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केले के वृक्ष की पूजा (गुरुवार) - विधि और लाभ
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केले के वृक्ष की पूजा (गुरुवार) - विधि और लाभ

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

केले के वृक्ष का महत्व

केले का वृक्ष बृहस्पति (गुरु / गुरु ग्रह) और भगवान विष्णु को प्रिय है। अनेक घरों में इसे गुरु के रूप में पूजा जाता है, जो बुद्धि, विवाह और समृद्धि का ग्रह है। इसका पीला फल, गहरी जड़ें और सदा देने वाला स्वभाव इसे प्रचुरता व स्थिर वृद्धि का प्रतीक बनाते हैं। विवाह से पूजा तक कोई शुभ अनुष्ठान केले के पत्ते व तने बिना अधूरा माना जाता है।

गुरुवार ही दिन क्यों है

गुरुवार बृहस्पति और विष्णु का दिन है, इसीलिए केले के वृक्ष की पूजा तब की जाती है। गुरुवार व्रत रखने वाले भक्त स्नान के बाद प्रातःकाल इसकी पूजा करते हैं, यथासंभव पीला वस्त्र पहनकर। गर्भवती स्त्रियाँ, विवाह की इच्छुक तथा संतान की प्रार्थना करने वाले परिवार विशेषकर गुरुवार को इसकी पूजा हेतु प्रोत्साहित किए जाते हैं। पूजा दोपहर से पहले, खाली पेट करना सर्वोत्तम है।

गुरुवार पूजा विधि

1. गुरुवार को प्रातः स्नान कर यथासंभव स्वच्छ पीले वस्त्र पहनें। 2. केले के तने पर हल्दी का तिलक लगाएँ और चुटकी भर हल्दी मिला जल अर्पित करें। 3. इसके मूल में पीले पुष्प, चना दाल, गुड़, पीली मिठाई और एक केला अर्पित करें। 4. घी या तेल का दीपक जलाएँ और धूप अर्पित करें। 5. तने पर पीला धागा बाँधें और दक्षिणावर्त परिक्रमा करें। 6. बृहस्पति मंत्र जपें, फिर अपनी इच्छित कामना की प्रार्थना करें। अनेक भक्त व्रत के दिन एक बार सात्विक पीला भोजन करते और स्वयं केला खाने से बचते हैं।

बृहस्पति मंत्र

बृहस्पति मंत्र

केले के वृक्ष की पूजा करते समय बुद्धि व समृद्धि के आह्वान हेतु बृहस्पति (गुरु) मंत्र जपें:

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः

एक सरल भक्ति-जप ॐ बृहस्पतये नमः है। जो भक्त वृक्ष को विष्णु रूप में पूजते हैं वे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय भी जप सकते हैं। चुने हुए मंत्र को पीली या तुलसी की माला पर 108 बार दोहराएँ।

केले के वृक्ष की पूजा के लाभ

गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा जीवन में कमजोर गुरु (बृहस्पति) को बल देती, विवाह में विलंब दूर करती और दंपतियों को संतान का आशीर्वाद देती मानी जाती है। यह बुद्धि, पारिवारिक सद्भाव, आर्थिक वृद्धि और गुरुजनों व बड़ों के आशीर्वाद से जुड़ी है। परिवार इसे अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य व उज्ज्वल भविष्य, तथा वैवाहिक जीवन में सामंजस्य हेतु भी पूजते हैं।

करें और न करें

करें: प्रातःकाल हल्दी व पीले अर्पण के साथ पूजा करें, वृक्ष को स्वस्थ व सिंचित रखें, और शांत, सात्विक मन से व्रत रखें। न करें: एकादशी को केले के वृक्ष की पूजा न करें, जब इसे अर्पित या काटना वर्जित है; कठोर परंपरा में व्रत के दिन इसे जल न दें; जिस दिन वृक्ष की पूजा करें उस दिन स्वयं केला खाने से बचें। पूजे जा रहे केले के पौधे को कभी न काटें और न हानि पहुँचाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केले के वृक्ष से किस देवता की पूजा होती है?+

केले का वृक्ष बृहस्पति (गुरु / गुरु ग्रह) और भगवान विष्णु को प्रिय है। बुद्धि, विवाह, संतान और गुरु के आशीर्वाद के आह्वान हेतु इसकी पूजा गुरुवार को की जाती है।

केले के वृक्ष की पूजा गुरुवार को क्यों की जाती है?+

गुरुवार बृहस्पति और विष्णु का दिन है। इस दिन हल्दी व पीले अर्पण के साथ केले के वृक्ष की पूजा गुरु को प्रसन्न करती और समृद्धि लाती मानी जाती है।

केले के वृक्ष को क्या अर्पित करना चाहिए?+

तने पर हल्दी लगाएँ और पीले पुष्प, चना दाल, गुड़, पीली मिठाई, एक केला तथा हल्दी मिला जल अर्पित करें। पीला धागा बाँधें और घी या तेल का दीपक जलाएँ।

इस पूजा के लिए बृहस्पति मंत्र क्या है?+

बृहस्पति मंत्र 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः', या सरल 'ॐ बृहस्पतये नमः' है, जिसे पीली या तुलसी की माला पर 108 बार जपा जाता है।

केले के वृक्ष की पूजा से क्या लाभ होते हैं?+

यह कमजोर बृहस्पति को बल देती, विवाह में विलंब दूर करती, दंपतियों को संतान का आशीर्वाद देती, और बुद्धि, पारिवारिक सद्भाव व आर्थिक वृद्धि लाती मानी जाती है।

क्या पूजा के दिन केला खाना चाहिए?+

अनेक भक्त जिस गुरुवार को वृक्ष की पूजा करते हैं उस दिन स्वयं केला खाने से बचते हैं, और पवित्र पौधे के सम्मान में एकादशी को इसे पूजने या काटने से बचते हैं।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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