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बैसाखी 2027 - महत्व, उत्सव और पूजा
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बैसाखी 2027 - महत्व, उत्सव और पूजा

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

बैसाखी क्या है

बैसाखी (वैशाखी भी कहलाती है) उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा के सबसे आनंदमय पर्वों में से एक है। यह रबी फसल के पकने व कटाई का उत्सव है, जब किसान भरपूर मौसम के लिए ईश्वर को धन्यवाद देते हैं। यह सौर नववर्ष भी है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश का प्रतीक है। सिख समुदाय के लिए बैसाखी का गहरा अर्थ है, क्योंकि इसी दिन 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की।

बैसाखी 2027 की तिथि

अधिकांश हिंदू पर्वों के विपरीत जो चंद्र कैलेंडर का पालन करते हैं, बैसाखी एक सौर पर्व है जो सूर्य के मेष राशि में संक्रमण से जुड़ा है, जिसे मेष संक्रांति कहते हैं। इसी कारण यह हर वर्ष लगभग निश्चित तिथि पर आता है, प्रायः 13 या 14 अप्रैल को। 2027 में यह अप्रैल के मध्य के आसपास अपेक्षित है। चूँकि सौर संक्रमण अनुसार सही दिन एक तिथि बदल सकता है, बैसाखी 2027 की सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।

बैसाखी का महत्व

बैसाखी अनेक अर्थ समेटे है। किसानों के लिए यह कृतज्ञता व समृद्धि का पर्व है, जो जीवन को पोषित करने वाली फसल के लिए प्रकृति व ईश्वर का आभार है। सौर नववर्ष के रूप में यह नए आरंभ, आशा व नए संकल्प का प्रतीक है। सिखों के लिए यह गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा के गठन का स्मरण है, साहस, समानता व धर्म को समर्पित दीक्षित सिखों का समुदाय। सभी समुदायों में यह दिन समृद्धि, एकता व भक्ति का प्रतीक है।

बैसाखी कैसे मनाई जाती है

बैसाखी कैसे मनाई जाती है

बैसाखी बड़े उत्साह व रंग से मनाई जाती है: 1. किसान फसल के लिए मंदिरों व गुरुद्वारों में आभार अर्पित करते हैं। 2. लोग ढोल की थाप पर जीवंत भांगड़ा व गिद्दा लोकनृत्य करते हैं। 3. भोजन, संगीत, मिठाई व पारंपरिक खेलों के साथ मेले लगते हैं। 4. गुरुद्वारों में गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ, कीर्तनलंगर (सामूहिक भोज) होता है। 5. घरों की सफाई होती है, नए वस्त्र पहने जाते हैं और विशेष व्यंजन बनते हैं। 6. अनेक लोग सूर्योदय पर नदियों में पवित्र स्नान कर शुद्धि का कर्म करते हैं।

बैसाखी पर पूजा और उपासना

बैसाखी पर भक्त सूर्य देव और फसल के लिए ईश्वर को कृतज्ञता अर्पित करते हैं: 1. प्रातः उठकर स्नान करें (आदर्श रूप से नदी में पवित्र स्नान) और स्वच्छ, चमकीले वस्त्र पहनें। 2. पूर्व की ओर मुख कर उगते सूर्य को अर्घ्य (जल) अर्पित करें। 3. घर की वेदी साफ कर सजाएँ और दीप व धूप जलाएँ। 4. फसल के आभार स्वरूप नए अन्न, फल, गुड़ व मिठाई अर्पित करें। 5. सूर्य मंत्र ॐ सूर्याय नमः का जप करें और भक्ति गीत पढ़ें या गाएँ। 6. मंदिर या गुरुद्वारे जाएँ, लंगर में भाग लें और जरूरतमंदों को भोजन या अन्न दान करें।

बैसाखी की भावना

अपने मूल में बैसाखी कृतज्ञता, साझेदारी व नए आरंभ का पर्व है। यह हमें जो जीवन देता है उसके लिए ईश्वर व प्रकृति का आभार मानने, लंगर व दान से अपनी समृद्धि बाँटने, और आशा व साहस के साथ नए सिरे से आरंभ करने की याद दिलाती है। फसल आभार, नववर्ष या खालसा का जन्म - जैसे भी मनाई जाए, यह दिन लोगों को आनंद, भक्ति व सेवा-भाव में एकजुट करता है।

पाठकों के प्रश्न

बैसाखी 2027 कब है?+

बैसाखी मेष संक्रांति से जुड़ा सौर पर्व है और प्रायः 13 या 14 अप्रैल को आता है। 2027 में यह अप्रैल के मध्य के आसपास अपेक्षित है। सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।

बैसाखी हर वर्ष लगभग एक ही तिथि पर क्यों आती है?+

बैसाखी सूर्य के मेष राशि में प्रवेश (मेष संक्रांति) पर आधारित सौर पर्व है, चंद्र कैलेंडर पर नहीं। इसीलिए यह हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल के आसपास रहता है।

सिखों के लिए बैसाखी का क्या महत्व है?+

बैसाखी 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है, साहस, समानता व धर्म को समर्पित दीक्षित सिखों का समुदाय।

क्या बैसाखी एक फसल पर्व है?+

हाँ। बैसाखी उत्तर भारत में रबी फसल के पकने व कटाई का उत्सव है, जब किसान अनाज के भरपूर मौसम के लिए ईश्वर व प्रकृति का आभार मानते हैं।

बैसाखी कैसे मनाई जाती है?+

लोग भांगड़ा व गिद्दा करते हैं, मेलों में जाते हैं, मंदिर व गुरुद्वारे जाते हैं, कीर्तन व लंगर में भाग लेते हैं, नए वस्त्र पहनते हैं और आनंद व कृतज्ञता के भाव से उत्सव व्यंजन बनाते हैं।

बैसाखी पर कौन सी पूजा की जाती है?+

भक्त उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं, 'ॐ सूर्याय नमः' जपते हैं, आभार स्वरूप नए अन्न, फल व मिठाई अर्पित करते हैं, और उपासना व लंगर में भाग लेने मंदिर या गुरुद्वारे जाते हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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