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राधा अष्टमी 2026 - व्रत, पूजा विधि और महत्व
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राधा अष्टमी 2026 - व्रत, पूजा विधि और महत्व

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

राधा अष्टमी क्या है

राधा अष्टमी भगवान कृष्ण की नित्य प्रिया और परम भक्त राधा रानी के दिव्य प्राकट्य का उत्सव है। वृंदावन के निकट बरसाना में जन्मीं राधा शुद्ध, निःस्वार्थ प्रेम (प्रेमा) की मूर्ति हैं और भक्ति की आत्मा के रूप में पूजी जाती हैं। यह पर्व कृष्ण जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद आता है, जो दिव्य युगल राधा-कृष्ण की उपासना को पूर्ण करता है। भक्तों के लिए राधा को प्रसन्न करना कृष्ण की कृपा पाने का सबसे निश्चित मार्ग है।

राधा अष्टमी 2026 की तिथि और दिनांक

राधा अष्टमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी (आठवें दिन) को मनाई जाती है, वही शुक्ल पक्ष जिसके कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कृष्ण जन्माष्टमी आती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह प्रायः अगस्त के अंत या सितंबर में पड़ती है। चूँकि तिथि हर वर्ष बदलती है और पूजा का सही समय आपके स्थान पर निर्भर करता है, राधा अष्टमी 2026 की सटीक तिथि व शुभ मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें।

राधा रानी का महत्व

राधा को ह्लादिनी शक्ति माना जाता है - कृष्ण की आनंद देने वाली शक्ति, जो पुष्प से सुगंध की भाँति उनसे अभिन्न हैं। उनका प्रेम पूर्ण समर्पण का आदर्श है, जहाँ भक्त केवल प्रभु के सुख का विचार करता है, कभी अपने का नहीं। यही कारण है कि राधे-राधे का पावन नाम पूरे ब्रज में अभिवादन और प्रार्थना के रूप में उच्चारित होता है। राधा की उपासना हृदय को कोमल करती, भक्ति जगाती और कृष्ण का स्नेह सहज ही खींच लाती है।

राधा अष्टमी पूजा विधि

राधा अष्टमी पूजा विधि

पूजा मध्याह्न के समय करें, जो राधा के जन्म का माना गया समय है: 1. प्रातः उठकर स्नान करें और स्वच्छ, अधिमानतः पीले या गुलाबी वस्त्र पहनें। 2. राधा-कृष्ण की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से और फिर स्वच्छ जल से स्नान कराएँ। 3. विग्रहों को वस्त्र पहनाएँ, चंदन लगाएँ और ताजे पुष्प, तुलसी दल व आभूषण अर्पित करें। 4. घी का दीपक व धूप जलाएँ, और मिठाई, फल, माखन-मिश्री व खीर का भोग लगाएँ। 5. राधा चालीसा का पाठ करें और राधा रानी की आरती गाएँ। 6. राधे-राधे और राधा मंत्र का जप करें, फिर प्रसाद वितरित करें। अनेक भक्त व्रत रखते हैं और मध्याह्न पूजा के बाद इसे खोलते हैं।

व्रत के नियम

राधा अष्टमी व्रत अपनी क्षमता अनुसार निर्जला (बिना जल) व्रत या फल, दूध व जल सहित फलाहारी व्रत के रूप में रखा जा सकता है। भक्त इस दिन अन्न, साधारण नमक, प्याज व लहसुन से बचते हैं। व्रत परंपरागत रूप से मध्याह्न पूजा के बाद खोला जाता है, क्योंकि यही राधा के प्राकट्य का समय है। मन को भक्ति में लीन रखें, पावन नाम का जप करें और पूरे दिन क्रोध व कटु वचन से बचें।

मंत्र और लाभ

इन सरल व शक्तिशाली नामों व मंत्र का जप करें:

राधे-राधे / जय श्री राधे

ॐ ह्रीं राधिकायै नमः

ॐ राधा कृष्णाय नमः

राधा अष्टमी को भक्ति से मनाने से भक्तों को दांपत्य सुख, गहरा प्रेम व कृष्ण के प्रति समर्पण, मन की शांति और संबंधों की बाधाओं का निवारण मिलता माना जाता है। सबसे बढ़कर, यह प्रेमा-भक्ति - दिव्य के प्रति निःस्वार्थ प्रेम - को विकसित करती है, जिसे परंपरा सबसे बड़ा उपहार मानती है।

भक्तों के सामान्य प्रश्न

राधा अष्टमी 2026 कब है?+

राधा अष्टमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है, प्रायः अगस्त के अंत या सितंबर में, जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद। 2026 की सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।

राधा रानी कौन हैं?+

राधा रानी भगवान कृष्ण की नित्य प्रिया और परम भक्त हैं, जिनका जन्म बरसाना में हुआ। वे शुद्ध, निःस्वार्थ प्रेम की मूर्ति हैं और कृष्ण से अभिन्न आनंद-शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं।

राधा अष्टमी व्रत के नियम क्या हैं?+

व्रत निर्जला (बिना जल) या फल, दूध व जल सहित फलाहारी हो सकता है। अन्न, साधारण नमक, प्याज व लहसुन से बचा जाता है, और व्रत मध्याह्न पूजा के बाद खोला जाता है।

राधा अष्टमी मध्याह्न में क्यों मनाई जाती है?+

माना जाता है कि राधा रानी मध्याह्न में प्रकट हुईं, इसलिए मुख्य पूजा व अभिषेक दोपहर के समय किए जाते हैं, जिसके बाद भक्त व्रत खोलते और प्रसाद बाँटते हैं।

राधा अष्टमी पर कौन सा मंत्र जपें?+

राधा की कृपा और दिव्य युगल के प्रेम का आह्वान करने हेतु पावन नाम 'राधे-राधे' और 'ॐ ह्रीं राधिकायै नमः' या 'ॐ राधा कृष्णाय नमः' जैसे मंत्र जपें।

राधा अष्टमी मनाने के क्या लाभ हैं?+

यह भक्तों को दांपत्य सुख, गहरा प्रेम व कृष्ण के प्रति समर्पण, मन की शांति, संबंधों की बाधाओं का निवारण और सबसे बढ़कर प्रेमा-भक्ति नामक निःस्वार्थ भक्ति देती मानी जाती है।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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