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हम मंगलवार को व्रत क्यों रखते हैं - हनुमान के लिए महत्व
Spiritual Wisdom

हम मंगलवार को व्रत क्यों रखते हैं - हनुमान के लिए महत्व

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Reviewed by Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

मंगलवार हनुमान और मंगल का दिन क्यों है

मंगलवार मंगल (मंगल ग्रह) का दिन है - साहस, ऊर्जा और अनुशासन का लाल, तेजस्वी ग्रह। हनुमान जी, निर्भय शक्ति, भक्ति और ब्रह्मचर्य के मूर्त रूप, वही देव हैं जो मंगल का शासन और शमन करते हैं। इसलिए मंगलवार रक्षा हेतु हनुमान की उपासना और प्रबल मंगल को शांत करने का दिन बना। दोनों का साझा रंग लाल है - ओज और शक्ति का प्रतीक।

शास्त्रीय और सांस्कृतिक कारण

परंपरा मानती है कि हनुमान जी का जन्म मंगलवार को हुआ, जिससे इस दिन का उनसे संबंध और गहरा हुआ। भक्त मंगलवार व्रत शत्रुओं, दृष्टि दोष, भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा हेतु, तथा कुंडली में मंगल दोष या मांगलिक स्थिति होने पर मंगल को प्रसन्न करने हेतु रखते हैं। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ इस दिन का केंद्र है, और अनेक लोग कठिनाई के समय या महत्वपूर्ण कार्यों से पहले संकल्प के रूप में व्रत रखते हैं।

वैज्ञानिक और मानसिक दृष्टिकोण

मंगल ताप, उग्रता और बेचैनी का प्रतीक है, और मंगलवार व्रत में परंपरागत रूप से नमक और भारी भोजन से परहेज किया जाता है - एक हल्का आहार जो शरीर को शीतल करता और चिड़चिड़ाहट को कम करता है। मंगलवार का पारंपरिक प्रसाद चना और गुड़ धीमी ऊर्जा और लोह तत्व देता है, पाचन पर अधिक भार डाले बिना। मानसिक रूप से, साहस-केंद्रित हनुमान चालीसा का पाठ चिंता व भय घटाता, आत्मविश्वास बढ़ाता और बेचैन 'मंगल' ऊर्जा को क्रोध की बजाय स्थिर अनुशासन में मोड़ता है।

सही विधि - मंगलवार व्रत कैसे रखें

सही विधि - मंगलवार व्रत कैसे रखें

1. प्रातः स्नान कर हनुमान और मंगल के रंग लाल या नारंगी स्वच्छ वस्त्र पहनें। 2. हनुमान की मूर्ति या चित्र के सामने संकल्प लें और चमेली के तेल का दीपक जलाएँ। 3. लाल पुष्प, तेल में मिला सिंदूर (चोला) और तिलक अर्पित करें; उपलब्ध हो तो जनेऊ चढ़ाएँ। 4. हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें और ॐ हनुमते नमः जपें। 5. संध्या पूजा के बाद एक बार भोजन करें, चना, गुड़ और फल लें; अनेक लोग इस दिन नमक से परहेज करते हैं। 6. लड्डू, चना और गुड़ का भोग लगाएँ, फिर हनुमान आरती करें।

बचने योग्य सामान्य भूलें

इस दिन मांस, मद्य या प्याज और लहसुन का सेवन न करें, क्योंकि हनुमान जी कठोर ब्रह्मचारी देव हैं जो पवित्रता को महत्व देते हैं। स्त्रियाँ परंपरागत रूप से अपने हाथों से सीधे सिंदूर अर्पित करने या मासिक धर्म के समय मूर्ति स्पर्श करने से बचती हैं। केवल भय से व्रत रखने से बचें - इसका उद्देश्य अंधविश्वास नहीं, भक्ति और साहस बढ़ाना है। अंत में, व्रत का पारण भारी, नमकीन या तले भोजन से न करें।

मंगलवार व्रत के लाभ

मंगलवार व्रत साहस, शक्ति और शत्रुओं, दुर्घटनाओं, भय व दृष्टि दोष से रक्षा देता, तथा मंगल दोष व मांगलिक कुंडली के कष्ट घटाता माना जाता है। यह संघर्षों में विजय, बाधाओं के निवारण और ऋण से मुक्ति में सहायक है। आध्यात्मिक रूप से यह हनुमान के प्रति भक्ति गहरी करता और अपने हल्के आहार से शीतल स्वभाव व स्थिर ऊर्जा लाता है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

हम हनुमान के लिए मंगलवार को व्रत क्यों रखते हैं?+

मंगलवार मंगल ग्रह का दिन है, और हनुमान जी वही देव हैं जो मंगल का शासन और शमन करते हैं। परंपरा कहती है उनका जन्म मंगलवार को हुआ, इसलिए यह दिन उनकी रक्षा, साहस और मंगल कष्टों से राहत हेतु रखा जाता है।

मंगलवार व्रत में कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?+

चना और गुड़, बूंदी लड्डू और फल पारंपरिक भोग हैं। चना और गुड़ धीमी ऊर्जा और लोह तत्व देते हैं, जो मंगलवार व्रत के लिए आदर्श प्रसाद बनाते हैं।

क्या मंगलवार व्रत मंगल दोष में सहायक है?+

हाँ। हनुमान की उपासना और हनुमान चालीसा के साथ मंगलवार व्रत रखना प्रबल मंगल को शांत करता और मंगल दोष या मांगलिक कुंडली की कठिनाइयाँ घटाता माना जाता है।

हनुमान के लिए मंगलवार को क्या टालना चाहिए?+

मांस, मद्य, प्याज और लहसुन से बचें, क्योंकि हनुमान जी पवित्रता और ब्रह्मचर्य को महत्व देते हैं। अनेक लोग इस दिन नमक से भी परहेज करते हैं और व्रत का पारण भारी, नमकीन या तले भोजन से नहीं करते।

मंगलवार व्रत में कौन सा मंत्र या पाठ सर्वोत्तम है?+

हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ और 'ॐ हनुमते नमः' का जप आदर्श है। हनुमान चालीसा विशेषकर रक्षा, साहस और भय निवारण हेतु प्रिय है।

क्या स्त्रियाँ मंगलवार व्रत रख सकती हैं?+

हाँ। स्त्रियाँ पूर्ण भक्ति से मंगलवार व्रत रखती हैं। परंपरा अनुसार वे मासिक धर्म के समय मूर्ति स्पर्श या हाथ से सिंदूर अर्पण से बचती हैं, पर हनुमान चालीसा का पाठ सभी के लिए खुला है।

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About the author

Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.

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