और शास्त्रीय तर्क

पारंपरिक ज्योतिष प्रत्येक वार को एक ग्रह और कुछ कारक (अर्थ) से जोड़ता है। शनिवार पर अनुशासन व कर्म के ग्रह शनि का शासन है, और तब नाखून या बाल काटना कठिनाइयाँ बढ़ाने वाला कहा जाता है। गुरुवार गुरु का दिन है, जो धन, बुद्धि व लक्ष्मी से जुड़ा है, इसलिए काटना समृद्धि को दूर करने वाला माना जाता है। मंगलवार की उग्र मंगल ऊर्जा सजने-संवरने के लिए बहुत तीव्र अनुभव होती है। इस प्रकार यह प्रथा सजने-संवरने को शांत, अधिक सहायक ग्रह दिनों से जोड़ती है।

स्वच्छता और चांद्र तर्क

स्वच्छता और चांद्र तर्क

सदियों पहले न नाखून कतरनी थी, न रोगाणुनाशक, न बिजली की रोशनी, इसलिए सजने-संवरने का काम दिन के उजाले में तेज ब्लेड से होता था। इसे कुछ स्वच्छ, अच्छी रोशनी वाले दिनों में बाँधने से कटने व संक्रमण का जोखिम घटता और घर व शरीर अनुशासित रहता था। कुछ परंपराएँ नाखून व बाल की वृद्धि को चांद्र चक्र से भी जोड़ती हैं, शुक्ल पक्ष को प्राथमिकता देती और अमावस्या से बचती हैं। वस्तुतः यह प्रथा साप्ताहिक स्वच्छता दिनचर्या को कैलेंडर में ही बुन देती थी।

कौन से दिन सही माने जाते हैं

अधिकांश परंपराएँ बुधवार और शुक्रवार को नाखून व बाल काटने के सर्वोत्तम दिन मानती हैं, क्योंकि ये बुध (बुद्धि) और शुक्र (सौंदर्य व समृद्धि) से जुड़े हैं। सोमवार भी व्यापक रूप से स्वीकृत है। आदर्श समय दिन में, शुक्ल पक्ष में है, और सूर्यास्त के बाद कभी नहीं। अनेक परिवार बस बुधवार या शुक्रवार को सजने-संवरने का काम रखते हैं और स्वयं को अधिक स्वच्छ व परंपरा से जुड़ा अनुभव करते हैं।

आस्था, स्वच्छता और सामान्य बुद्धि

इन प्रथाओं का पालन भय से नहीं, समझ से करना सर्वोत्तम है। यदि नाखून दर्द से टूट जाए या स्वच्छता सचमुच माँग करे, तो शरीर की देखभाल कभी पाप नहीं - स्वच्छता स्वयं भक्ति का रूप है। गहरा पाठ सजगता है: शांत, शुभ दिन चुनना, शरीर स्वच्छ रखना, और जिस दिन को आपने अपने देवता को समर्पित किया उसकी भावना का सम्मान करना। इस प्रकार पालन करने पर परंपरा कल्याण और आस्था दोनों को सहारा देती है।

त्वरित उत्तर

हम मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को नाखून या बाल क्यों नहीं काटते?+

ये दिन देवताओं और ग्रहों के हैं - मंगलवार हनुमान व मंगल का, गुरुवार विष्णु व गुरु का, शनिवार शनि का। परंपरा इन्हें भक्ति व पवित्रता हेतु रखती है, और सजना-संवरना दिन की शुभ ऊर्जा बिखेरने वाला अनुभव होता है।

नाखून और बाल काटने के लिए कौन से दिन सर्वोत्तम हैं?+

बुधवार और शुक्रवार सर्वोत्तम माने जाते हैं, जो बुध और शुक्र से जुड़े हैं, सोमवार भी स्वीकृत है। आदर्श समय शुक्ल पक्ष में दिन का है, सूर्यास्त के बाद कभी नहीं।

क्या इस प्रथा के पीछे कोई स्वच्छता कारण है?+

हाँ। कतरनी, रोगाणुनाशक और बिजली से पहले सजने-संवरने का काम दिन के उजाले में तेज ब्लेड से होता था। इसे कुछ स्वच्छ, रोशन दिनों में बाँधने से कटने व संक्रमण घटते और नियमित स्वच्छता दिनचर्या बनती थी।

क्या मुझे अपने व्रत के दिन सजने-संवरने से बचना चाहिए?+

अनेक लोग बचते हैं। जिस दिन आप व्रत या अपने इष्ट देवता की उपासना करते हैं वह पवित्रता व भक्ति हेतु रखा जाता है, इसलिए नाखून या बाल काटना परंपरागत रूप से टाला जाता है, साथ ही एकादशी, अमावस्या व पूर्णिमा को भी।

यदि आवश्यक हो तो वर्जित दिन नाखून काटना क्या पाप है?+

नहीं। यदि नाखून दर्द से टूटे या स्वच्छता सचमुच माँग करे, तो शरीर की देखभाल कभी पाप नहीं - स्वच्छता स्वयं भक्ति है। इस प्रथा का पालन भय से नहीं, समझ से करना सर्वोत्तम है।

क्या बाल काटने में चांद्र चक्र मायने रखता है?+

कुछ परंपराएँ नाखून व बाल की वृद्धि को चंद्रमा से जोड़ती हैं, सजने-संवरने हेतु शुक्ल पक्ष को प्राथमिकता देती और अमावस्या से बचती हैं। शुक्ल पक्ष में दिन का सजना-संवरना सबसे शुभ माना जाता है।

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About the author

Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.

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