कालूबाई देवी कौन हैं
महाराष्ट्र के सातारा जिले की मांढरदेवी पहाड़ी पर विराजमान कालूबाई को मातृ शक्ति के रक्षक स्वरूप में पूजा जाता है, जो पश्चिम महाराष्ट्र में एक क्षेत्रीय और पारिवारिक देवी दोनों रूपों में गहराई से पूजनीय हैं।
उनकी पहाड़ी पर स्थिति स्वयं उनके महत्व का एक अंग है, भक्त उनके मंदिर तक की चढ़ाई को स्वयं में एक भक्ति-यात्रा मानते हैं।
इतिहास और कथा
मान्यता है कि तपस्वियों ने कभी इस पहाड़ी को शांत तपस्या का स्थान माना था, और देवी ने आसपास के गांवों को अपनी सुरक्षा से आशीर्वादित करने हेतु यहां प्रकट होने का निर्णय लिया।
पीढ़ियों के दौरान, इस साधारण पहाड़ी मंदिर की पूजा एक बड़े क्षेत्रीय तीर्थ में विकसित हुई, जिसका दीर्घ भक्ति-इतिहास स्थानीय स्मृति में किसी एक स्थापना-तिथि से अधिक शताब्दियों पुराना माना जाता है।
महत्व और भक्तों की मनोकामनाएं
भक्त कालूबाई देवी से निम्नलिखित के लिए प्रार्थना करते हैं:
- परिवार और पशुधन की सुरक्षा
- अच्छी फसल और ग्रामीण समृद्धि
- कष्ट और रोग से राहत
- कुलदेवी के रूप में निरंतर आशीर्वाद
क्षेत्र के अनेक ग्रामीण परिवार उन्हें अपनी कुलदेवी मानते हैं, और पहाड़ी की चढ़ाई हृदय से भक्ति का अर्पण मानकर की जाती है।
दर्शन मार्गदर्शिका: समय और त्योहार

मंदिर में वर्षभर प्रातः और सायं आरती का नियमित क्रम चलता है।
मंदिर का प्रमुख वार्षिक मेला, जो जनवरी मास में मकर संक्रांति के आसपास आयोजित होता है, महाराष्ट्र भर से बड़ी संख्या में भक्तों को आकर्षित करता है जो गहन भक्ति भाव से साथ मिलकर पहाड़ी चढ़ते हैं।
मांढरदेवी कैसे पहुंचें
मंदिर महाराष्ट्र के सातारा जिले में वाई के निकट स्थित है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: सातारा
- निकटतम हवाई अड्डा: पुणे
- सड़क मार्ग से: सातारा और पुणे से वाई होते हुए पहुंचा जा सकता है, जहां से मंदिर तक अंतिम चढ़ाई शेष रहती है।
जप हेतु मंत्र और सार
भक्त उनके मंदिर की ओर चढ़ते हुए ॐ कालूबाई देव्यै नमः मंत्र का जप करते हैं।
उनकी पहाड़ी पर उपस्थिति भक्तों को स्मरण कराती है कि भक्ति प्रायः प्रयास मांगती है, और यह चढ़ाई स्वयं प्रार्थना बन जाती है। यहां की आराधना श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई लेन-देन नहीं।
पाठकों के प्रश्न
कालूबाई देवी को किस रूप में पूजा जाता है?+
उन्हें मांढरदेवी पहाड़ी पर मातृ शक्ति के रक्षक स्वरूप में पूजा जाता है और पश्चिम महाराष्ट्र के अनेक ग्रामीण परिवार उन्हें कुलदेवी मानते हैं।
कालूबाई मंदिर का मुख्य मेला कब आयोजित होता है?+
सबसे बड़ा वार्षिक मेला जनवरी में मकर संक्रांति के आसपास आयोजित होता है, जब महाराष्ट्र भर से भक्त साथ मिलकर पहाड़ी चढ़ते हैं।
कालूबाई मंदिर, मांढरदेवी कैसे पहुंचें?+
मंदिर सातारा जिले में वाई के निकट है, सातारा या पुणे से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है, मंदिर तक अंतिम चढ़ाई करनी होती है।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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