चतुःशृंगी देवी कौन हैं
पुणे शहर के मध्य एक छोटी पहाड़ी है जिसके चार शिखर हैं, चतुः का अर्थ चार और शृंगी का अर्थ शिखर है, और इसी विशेषता से चतुःशृंगी देवी का नाम पड़ा है। यहां देवी को चट्टान में स्थित स्वयंभू स्वरूप में पूजा जाता है, और उन्हें शहर की प्रमुख रक्षक देवियों में से एक माना जाता है।
वर्षों के दौरान, यह मंदिर एक शांत पहाड़ी मंदिर से पुणे के सबसे अधिक दर्शनार्थियों वाले पूजा स्थलों में से एक बन गया है।
इतिहास और कथा
मान्यता है कि पीढ़ियों पूर्व क्षेत्र की एक श्रद्धालु महिला ने यहां देवी के स्वरूप की खोज कर उसकी प्रतिष्ठा की, जिसके पश्चात इस पहाड़ी के इर्द-गिर्द स्थानीय भक्ति निरंतर बढ़ती गई।
सदियों के दौरान यह मंदिर आज के स्वरूप में विकसित हुआ, जिसे पुणेवासी शहर की अपनी रक्षक कृपा के प्रतीक के रूप में संजोते हैं, जिसका इतिहास किसी एक अभिलिखित तिथि से अधिक परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही भक्ति में सुरक्षित है।
महत्व और भक्तों की मनोकामनाएं
भक्त चतुःशृंगी देवी को शहर की स्वयं की रक्षक मानते हैं और निम्नलिखित के लिए प्रार्थना करते हैं:
- परिवार की भलाई और कल्याण
- शिक्षा, कार्यक्षेत्र और नए उद्यमों में सफलता
- महत्वपूर्ण शुरुआत से पूर्व बाधाओं का निवारण
- पुणे नगर की सुरक्षा
अनेक पुणेवासी नया कार्य आरंभ करने, नए घर में प्रवेश करने या व्यक्तिगत उपलब्धियों के अवसर पर उनके दर्शन करते हैं।
दर्शन मार्गदर्शिका: समय और त्योहार

मंदिर प्रातः से रात्रि तक खुला रहता है, जहां आरती का निश्चित क्रम चलता है, जिससे दिन भर श्रद्धालुओं का सतत प्रवाह बना रहता है।
यहां का नवरात्रि मेला पुणे के सबसे बड़े मेलों में से एक है, जहां लंबे मार्ग पर दुकानें सजी रहती हैं और नौ रातों तक भक्तों की निरंतर कतारें लगी रहती हैं।
चतुःशृंगी मंदिर कैसे पहुंचें
मंदिर पुणे के मध्य में, सेनापति बापट रोड और विश्वविद्यालय क्षेत्र के निकट स्थित है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: पुणे जंक्शन
- निकटतम हवाई अड्डा: पुणे
- सड़क मार्ग से: शहर के भीतर टैक्सी, ऑटो-रिक्शा या बस द्वारा सुगमता से पहुंचा जा सकता है।
जप हेतु मंत्र और सार
भक्त उनके मंदिर में ॐ चतुःशृंगी देव्यै नमः मंत्र का जप करते हैं।
एक विशाल नगर का बार-बार एक छोटे पहाड़ी मंदिर की ओर लौटना यह दर्शाता है कि भक्ति किस प्रकार शहरी जीवन को एकसूत्र में बांधे रखती है। यहां की आराधना श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई लेन-देन नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंदिर का नाम चतुःशृंगी क्यों है?+
यह नाम उस पहाड़ी से लिया गया है जिस पर मंदिर स्थित है, जिसके चार शिखर हैं, संस्कृत में चतुः का अर्थ चार और शृंगी का अर्थ शिखर है।
चतुःशृंगी मंदिर के दर्शन के लिए सबसे उत्तम समय कौन सा है?+
नवरात्रि के दौरान मंदिर में सबसे बड़ा मेला और सर्वाधिक भक्त होते हैं, हालांकि नियमित दर्शन के लिए वर्षभर यहां आया जा सकता है।
क्या पुणे में चतुःशृंगी मंदिर तक पहुंचना सरल है?+
हां, यह सेनापति बापट रोड के निकट शहर के मध्य स्थित है और पुणे रेलवे स्टेशन तथा पुणे हवाई अड्डे से स्थानीय परिवहन द्वारा सुगमता से पहुंचा जा सकता है।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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