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आदि पराशक्ति: आदिम दिव्य स्त्री शक्ति की अवधारणा
Devi Worship

आदि पराशक्ति: आदिम दिव्य स्त्री शक्ति की अवधारणा

6 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जुलाई 17, 2026
AM

By Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

आदि पराशक्ति क्या है

आदि पराशक्ति, जिन्हें प्रायः केवल आदि शक्ति भी कहा जाता है, देवी उपासना में उस सर्वोच्च आदिम शक्ति को कहते हैं जो संपूर्ण सृष्टि से पहले और उससे परे विद्यमान मानी जाती है, वह स्रोत जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड और उसमें स्थित प्रत्येक देवता उत्पन्न माने जाते हैं।

जहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव को सृष्टि, पालन और संहार के लिए त्रिदेव रूप में पूजा जाता है, वहीं शाक्त परंपरा मानती है कि आदि पराशक्ति की ऊर्जा ही उन्हें भी यह भूमिकाएँ निभाने की शक्ति देती है, वे समस्त दिव्यता की उत्पत्ति स्थान मानी जाती हैं, निराकार होते हुए भी हर आकार का स्रोत।

अवधारणा का शास्त्रीय आधार

इस विचार की सशक्त अभिव्यक्ति देवी महात्म्य, देवी भागवत पुराण और ललिता सहस्रनाम जैसे ग्रंथों में मिलती है, जहाँ देवी को ब्रह्मा, विष्णु और शिव की उत्पत्ति का स्रोत बताया गया है, न कि उनकी रचना। देवी उपनिषद भी उन्हें साक्षात ब्रह्म, परम सत्य के रूप में घोषित करता है।

देवी महात्म्य के उत्तम चरित्र में देवी स्वयं घोषणा करती हैं कि उनके सभी स्वरूप, काली, मातृकाएँ और अन्य, कभी उनसे भिन्न नहीं थे, वे एक ही आदि पराशक्ति हैं जो विभिन्न प्रयोजनों के लिए अनेक रूप धारण करती हैं।

आदि पराशक्ति को उनके रूपों से कैसे समझा जाता है

  • महाकाली रूप में वे काल और परिवर्तन की शक्ति हैं, जो विसर्जन करती हैं।
  • महालक्ष्मी रूप में वे समृद्धि, सौंदर्य और पोषण की शक्ति हैं।
  • महासरस्वती रूप में वे ज्ञान, कला और विद्या की शक्ति हैं।
  • दुर्गा, काली, पार्वती, ललिता और अनगिनत अन्य नामों में वे भक्त के हृदय की पुकार के अनुरूप रूप धारण करती हैं।

भक्त मानते हैं कि ये पृथक-पृथक देवियाँ आदर के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं, बल्कि एक ही आदि पराशक्ति हैं जो आवश्यकता के अनुसार सर्वाधिक उपयुक्त रूप में स्वयं को व्यक्त करती हैं।

उपासना में भक्त इस विचार को कैसे अपनाते हैं

उपासना में भक्त इस विचार को कैसे अपनाते हैं

आदि पराशक्ति को समझने के लिए देवी के अपने प्रिय रूप को त्यागने की आवश्यकता नहीं है। बल्कि यह भक्ति को और गहरा करता है, वैष्णो देवी, कोलकाता की काली या मदुरई की मीनाक्षी की उपासना करने वाला भक्त, इस समझ में, उसी एक माँ की उपासना कर रहा है जो क्षेत्रीय और व्यक्तिगत नाम धारण करती हैं।

अनेक भक्त अपनी प्रार्थना या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, उस देवी को नमन जो समस्त प्राणियों में शक्ति रूप में विराजमान हैं, इस श्लोक से आरंभ करते हैं, जो देवी महात्म्य से लिया गया है और इस सर्वव्यापी समझ को सुंदरता से समेटता है।

सार

आदि पराशक्ति भक्तों को यह स्मरण कराती हैं कि देवी के हर नाम और रूप के पीछे एक ही असीम शक्ति है, सदैव उपस्थित, सदैव सृजन करती, सदैव रक्षा करती। इसे पहचानना किसी भी विशेष उपासना पद्धति को कम नहीं करता, बल्कि उसे समृद्ध करता है, हर वेदी के पीछे उसी एक माँ के प्रति श्रद्धा है, कभी सौदा नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदि पराशक्ति का अर्थ क्या है?+

आदि पराशक्ति का अर्थ है आदिम सर्वोच्च शक्ति, जो देवी उपासना में उस निराकार स्रोत को दर्शाती है जिससे संपूर्ण सृष्टि और समस्त दिव्य स्वरूप उत्पन्न माने जाते हैं।

क्या आदि पराशक्ति दुर्गा या काली से भिन्न हैं?+

नहीं, परंपरा मानती है कि दुर्गा, काली और अन्य देवी-स्वरूप सभी एक ही आदि पराशक्ति की अभिव्यक्तियाँ हैं, जो विभिन्न प्रयोजनों के लिए भिन्न-भिन्न रूप धारण करती हैं।

आदि पराशक्ति की अवधारणा शास्त्रों में कहाँ मिलती है?+

यह देवी महात्म्य, देवी भागवत पुराण, ललिता सहस्रनाम और देवी उपनिषद में प्रमुखता से मिलती है, जो सभी देवी को त्रिदेव और संपूर्ण सृष्टि के स्रोत के रूप में वर्णित करते हैं।

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About the author

Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.

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