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परशुराम जयंती 2027 - महत्व और पूजा विधि
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परशुराम जयंती 2027 - महत्व और पूजा विधि

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

भगवान परशुराम कौन हैं

भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं और महान अमर (चिरंजीवी) में से एक, जो युगों तक जीवित माने जाते हैं। ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र रूप में जन्मे, वे जन्म से ब्राह्मण किंतु स्वभाव से उग्र योद्धा थे, जो भगवान शिव द्वारा प्रदत्त दिव्य फरसा (परशु) धारण करते थे। वे तब प्रकट हुए जब अहंकारी राजाओं ने पृथ्वी पर अत्याचार किया, ताकि धर्म की पुनर्स्थापना कर सकें, और ऋषि व योद्धा का अनुपम संगम बने।

परशुराम जयंती 2027 की तिथि और दिनांक

परशुराम जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया (तीसरे दिन) को मनाई जाती है, जो अत्यंत शुभ अक्षय तृतीया का दिन है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह प्रायः अप्रैल या मई में पड़ती है। चूँकि परशुराम अक्षय तृतीया पर प्रकट हुए, इस दिन को उस सदा-शुभ तिथि का अतिरिक्त आशीर्वाद प्राप्त है। तिथि हर वर्ष बदलती है, इसलिए परशुराम जयंती 2027 की सटीक तिथि व शुभ मुहूर्त वंदना पंचांग पर देखें।

परशुराम जयंती का महत्व

परशुराम इस सिद्धांत का प्रतिनिधित्व करते हैं कि धर्म की रक्षा अवश्य होनी चाहिए, गंभीर रूप से धर्म के संकट में पड़ने पर बल से भी। वे अनुशासन, भक्ति, निर्भयता और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति की मूर्ति हैं। अक्षय तृतीया पर पड़ने के कारण उनकी जयंती नए आरंभ, दान व उपासना हेतु दोगुनी शुभ मानी जाती है, क्योंकि इस दिन किए कर्म अक्षय (कभी न घटने वाला) पुण्य देते माने जाते हैं। यह दिन भक्ति व आत्म-संयम से संतुलित साहस की प्रेरणा देता है।

परशुराम जयंती पूजा विधि

परशुराम जयंती पूजा विधि

उनकी जयंती पर भगवान परशुराम की भक्ति से उपासना करें: 1. प्रातः उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें; कुछ भक्त व्रत रखते हैं। 2. वेदी साफ करें और फरसा धारण किए भगवान परशुराम का चित्र स्थापित करें। 3. जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, तुलसी व फल अर्पित करें। 4. घी का दीपक व धूप जलाएँ, और सात्विक मिठाई व फलों का भोग लगाएँ। 5. परशुराम व विष्णु मंत्रों का जप करें और उनकी स्तुति के छंद पढ़ें। 6. आरती करें, परिक्रमा करें और चूँकि यह अक्षय तृतीया है, भोजन, अन्न या जल जैसा दान जरूरतमंदों को करें।

व्रत और पालन

अनेक भक्त परशुराम जयंती पर फलाहारी व्रत रखते हैं, फल, दूध व जल लेते हुए अन्न, प्याज व लहसुन से बचते हैं। ब्राह्मण और क्षत्रिय इस दिन को विशेष श्रद्धा से मानते हैं। चूँकि यह अक्षय तृतीया के साथ आता है, भक्त नए कार्य आरंभ करते, स्वर्ण या आवश्यक वस्तुएँ खरीदते और दान करते हैं, क्योंकि इस दिन किए कर्म स्थायी, कभी न घटने वाला लाभ देते माने जाते हैं। दिन उपासना, आत्म-अनुशासन व सत्कर्मों में बिताना चाहिए।

मंत्र और लाभ

भगवान परशुराम की कृपा का आह्वान करने हेतु इन मंत्रों का जप करें:

ॐ श्री परशुरामाय नमः

ॐ जमदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात्

भगवान परशुराम की उपासना साहस, अनुशासन, शत्रुओं व बाधाओं पर विजय, जीवन में धर्म की रक्षा, और धर्मपूर्वक चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती मानी जाती है। अक्षय तृतीया के आशीर्वाद के साथ, इस दिन की सच्ची उपासना व दान स्थायी समृद्धि व पुण्य लाते हैं।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

परशुराम जयंती 2027 कब है?+

परशुराम जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया, अक्षय तृतीया के दिन आती है, प्रायः अप्रैल या मई में। 2027 की सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।

परशुराम विष्णु के कौन से अवतार हैं?+

भगवान परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार और चिरंजीवियों (अमरों) में से एक हैं। वे ब्राह्मण ऋषि और उग्र योद्धा थे जो पृथ्वी पर धर्म की पुनर्स्थापना के लिए प्रकट हुए।

परशुराम जयंती अक्षय तृतीया से क्यों जुड़ी है?+

भगवान परशुराम अक्षय तृतीया, वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को प्रकट हुए। इसलिए उनकी जयंती को दान, उपासना व नए आरंभ हेतु इस सदा-शुभ दिन का अतिरिक्त आशीर्वाद प्राप्त है।

भगवान परशुराम किसका प्रतीक हैं?+

वे धर्म की रक्षा, अनुशासन, भक्ति और अन्याय के विरुद्ध निर्भय शक्ति के प्रतीक हैं। वे ब्राह्मण ऋषि और दिव्य फरसा धारण करने वाले योद्धा का अनुपम संगम हैं।

परशुराम जयंती पर कौन सा मंत्र जपा जाता है?+

भक्त उनकी कृपा का आह्वान करने हेतु 'ॐ श्री परशुरामाय नमः' और परशुराम गायत्री 'ॐ जमदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात्' जपते हैं।

परशुराम की उपासना के क्या लाभ हैं?+

यह साहस, अनुशासन, शत्रुओं व बाधाओं पर विजय, धर्म की रक्षा, और धर्मपूर्वक चुनौतियों का सामना करने की शक्ति देती मानी जाती है, अक्षय तृतीया द्वारा स्थायी पुण्य सहित।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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