रेणुका देवी कौन हैं
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के माहूर नगर में रेणुका देवी को राज्य की सबसे पूजनीय मातृ शक्तियों में से एक माना जाता है। तुळजापुर, कोल्हापुर और सप्तशृंगी के साथ माहूर को भी महाराष्ट्र के "साढ़े तीन" शक्तिपीठों में गिना जाता है।
यहां देवी को रेणुका माता के रूप में पूजा जाता है, जिन्हें सबसे पहले महर्षि जमदग्नि की पतिव्रता पत्नी और भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की माता के रूप में स्मरण किया जाता है।
इतिहास और कथा
मान्यता है कि महर्षि जमदग्नि का आश्रम इसी पहाड़ी पर था, जहां रेणुका उनके तपस्यामय जीवन में सहचरी थीं। पौराणिक स्मृति के अनुसार ऋषि के परिवार में एक कठिन परीक्षा की घड़ी आई, और अंततः पुत्र परशुराम की गहन मातृभक्ति के कारण रेणुका को पुनः जीवन और सम्मान प्राप्त हुआ।
भक्तों का विश्वास है कि इसी पुनर्स्थापना के पश्चात रेणुका को माहूर में स्वयं देवी स्वरूप में पूजा जाने लगा, और उनकी उपस्थिति ने इस पहाड़ी को पीढ़ियों से तीर्थयात्रियों को आकर्षित करने वाला पवित्र स्थान बना दिया। समीप स्थित दत्तात्रेय मंदिर, जो ऋषि अत्रि और अनसूया से जुड़ा है, माहूर को एक व्यापक तीर्थ स्थल का स्वरूप प्रदान करता है।
महत्व और भक्तों की मनोकामनाएं
भक्त रेणुका देवी से विशेष रूप से पारिवारिक संबंधों में शक्ति और सामंजस्य की कामना करते हैं, उनकी अपनी भक्ति और पुनर्स्थापना की कथा को स्मरण करते हुए:
- पति-पत्नी के बीच विश्वास और सामंजस्य
- संतान की सुरक्षा और दीर्घायु
- कठिनाइयों में भी निष्ठा बनाए रखने का साहस
- समीपस्थ दत्तात्रेय-अनसूया मंदिर के साथ संयुक्त आशीर्वाद
मराठवाड़ा के भक्ति-जीवन में माहूर की पूजा गहराई से रची-बसी है।
दर्शन मार्गदर्शिका: समय और त्योहार

मंदिर में प्रतिदिन प्रातः और सायं आरती का नियमित क्रम चलता है, और दिन भर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन खुले रहते हैं।
चैत्र और आश्विन दोनों नवरात्रियों में माहूर में बड़ी संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं, और अनेक श्रद्धालु इसी पहाड़ी पर स्थित दत्तात्रेय और अनसूया मंदिर के दर्शन भी साथ में करते हैं।
माहूर कैसे पहुंचें
माहूर महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में, तेलंगाना की सीमा के निकट स्थित है।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: किनवट या नांदेड़, वहां से सड़क मार्ग से आगे
- निकटतम हवाई अड्डा: नांदेड़
- सड़क मार्ग से: नांदेड़, यवतमाल और किनवट से राज्य एवं निजी बसों द्वारा भलीभांति जुड़ा हुआ है।
जप हेतु मंत्र और सार
भक्त उनके सम्मान में ॐ रेणुका देव्यै नमः मंत्र का जप करते हैं, साथ ही माहूर यात्रा के दौरान परशुराम और दत्तात्रेय की भी प्रार्थना करते हैं।
रेणुका की कथा मूलतः यही सिखाती है कि भक्ति खोए हुए को भी पुनः स्थापित कर सकती है। भक्त इसी श्रद्धा को अपने साथ घर ले जाते हैं, यह स्मरण रखते हुए कि पूजा श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई लेन-देन नहीं।
पाठकों के प्रश्न
माहूर की रेणुका देवी का क्या महत्व है?+
उन्हें महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और भगवान परशुराम की माता के रूप में स्मरण किया जाता है, जो पारिवारिक भक्ति और सामंजस्य के लिए पूजनीय हैं।
माहूर में कौन से त्योहार मनाए जाते हैं?+
चैत्र और आश्विन दोनों नवरात्रियों में यहां बड़ी संख्या में भक्त आते हैं, जो अक्सर समीपस्थ दत्तात्रेय और अनसूया मंदिर के दर्शन के साथ जुड़ी होती है।
रेणुका देवी मंदिर, माहूर कैसे पहुंचें?+
माहूर तक नांदेड़ के रास्ते पहुंचा जाता है, जो निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा है, इसके बाद सड़क मार्ग से नगर तक जाया जाता है।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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