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देवी महात्म्य: तीन चरित्र जो इस ग्रंथ की संरचना बनाते हैं
Devi Worship

देवी महात्म्य: तीन चरित्र जो इस ग्रंथ की संरचना बनाते हैं

7 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जुलाई 15, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

देवी महात्म्य क्या है

देवी महात्म्य, जिसे दुर्गा सप्तशती या चंडी पाठ भी कहा जाता है, देवी उपासना के सबसे पूजनीय ग्रंथों में से एक है और यह मार्कण्डेय पुराण का भाग है। इसमें सात सौ श्लोक हैं, इसीलिए इसे सप्तशती कहा जाता है, जो देवी के अनेक रूपों और लीलाओं का गुणगान करते हैं।

भक्त नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से देवी महात्म्य का पाठ करते हैं, यह मानते हुए कि इसके श्लोक माँ की उपस्थिति और कृपा को आमंत्रित करते हैं। यह ग्रंथ एक सतत कथा नहीं बल्कि परंपरागत रूप से तीन जुड़े हुए चरित्रों में कहा गया माना जाता है, जिनमें से हर एक की अपनी देवी-स्वरूप, असुर और शिक्षा है।

तीन चरित्र, संक्षेप में

  • प्रथम चरित्र में देवी महामाया के रूप में विष्णु को जगाकर मधु-कैटभ नामक असुरों के वध में सहायक बनने की कथा है, यह तीनों में सबसे छोटा है।
  • मध्यम चरित्र में प्रसिद्ध महिषासुर वध की कथा है, जहाँ सभी देवताओं के तेज से देवी दुर्गा का प्राकट्य होता है।
  • उत्तम चरित्र में देवी कौशिकी, काली और अंबिका के रूप में शुंभ-निशुंभ नामक असुर भाइयों के वध की कथा है, और इसी में नवदुर्गा तथा सप्तमातृकाओं का उल्लेख भी आता है।

परंपरा में प्रत्येक चरित्र का पाठ अपने प्रारंभिक और समापन श्लोकों सहित किया जाता है, फिर भी तीनों मिलकर शक्ति की एक संपूर्ण महिमा-गाथा बनाते हैं।

देवी के तीन भिन्न रूप क्यों

परंपरा के अनुसार प्रत्येक चरित्र की अधिष्ठात्री देवी अलग है, जिनका ध्यान अलग-अलग श्लोकों से किया जाता है: प्रथम चरित्र में महाकाली, मध्यम में महालक्ष्मी, और उत्तम चरित्र में महासरस्वती। यह त्रिविध उपस्थिति इस विश्वास को दर्शाती है कि शक्ति में बल, समृद्धि और ज्ञान तीनों एक साथ समाहित हैं।

भक्त प्रायः इस संरचना को नवरात्रि की उन तीन-तीन रातों से जोड़ते हैं जो इन्हीं तीन स्वरूपों को समर्पित होती हैं, और नौ रातों के उत्सव को उन्हीं तीन ऊर्जाओं की यात्रा के रूप में देखते हैं जिनका वर्णन देवी महात्म्य में मिलता है।

पाठ कैसे किया जाता है

पाठ कैसे किया जाता है

अनेक घरों और मंदिरों में देवी महात्म्य का पाठ नवरात्रि की नौ रातों में विभाजित करके किया जाता है, कभी सातों सौ श्लोक कई बैठकों में पूरे होते हैं, तो कभी एक ही दिन में सप्तशती पाठ के रूप में। कुछ भक्त नवावरण पाठ भी करते हैं, जिसमें ग्रंथ के साथ देवी मंत्र जप भी जोड़ा जाता है।

पाठ आरंभ करने से पहले भक्त सामान्यतः कवच, अर्गला और कीलक नामक सहायक स्तोत्रों का पाठ करते हैं, जिनके विषय में माना जाता है कि ये मन को तैयार करते हैं और पाठ के फल में आने वाली बाधाओं को दूर करते हैं।

सार

तीन चरित्रों को समझने से भक्त देवी महात्म्य को केवल एक युद्ध-कथा नहीं, बल्कि देवी के बहुस्तरीय स्वरूप, जागृति देने वाली, अहंकार का नाश करने वाली, और ज्ञान देने वाली शक्ति के रूप में देख पाता है। इस संरचना को समझकर पाठ करना पहले से प्रिय इस भक्ति-अभ्यास को और गहरा बना देता है, यह उपासना श्रद्धा का कर्म है, कोई सौदा नहीं।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

देवी महात्म्य के तीन चरित्र कौन-से हैं?+

ये हैं प्रथम चरित्र (मधु-कैटभ), मध्यम चरित्र (महिषासुर वध) और उत्तम चरित्र (शुंभ-निशुंभ वध), जिनमें देवी का अलग-अलग रूप और कार्य दर्शाया गया है।

देवी महात्म्य को दुर्गा सप्तशती क्यों कहा जाता है?+

सप्तशती का अर्थ है सात सौ, जो इस ग्रंथ के सात सौ श्लोकों की ओर संकेत करता है। इसे परंपरागत रूप से, विशेष रूप से नवरात्रि में, देवी की महिमा के रूप में पाठ किया जाता है।

क्या तीनों चरित्रों का पाठ एक साथ करना आवश्यक है?+

परंपरा में संपूर्ण ग्रंथ का पाठ श्रेष्ठ माना जाता है, परंतु अनेक भक्त इसे नवरात्रि की नौ रातों में विभाजित करके या अपनी सुविधा और श्रद्धा अनुसार प्रतिदिन कुछ अध्याय पढ़कर भी करते हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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