सप्तशृंगी देवी कौन हैं
नासिक जिले के वणी गांव के पास सप्तशृंग पर्वत पर सप्तशृंगी देवी का स्वयंभू स्वरूप विराजमान है, जो सीधे पहाड़ की चट्टान में उकेरा हुआ है। देवी के अठारह हाथ हैं, जिनमें से प्रत्येक में कोई अस्त्र या रक्षा का प्रतीक सुशोभित है, और भक्त इन्हें उसी शक्ति का रूप मानते हैं जिन्हें संपूर्ण भारत में दुर्गा के नाम से पूजा जाता है।
तुळजापुर, कोल्हापुर और माहूर के मंदिरों के साथ मिलकर, कई भक्त सप्तशृंगी को महाराष्ट्र की सबसे पूजनीय देवी शक्तियों में गिनते हैं, जिन्हें भक्त सामूहिक रूप से राज्य की "साढ़े तीन" शक्तिपीठ भी कहते हैं।
इतिहास और कथा
मान्यता है कि यह पर्वत सदियों से ऋषियों की गहन तपस्या का स्थान रहा है, और भक्तों का विश्वास है कि क्षेत्र को संकट में डालने वाले एक भीषण दैत्य का संहार करने के पश्चात देवी ने साक्षात रूप में यहां प्रकट होने का वरदान दिया। स्थानीय श्रद्धा में मार्कण्डेय ऋषि को उन साधकों में गिना जाता है जिन्होंने इसी स्वरूप की आराधना की थी।
मंदिर की सटीक आयु स्मृति से परे है, परंतु भक्त इसे शताब्दियों पुराना मानते हैं, जहां किसी एक स्थापना-तिथि से अधिक पीढ़ी-दर-पीढ़ी निरंतर पूजा ही इसकी पवित्रता का प्रमाण है।
महत्व और भक्तों की मनोकामनाएं
सप्तशृंगी देवी के समक्ष भक्त विभिन्न मनोकामनाएं लेकर आते हैं, यह विश्वास रखते हुए कि माता हर पुकार सुनती हैं:
- परिवार की सुरक्षा और कल्याण
- विवाह और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद
- नए कार्यों और उद्यमों में सफलता
- रोग और कष्ट के समय राहत
अनेक महाराष्ट्रीयन और गुजराती परिवारों के लिए वे कुलदेवी हैं, और इस पर्वत की यात्रा उनके लिए कृतज्ञता और समर्पण का आवश्यक कर्तव्य मानी जाती है।
दर्शन मार्गदर्शिका: समय और त्योहार

मंदिर में प्रतिदिन प्रातः और सायं आरती का नियमित क्रम चलता है, और दिन के अधिकांश समय दर्शन खुले रहते हैं ताकि वर्षभर पर्वत चढ़ने वाले श्रद्धालुओं का प्रवाह बना रहे।
सबसे बड़ी भीड़ चैत्र नवरात्रि और चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर उमड़ती है, जब लाखों भक्त एक साथ पर्वत चढ़ते हैं, और आश्विन नवरात्रि में भी नौ रातों तक मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है।
सप्तशृंगी कैसे पहुंचें
सप्तशृंगी देवी मंदिर वणी गांव के पास स्थित है, जो महाराष्ट्र के नासिक शहर से लगभग दो घंटे की दूरी पर है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: नासिक रोड
- निकटतम हवाई अड्डा: नासिक (ओझर)
- सड़क मार्ग से: नासिक और कलवण से नियमित राज्य परिवहन बसें वणी तक जाती हैं, जहां से सड़क और सीढ़ियों के माध्यम से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
जप हेतु मंत्र और सार
भक्त प्रायः सरल मंत्र ॐ सप्तशृंगी देव्यै नमः का जप करते हैं, साथ ही नवरात्रि में दुर्गा के व्यापक मंत्रों और देवी माहात्म्य का पाठ भी करते हैं।
हर वर्ष लाखों भक्तों को इस पर्वत पर खींच लाने वाली शक्ति किसी तात्कालिक फल के वादे में नहीं, बल्कि दादी से पोती तक चली आ रही जीवंत श्रद्धा-परंपरा में है। यहां की आराधना भी, हर जगह की तरह, श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई लेन-देन नहीं।
त्वरित उत्तर
सप्तशृंगी देवी मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?+
यह नासिक के पास सप्तशृंग पर्वत में उकेरे गए देवी के स्वयंभू, अठारह भुजाओं वाले स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है, तथा अनेक महाराष्ट्रीयन और गुजराती परिवारों की कुलदेवी के रूप में पूजनीय है।
सप्तशृंगी देवी के दर्शन के लिए सबसे उत्तम समय कौन सा है?+
चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि के समय यहां सबसे भव्य उत्सव होता है, हालांकि भक्त वर्षभर दर्शन हेतु मंदिर आते रहते हैं।
नासिक से सप्तशृंगी देवी मंदिर कैसे पहुंचें?+
मंदिर नासिक शहर से वणी होते हुए सड़क मार्ग से लगभग दो घंटे की दूरी पर है; निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक रोड और निकटतम हवाई अड्डा नासिक (ओझर) है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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