हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध पंक्ति
हनुमान चालीसा की सबसे प्रिय पंक्तियों में से एक है 'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता' - अर्थात माता जानकी (सीता) ने हनुमान को आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ प्रदान करने का वरदान दिया।
दूसरे शब्दों में, हनुमान प्रभु को इतने प्रिय हैं कि वे अपने भक्तों को ये योग सिद्धियाँ और दिव्य निधियाँ दे सकते हैं। पर सच्ची शिक्षा सूक्ष्म है: एक सच्चा भक्त इन शक्तियों के पीछे नहीं भागता - ये उसके पास बिना माँगे आती हैं जिसका हृदय ईश्वर पर टिका है, और सबसे बड़ी निधि स्वयं भक्ति है।
अष्ट सिद्धि - आठ शक्तियाँ
आठ शास्त्रीय सिद्धियाँ (योग शक्तियाँ) ये हैं:
- अणिमा (Anima): परमाणु जितना छोटा हो जाने की शक्ति।
- महिमा (Mahima): अनंत रूप से विशाल हो जाने की शक्ति।
- गरिमा (Garima): अत्यधिक भारी हो जाने की शक्ति।
- लघिमा (Laghima): भारहीन और हल्का हो जाने की शक्ति।
- प्राप्ति (Prapti): कहीं भी कुछ भी पाने या पहुँचने की शक्ति।
- प्राकाम्य (Prakamya): किसी भी इच्छा या कामना को पूर्ण करने की शक्ति।
- ईशित्व (Ishitva): सृष्टि पर प्रभुत्व और स्वामित्व।
- वशित्व (Vashitva): सबको अपने प्रभाव में या वश में करने की शक्ति।
रामायण में हनुमान इनमें से कई दिखाते हैं - लंका में प्रवेश हेतु छोटा होना, सागर पार करने हेतु विशाल होना - फिर भी वे इन्हें केवल प्रभु की सेवा में प्रयोग करते हैं, स्वयं के लिए कभी नहीं।
नव निधि - नौ निधियाँ
नव निधि नौ दिव्य निधियाँ हैं, परंपरागत रूप से धन के स्वामी कुबेर की निधियाँ:
- पद्म (Padma)
- महापद्म (Mahapadma)
- नील (Neela)
- मुकुंद (Mukunda)
- नंद (Nanda)
- मकर (Makara)
- कच्छप (Kachchhapa)
- शंख (Shankha)
- खर्व (Kharva)
ये नौ निधियाँ हर प्रकार की प्रचुरता और समृद्धि का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह कहना कि हनुमान नौ निधियाँ दे सकते हैं, यह कहना है कि उनकी कृपा से किसी सच्चे भक्त को कभी उसकी वास्तविक आवश्यकता की कमी नहीं होती - यद्यपि विवेकी सांसारिक धन से ऊपर भक्ति के धन को चाहते हैं।
गहरी भक्ति शिक्षा

हनुमान चालीसा इन शक्तियों और निधियों का उल्लेख क्यों करती है? हमें इन्हें खोजने के लिए लुभाने हेतु नहीं, बल्कि यह दिखाने हेतु कि हनुमान कितने परम धन्य हैं - सीता-राम को इतने प्रिय कि उच्चतम सिद्धियाँ और निधियाँ भी देना उनके वश में है।
सच्चा भक्त इसे पलट देता है। हनुमान स्वयं हर शक्ति के स्वामी थे, फिर भी केवल राम की सेवा करना और उनका नाम हृदय में रखना चाहते थे। एक भक्त के लिए वास्तविक अष्ट सिद्धि और नव निधि अखंड भक्ति, विनम्रता और प्रभु की कृपा है। जब हम यह पंक्ति गाते हैं, हम जादुई शक्तियाँ नहीं माँगते; हम हनुमान की स्तुति करते हैं और उनका सबसे बड़ा उपहार माँगते हैं - एक हृदय जो उनके समान ईश्वर से प्रेम करे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्ट सिद्धि नव निधि का अर्थ क्या है?+
अष्ट सिद्धि का अर्थ है आठ योग शक्तियाँ (जैसे अणिमा और महिमा) और नव निधि का अर्थ है समृद्धि की नौ दिव्य निधियाँ। हनुमान चालीसा कहती है कि माता सीता से वरदान पाए हनुमान ये अपने भक्तों को दे सकते हैं।
आठ सिद्धियाँ कौन सी हैं?+
आठ सिद्धियाँ हैं अणिमा (छोटा होना), महिमा (विशाल होना), गरिमा (भारी होना), लघिमा (हल्का होना), प्राप्ति (कुछ भी पाना), प्राकाम्य (इच्छाएँ पूर्ण करना), ईशित्व (सृष्टि पर प्रभुत्व) और वशित्व (सबको वश में करना)।
हनुमान चालीसा की कौन सी पंक्ति इनका उल्लेख करती है?+
पंक्ति है 'अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता', अर्थात माता जानकी (सीता) ने हनुमान को भक्तों को आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने का वरदान दिया।
क्या भक्तों को ये शक्तियाँ चाहनी चाहिए?+
परंपरा सिखाती है कि सच्चा भक्त सिद्धियों या सांसारिक निधियों के पीछे नहीं भागता। हनुमान स्वयं इन सबके स्वामी थे फिर भी केवल राम की सेवा चाहते थे। एक भक्त के लिए सबसे बड़ी निधि अखंड भक्ति और प्रभु की कृपा है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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