← सभी ब्लॉगRead in English8 मिनट पढ़ें
राधा रानी आरती, मंत्र और महत्व - पूर्ण पूजा विधि
Aarti

राधा रानी आरती, मंत्र और महत्व - पूर्ण पूजा विधि

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित मई 31, 2026
VK

By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

राधा रानी कौन हैं

राधा रानी, प्रेम से राधे, किशोरी जी और वृषभानु नंदिनी कही जाने वाली, भगवान कृष्ण की शाश्वत अर्धांगिनी और प्रिया हैं। उन्हें ह्लादिनी शक्ति - ईश्वर की आनंद-दायिनी ऊर्जा - के रूप में पूजा जाता है, और वे आत्मा के शुद्ध, विरह-भरे ईश्वर-प्रेम का प्रतीक हैं। ब्रज परंपरा में राधा को कृष्ण से भी ऊँचा माना जाता है, क्योंकि उन्हीं की भक्ति से कृष्ण तक पहुँचा जाता है; इसीलिए भक्त एक-दूसरे का अभिवादन राधे राधे से करते हैं।

राधा उपासना का महत्व

राधा प्रेम भक्ति की प्रतीक हैं - ऐसा पूर्ण प्रेम जो बदले में कुछ नहीं माँगता। राधा-कृष्ण की साथ उपासना भक्तों को दाम्पत्य सौहार्द, गहन भावनात्मक तृप्ति और भक्ति से कोमल हुए हृदय का आशीर्वाद देती मानी जाती है। प्रेम, सुलह या ईश्वर से मधुर संबंध चाहने वालों के लिए राधा की कृपा सबसे कोमल और शक्तिशाली मार्ग मानी जाती है। उनका नाम स्वयं कृष्ण के नाम से भी मधुर कहा जाता है।

राधा रानी आरती

राधा-कृष्ण के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ और भीगे हृदय से गाएँ:

आरती श्री वृषभानु सुता की, राधे राधे। हुसियार घेर की घेर में, सुंदर छबि प्यारी की। श्यामा प्यारी जोड़ी सोहे, मनमोहन गिरिधारी की। चरणन शरण जो आया, भव-बाधा टारी की।

दीपक को दक्षिणावर्त घुमाएँ, घंटी धीरे बजाएँ, और राधे राधे से समापन करते हुए ज्योति व अपना प्रेम उनके चरणों में अर्पित करें।

राधा मंत्र और युगल मंत्र

राधा मंत्र और युगल मंत्र

सरल राधा मंत्र:

ॐ ह्रीं राधिकायै नमः

राधा और कृष्ण की साथ उपासना का मधुर युगल मंत्र:

ॐ राधा-कृष्णाय नमः

शुद्ध भक्ति के लिए केवल महाभाव नाम का जप करें:

राधे राधे अथवा राधे श्याम

तुलसी माला पर 108 बार जप करें। कृष्ण से पहले राधा का नाम लेना (राधे-कृष्ण) ब्रज परंपरा का पारंपरिक और सबसे प्रिय तरीका है।

राधा अष्टमी - उनका पवित्र प्रकट दिवस

राधा अष्टमी राधा रानी के प्रकट होने का दिन है और भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है, कृष्ण जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद। इस दिन बरसाना और पूरे ब्रज में भक्त व्रत रखते हैं, विग्रह का अभिषेक करते हैं, नए वस्त्र, पुष्प और छप्पन भोग अर्पित करते हैं, और दिनभर उनकी महिमा गाते हैं। राधा अष्टमी व्रत रखना अनेक अन्य व्रतों के समान पुण्य देने वाला माना जाता है।

घर पर राधा पूजा विधि

1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें; राधा-कृष्ण को स्वच्छ वेदी पर साथ रखें। 2. घी का दीपक, धूप जलाएँ और ताज़े पुष्प अर्पित करें (राधा को कमल व चमेली प्रिय हैं)। 3. खीर, माखन-मिश्री या फल के भोग के साथ तुलसी दल अर्पित करें। 4. तुलसी माला पर ॐ ह्रीं राधिकायै नमः या राधे राधे का 108 बार जप करें। 5. पूर्ण भक्ति से राधा आरती गाएँ। 6. प्रेम, सौहार्द व शुद्ध भक्ति की प्रार्थना करें, फिर प्रसाद बाँटें। अष्टमी तिथि, राधा अष्टमी और भाद्रपद मास विशेष शुभ हैं।

पाठकों के प्रश्न

राधा रानी कौन हैं?+

राधा रानी भगवान कृष्ण की शाश्वत प्रिया और अर्धांगिनी हैं, जिन्हें ह्लादिनी शक्ति - ईश्वर की आनंद-दायिनी ऊर्जा - और शुद्ध, निःस्वार्थ भक्ति की मूर्ति के रूप में पूजा जाता है।

सबसे सरल राधा मंत्र क्या है?+

सबसे सरल और मधुर है तुलसी माला पर 'राधे राधे' या 'ॐ ह्रीं राधिकायै नमः' का 108 बार जप। ब्रज परंपरा में कृष्ण से पहले राधा का नाम लेना सबसे प्रिय है।

राधा अष्टमी कब मनाई जाती है?+

राधा अष्टमी भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को आती है, कृष्ण जन्माष्टमी के लगभग पंद्रह दिन बाद। यह राधा रानी का प्रकट दिवस है।

भक्त 'राधे राधे' क्यों कहते हैं?+

ब्रज परंपरा में राधा का प्रेम कृष्ण तक का मार्ग है, इसलिए उनका नाम परम मधुर व शुभ माना जाता है। एक-दूसरे का अभिवादन 'राधे राधे' से करना स्वयं एक भक्ति-कर्म है।

राधा रानी को कौन से भोग प्रिय हैं?+

कमल व चमेली जैसे ताज़े पुष्प, तुलसी दल, और खीर, माखन-मिश्री या फल का भोग अर्पित करें। राधा अष्टमी पर भक्त नए वस्त्र और छप्पन भोग अर्पित करते हैं।

क्या प्रेम और विवाह के लिए राधा की पूजा की जा सकती है?+

हाँ। राधा-कृष्ण की साथ उपासना भक्तों को प्रेम, दाम्पत्य सौहार्द और भावनात्मक तृप्ति का आशीर्वाद देती मानी जाती है, और प्रेममय, स्थायी संबंध चाहने वालों के लिए कोमल मार्ग है।

VK

About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

Meet the Vandnaa editorial team →

Listen all aartis, mantras & bhajans in one place.

Download Vandnaa App.

Download Now

Explore on Vandnaa

संबंधित लेख