कथा की पृष्ठभूमि
देवी महात्म्य की कथा राजा सुरथ और समाधि नामक वैश्य के साथ आरंभ होती है, जो दोनों दुःखी और विरक्त होकर वन में एक ऋषि से मार्गदर्शन माँगते हैं। उन्हें सांत्वना और दिशा देने के लिए ऋषि देवी की महिमा तीन चरित्रों में सुनाते हैं, जिसकी शुरुआत प्रथम चरित्र से होती है।
यह पहला प्रसंग भक्तों को उस समय में ले जाता है जब सृष्टि प्रलय में लीन थी, और भगवान विष्णु प्रलय के जल पर शेषनाग की शय्या पर योगनिद्रा में लीन थे।
मधु-कैटभ की कथा
विष्णु के कर्णमल से, अथवा कुछ कथाओं के अनुसार प्रलय के जल से, मधु और कैटभ नामक दो बलशाली असुर उत्पन्न हुए। उन्होंने विष्णु की नाभि से निकले कमल पर विराजमान ब्रह्मा को देखा और उन्हें निगलने की धमकी दी, साथ ही सृष्टि पर अधिकार जमाने का विचार भी किया।
ब्रह्मा स्वयं विष्णु को जगा न सके, तो उन्होंने उस देवी की स्तुति की जो विष्णु के भीतर योगनिद्रा रूप में विराजमान थीं, वही निद्रा जिसने विष्णु को अचेत रखा था। उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर देवी विष्णु के शरीर से अलग हो गईं, जिससे विष्णु जाग उठे। तत्पश्चात विष्णु का दोनों असुरों से दीर्घ युद्ध हुआ, और माना जाता है कि देवी की उपस्थिति और कृपा से ही विष्णु को मधु-कैटभ पर विजय पाने की शक्ति मिली।
इस चरित्र का महत्व
तीनों चरित्रों में सबसे छोटा यह प्रसंग एक गहरी शिक्षा देता है, कि पालनकर्ता विष्णु को भी जागृत होकर कार्य करने के लिए देवी की कृपा आवश्यक थी। भक्त इसमें यह स्मरण पाते हैं कि शक्ति ही समस्त दिव्य कार्यों के पीछे की प्रेरक ऊर्जा है, जिसके बिना देवता भी स्थिर रह जाते हैं।
इस चरित्र की अधिष्ठात्री देवी परंपरागत रूप से महाकाली मानी जाती हैं, जो सृष्टि और चेतना से भी पूर्व की आदिम, निराकार शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
भक्त इसे कैसे आत्मसात करते हैं

नवरात्रि में प्रथम चरित्र का पाठ प्रायः पहली रात को किया जाता है, जो आगे के दिनों के लिए भाव तैयार करता है। इस भाग का पाठ करते समय भक्त सामान्यतः ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का उच्चारण देवी के महाकाली स्वरूप को समर्पित करते हैं।
कुछ भक्त मधु और कैटभ को गहरी मनोवृत्तियों के प्रतीक रूप में देखते हैं, मधु यानी आसक्ति बनती मिठास, और कैटभ यानी अहंकार बनती कठोरता, जिन दोनों पर विजय के लिए दिव्य कृपा आवश्यक है।
सार
प्रथम चरित्र यह सिखाता है कि जागृति, चाहे वह दिव्य ही क्यों न हो, देवी की कृपा से आरंभ होती है। भक्त के लिए यह एक कोमल स्मरण है कि किसी भी प्रयास से पहले उसी कृपा को खोजें, यह विश्वास रखते हुए कि शक्ति चुपचाप हर सच्चे प्रयास को बल देती है, यह श्रद्धा और प्रेम की उपासना है, कोई सौदा नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मधु और कैटभ कौन हैं?+
मधु और कैटभ देवी महात्म्य के पहले प्रसंग के दो असुर हैं जो ब्रह्मा को धमकाते हैं। देवी की कृपा से जागृत हुए विष्णु दीर्घ युद्ध के बाद उन्हें पराजित करते हैं।
इस कथा में योगनिद्रा क्या है?+
योगनिद्रा देवी का वह स्वरूप है जो प्रलय काल में विष्णु के भीतर कॉस्मिक निद्रा के रूप में विराजमान रहता है। ब्रह्मा की स्तुति पर वे विष्णु से अलग हो जाती हैं, जिससे विष्णु जागकर कार्य कर पाते हैं।
प्रथम चरित्र की अधिष्ठात्री देवी कौन-सी हैं?+
परंपरा में महाकाली को प्रथम चरित्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है, जो सृष्टि से भी पूर्व की आदिम निराकार शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
About the author
Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies
Anjali is the managing editor for Vandnaa and oversees the festival and vrat coverage. She holds an M.A. in Religious Studies and reviews every published article for accuracy, accessibility, and tradition-fidelity.
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