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दीवाली 2026: लक्ष्मी पूजा विधि, सटीक मुहूर्त, मंत्र और हर घर के 11 अनिवार्य कार्य
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दीवाली 2026: लक्ष्मी पूजा विधि, सटीक मुहूर्त, मंत्र और हर घर के 11 अनिवार्य कार्य

11 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 19, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

क्यों दीवाली अमावस्या वह एक रात है जब लक्ष्मी अपना घर चुनती हैं

Goddess Lakshmi showering gold coins, seated on lotus - Diwali night
On Diwali Amavasya, Lakshmi walks from home to home choosing where to reside for the coming year.

हर पर्व की एक कथा होती है। दीवाली की सात।

राम 14 वर्ष वनवास के बाद अयोध्या लौटे - नगरवासियों ने दीयों से स्वागत किया। कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16,100 स्त्रियाँ मुक्त कीं। लक्ष्मी का विष्णु से विवाह दीवाली रात हुआ। महावीर को निर्वाण इसी दिन। गुरु हरगोबिंद मुगल कारागार से मुक्त हुए। पांडव वनवास से लौटे व हस्तिनापुर में राज्याभिषेक। धनतेरस-छोटी दीवाली-लक्ष्मी पूजा-गोवर्धन-भाई दूज - हिंदू धर्म का एकमात्र 5-दिन का पर्व।

पर दीवाली का हृदय यह है: कार्तिक अमावस्या - वर्ष की सबसे अँधेरी रात - पर देवी लक्ष्मी अपने निवास योग्य घरों की तलाश में पृथ्वी पर विचरण करती हैं। वह स्वच्छ, दीयों से प्रकाशित, सौहार्द व मंत्र से भरे घर चुनती हैं। जहाँ वह उस रात बैठ जाएँ, वहाँ वर्षभर रहती हैं।

दीवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है।

  • अमावस्या तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर 2026, दोपहर 3:32
  • अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवंबर 2026, शाम 5:14
  • लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (प्रदोष काल): शाम 5:45 – 8:22 (8 नवंबर) - श्रेष्ठ समय
  • वृषभ लग्न (स्थिर लक्ष्मी हेतु): शाम 6:48 – 8:44 (सर्वाधिक शुभ)
  • महानिशीथ काल (तांत्रिक साधना हेतु): रात्रि 11:15 – 12:08 (9 नवंबर)
  • चौघड़िया मुहूर्त दुकान/व्यापार पूजा: दोपहर 1:31 – 4:42 (8 नवंबर)

इस लेख में: सटीक पूजा विधि, 5 सर्वशक्तिशाली मंत्र, हर हिंदू घर के 11 अनिवार्य नियम, व दुर्लभ महानिशीथ अनुष्ठान जो केवल तांत्रिक लक्ष्मी साधक करते हैं।

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घर पर चरण-दर-चरण लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि

Lord Ganesh with Goddess Lakshmi - always worshipped together on Diwali
Ganesh is worshipped first on Diwali - no Lakshmi puja is complete without invoking the remover of obstacles.

पूर्ण सामग्री:

  • लक्ष्मी-गणेश की चांदी या मिट्टी की मूर्तियाँ (नई - धनतेरस पर खरीदी)
  • चौकी हेतु लाल वस्त्र
  • 16-पद पूजा सामग्री: अक्षत, रोली, चंदन, कुमकुम, हल्दी, गुलाल
  • कमल के फूल (लक्ष्मी प्रिय), गेंदा, गुलाब
  • पंचामृत + गंगाजल
  • दीये हेतु घी, न्यूनतम 21 मिट्टी के दीये
  • अगरबत्ती (चंदन या मोगरा)
  • खीर, हलवा, लड्डू, 5 फल, 5 मेवा, पान, सुपारी
  • पानीयुक्त नारियल
  • कलश - जल + आम्रपत्र + ऊपर नारियल
  • नकद, गहने, व्यापार खाता बही, चाबियाँ, वाहन चाबी (पूजा हेतु)
  • सूती बातियाँ, लाल धागा
  • धनतेरस पर खरीदी झाड़ू
  • शंख, घंटी

चरण 1 - गृह शुद्धि (प्रातः): गंगाजल मिले जल से पूरा घर पोंछें। मुख्य द्वार पर लक्ष्मी के अंदर जाते पैरों की रंगोली। गेंदे के तोरण। हर कमरे में ताज़े फूल।

चरण 2 - स्थापना (शाम 5:00): मुख्य बैठक के उत्तर-पूर्व या पूर्व कोने में (शयनकक्ष में नहीं) लाल वस्त्र वाली चौकी। दाईं ओर लक्ष्मी, बाईं ओर गणेश (सदा गणेश पहले - दर्शक के बाईं ओर)। सामने कलश। धनतेरस का सोना/चांदी थाली में बगल में।

चरण 3 - संकल्प (शाम 5:45): पूर्व मुख बैठें। चारों ओर जल छिड़कें। संकल्प - 'इस कार्तिक अमावस्या की रात आगामी वर्ष हेतु परिवार के स्वास्थ्य, धन, समृद्धि के लिए माता महालक्ष्मी व श्री गणेश की पूजा करता/करती हूँ।'

चरण 4 - पहले गणेश पूजा: गणेश को तिलक करें। अक्षत, फूल, दूर्वा अर्पित। 11 बार जपें: 'ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥'

चरण 5 - लक्ष्मी अभिषेक: लक्ष्मी मूर्ति को पंचामृत से, फिर शुद्ध जल से स्नान। मुलायम कपड़े से पोंछें। नए लाल वस्त्र पहनाएँ। सिंदूर-कुमकुम तिलक। हल्दी, अक्षत, गुलाब/कमल, अगरबत्ती, दीया अर्पित।

चरण 6 - मुख्य मंत्र जाप (शाम 7:00 – 8:00, वृषभ लग्न): घर में 21 दीये जलाएँ - 5 पूजा कक्ष, 3 मुख्य द्वार, 2 रसोई, 2 हर शयनकक्ष, 2 बालकनी, 1-1 बाथरूम व तिजोरी के ऊपर।

108 बार जपें (कमलगट्टे या स्फटिक माला पर): 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥'

फिर 108 बार कुबेर मंत्र: 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन-धान्याधिपतये धन-धान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥'

चरण 7 - नैवेद्य: भोग अर्पित - खीर (अनिवार्य), हलवा, लड्डू, बताशा, खील, मिठाई। मानसिक रूप से मूर्ति के मुख में स्पर्श। पान, सुपारी अर्पित।

चरण 8 - व्यापार खाता/तिजोरी पूजा: नई खाता बही लक्ष्मी के सामने रखें। पहले पृष्ठ पर कुमकुम से 'शुभ लाभ' लिखें। घर/कार/तिजोरी की चाबियाँ रखें। सब पर आशीर्वाद माँगें।

चरण 9 - आरती: 'ॐ जय लक्ष्मी माता' व 'ॐ जय जगदीश हरे'। घंटी बजाएँ, शंख फूँकें।

चरण 10 - प्रसाद वितरण व दीये जलते रखें: परिवार में प्रसाद बाँटें। कम से कम एक दीया सुबह तक अवश्य जले - लक्ष्मी उसी से घर देखती हैं। बुझने न दें।

दीवाली रात्रि हर घर के 11 अनिवार्य नियम

1. हर कोना साफ करें - भूले हुए भी। लक्ष्मी धूल भरे घर में प्रवेश नहीं करतीं। पलंग के पीछे, सोफे के नीचे, अलमारी के ऊपर साफ करें। गंदगी = अलक्ष्मी (लक्ष्मी की विपरीत बहन)।

2. न झगड़ा, न कठोर वचन, न मदिरा। दीवाली रात घर का वातावरण लक्ष्मी का मूड तय करता है। सौहार्द रखें। दंपत्ति पूजा से पहले मनमुटाव दूर करें।

3. पहले गणेश, फिर लक्ष्मी पूजा। लक्ष्मी ने किसी भी ऐसे घर में रहने से मना किया जहाँ गणेश का पहले आह्वान न हो। यह लक्ष्मी तंत्र का शास्त्रीय नियम है।

4. लक्ष्मी-गणेश मूर्तियाँ प्रतिवर्ष नई। पिछली दीवाली की पुरानी मूर्तियाँ जल में प्रवाहित (या पूजा में अलग रखी) जाएँ। नई मूर्ति = नई ऊर्जा।

5. रातभर एक दीया जलता रखें। पूजा कक्ष में कम से कम एक घी का दीया रात 8 से सुबह 6 तक जले। यह अखंड दीप कहलाता है। यह लक्ष्मी का दीपक है।

6. जल्दी न सोएँ। दीवाली जागरण की रात है। आधी रात के बाद तक जागें। भजन, मंत्र, 11 बजे पुनः आरती। जल्दी सोना = लक्ष्मी निकल जाएँगी।

7. केवल प्रतीकात्मक जुआ। शास्त्र कहते हैं शिव-पार्वती ने दीवाली पर चौसर खेली - अतः परिवार में ताश/चौसर प्रतीकात्मक शुभ। पर वास्तविक भारी जुआ नहीं - यह अलक्ष्मी आमंत्रित करता है।

8. खाने से पहले किसी को खिलाएँ। भोजन की पहली थाली गौ, निर्धन, या ब्राह्मण को। फिर स्वयं खाएँ।

9. दीवाली पर उधार न दें, न लें। दीवाली पर जाता धन आसानी से नहीं लौटता। दीवाली से पहले या बाद ऋण चुकाएँ। दीवाली पर धन का द्वार केवल अंदर की ओर।

10. तिजोरी का द्वार उत्तर मुख। कुबेर की दिशा उत्तर है। तिजोरी उत्तर खुले तो लक्ष्मी रहती हैं। दक्षिण मुख हो तो समायोजित करें।

11. प्रसाद व मिठाई बाँटें। दीवाली रात बाँटना लक्ष्मी का आशीर्वाद गुणा करता है। जितना बाँटें, उतना लौटे। कंजूस घर वर्षभर में उन्हें खो देते हैं।

⛔ दीवाली पर कभी न करें:

  • गंभीर जुआ या मदिरा
  • नाखून या बाल काटना
  • घर के सामने कचरा या थूकना
  • जीवनसाथी, माता-पिता, बच्चों से विवाद
  • भोजन बर्बादी या शेष प्रसाद का अनादर
  • फर्श पर सोना (छठ व्रतियों के अलावा)
  • आधी रात से पहले मुख्य दीया बुझने देना

दिवाली लक्ष्मी मंत्र: अधिकतम समृद्धि के लिए 5 शक्तिशाली जप

दिवाली लक्ष्मी मंत्र: अधिकतम समृद्धि के लिए 5 शक्तिशाली जप

दिवाली अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा वर्ष की सर्वाधिक शक्तिशाली लक्ष्मी आराधना है।

1. महालक्ष्मी अष्टकम (प्रारंभिक आवाहन): नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते॥

2. श्री सूक्तम (समृद्धि के लिए - सर्वाधिक शक्तिशाली वैदिक लक्ष्मी प्रार्थना): ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥ पूर्ण श्री सूक्तम में 15 श्लोक - दिवाली रात सभी 15 एक बार जपना अत्यंत शुभ।

3. लक्ष्मी बीज मंत्र (दैनिक उपयोग): ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद। ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥ पूजा के दौरान 108 बार जपें।

4. अष्टलक्ष्मी (8 रूप): आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी - प्रत्येक का ॐ [नाम] लक्ष्म्यै नमः

5. कनकधाराष्टव (निर्धनता निवारण): अंगं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती... आदि शंकराचार्य की प्रार्थना। दिवाली पूजा के अंत में 7 बार जपें।

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5 दिन का दिवाली क्रम: प्रत्येक दिन का अर्थ और महत्व

दिवाली एक दिन नहीं - 5 दिन का महोत्सव है जो धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर समाप्त होता है।

दिन 1 - धनतेरस (28 अक्टूबर 2026): धन आमंत्रण और मृत्यु-रक्षा। घर साफ, नई वस्तु खरीद, कुबेर पूजा, यम दीपम।

दिन 2 - नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली (29 अक्टूबर): व्यक्तिगत मुक्ति। श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया। ब्रह्म मुहूर्त में उठें, उबटन लगाकर स्नान।

दिन 3 - दिवाली/लक्ष्मी पूजा (30 अक्टूबर): देवी का आगमन - सबसे महत्वपूर्ण दिन। निशिता काल: 31 अक्टूबर रात 12:07 – 12:59 बजे - लक्ष्मी पूजा का सर्वाधिक शक्तिशाली समय।

दिन 4 - गोवर्धन पूजा/अन्नकूट (31 अक्टूबर): भोजन के लिए कृतज्ञता। श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठाया। परिवार श्रीकृष्ण को 56 व्यंजन (अन्नकूट) अर्पित करते हैं।

दिन 5 - भाई दूज (1 नवंबर): भाई-बहन का बंधन। यमुना ने भाई यम को भोजन पर बुलाया। यम ने वचन दिया: जो इस दिन बहन का प्यार (तिलक + भोजन) पाए, असमय मृत्यु से सुरक्षित।

5-दिन की आध्यात्मिक यात्रा: मृत्यु स्वीकारना → जो मरना चाहिए उसे छोड़ना → दिव्य प्रचुरता का आमंत्रण → विद्यमान प्रचुरता के लिए कृतज्ञता → पोषण करने वाले रिश्तों का उत्सव।

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प्रदूषण मुक्त दिवाली: पूर्ण भक्ति और न्यूनतम नुकसान के साथ उत्सव

हर वर्ष दिवाली रात दिल्ली और अन्य शहरों में PM2.5 स्तर सुरक्षित सीमा से 10-30 गुना तक पहुँच जाता है। यह वास्तविक समस्या है जिसका समाधान धर्म से जुड़े भक्तों को करना है।

शास्त्रीय स्थिति: वेद, पुराण या स्मृति में कहीं नहीं लिखा कि दिवाली पर पटाखे फोड़ें। पटाखों की परंपरा अपेक्षाकृत नई है (200-400 वर्ष)। मूल दिवाली दीयों और लैम्पों की रही है।

पूर्ण भक्ति पर्यावरण-दिवाली: 1. अधिकतम दीये, शून्य पटाखे: 100 दीये जलाएँ - 100 दीयों से जगमगाता घर पर्यावरणीय और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से श्रेष्ठ। 2. मिट्टी के दीये: स्थानीय कुम्हारों का समर्थन, प्राकृतिक रूप से विघटित। 3. प्राकृतिक फूल रंगोली: ताज़े फूल की पंखुड़ियाँ, चावल का आटा, हल्दी। 4. शुद्ध मिठाई: घर की बनी या भरोसेमंद स्रोत से। 5. अगर पटाखे आवश्यक: CSIR-प्रमाणित ग्रीन पटाखे (30% कम हानिकारक), केवल रात 8-10 बजे।

वास्तविक दिवाली विजय: नरकासुर अंधकार और प्रदूषण का दैत्य है। 2026 की सच्ची दिवाली विजय अधिक सचेतनता से उत्सव मनाकर इस दैत्य को हराना है।

वंदना ऐप के दिवाली पर्यावरण-गाइड में 2026 के ग्रीन पटाखों की सूची, सामुदायिक पूजा टेम्पलेट और दीया-गणना चेकलिस्ट।

दिवाली के बाद: कृतज्ञता पूजा और वर्षभर लक्ष्मी की उपस्थिति बनाए रखना

दिवाली के बाद: कृतज्ञता पूजा और वर्षभर लक्ष्मी की उपस्थिति बनाए रखना

अधिकांश दिवाली सामग्री पूजा पर समाप्त होती है। दिवाली के बाद क्या होता है - और यह निरंतर समृद्धि के लिए अधिक क्यों मायने रखता है - शायद ही कभी चर्चा होती है।

दिवाली के बाद का प्रोटोकॉल:

1. दिवाली के दीये साफ करने से पहले: अखंड दीया गोवर्धन पूजा तक जले। गोवर्धन पूजा पूरी होने तक पूजा क्षेत्र साफ न करें। 2. कृतज्ञता भ्रमण: घर के प्रत्येक कमरे में जाएँ, दीवार या कोने को स्पर्श करें और कहें: "हमें आश्रय देने के लिए धन्यवाद।" 3. गोवर्धन पूजा प्रसाद: अन्नकूट - जितने हो सके व्यंजन बनाएँ (56 या 7-9)। विविध भोजन प्रचुरता की अभिव्यक्ति है। 4. दिवाली प्रसाद बाँटें: जो मिठाई, मिठाई या सूखे मेवे बचे - बाँट दें। पड़ोसी, नौकर, मंदिर। इसे संग्रहीत न करें।

वर्षभर लक्ष्मी उपस्थिति:

1. दैनिक संध्याकाल दीया: 30 सेकंड का एक मिट्टी का दीया जलाना - सबसे शक्तिशाली सरल दैनिक लक्ष्मी साधना। 2. दैनिक फर्श सफाई: लक्ष्मी स्वच्छ घरों में आती हैं। 3. 'एक देना' नियम: प्रतिसप्ताह कुछ दें - पैसे, भोजन, समय, कौशल। प्रवाह लक्ष्मी का स्वभाव है।

दिवाली समृद्धि पत्र: दिवाली संध्या पर देवी लक्ष्मी को एक छोटा पत्र लिखें। वर्ष की आवश्यकताएँ स्पष्ट करें - माँगें नहीं, ईमानदार संकल्प। लक्ष्मी मूर्ति के चरणों में रखें।

वंदना ऐप के वर्षभर लक्ष्मी साधना अनुभाग में दैनिक संध्याकाल दीया रिमाइंडर, साप्ताहिक लक्ष्मी मंत्र और दिवाली के बाद के वर्ष के लिए समृद्धि जर्नल टेम्पलेट।

पाठकों के प्रश्न

2026 में दीवाली लक्ष्मी पूजा का आदर्श समय क्या है?+

प्रदोष काल (शाम 5:45 – 8:22) व वृषभ लग्न (शाम 6:48 – 8:44) 8 नवंबर को सर्वश्रेष्ठ। 6:48 – 8:22 का अतिव्यापन समय स्थिर लक्ष्मी काल कहलाता है - जब ग्रहों की स्थिति स्थिर, और आमंत्रित लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। सभी 108 मंत्र जप इसी में पूर्ण करें। महानिशीथ काल (रात्रि 11:15 – 12:08) केवल गंभीर तांत्रिक लक्ष्मी साधना हेतु - पारिवारिक पूजा के लिए नहीं।

क्या पंडित के बिना दीवाली पूजा कर सकते हैं?+

हाँ - 90% भारतीय परिवार स्वयं पूजा करते हैं। उपरोक्त 10 चरण पूर्ण हैं। श्रद्धा महत्वपूर्ण है, संस्कृत की परिपूर्णता नहीं। मंत्र उच्चारण में त्रुटि ठीक - लक्ष्मी भाव पढ़ती हैं, उच्चारण नहीं। उच्चारण पर संशय हो तो मंत्र ऑडियो का उपयोग (वंदना ऐप में मुफ्त)। पंडित केवल महानिशीथ तांत्रिक साधना या श्री यंत्र स्थापना हेतु। सामान्य पारिवारिक पूजा में आप अपने घर के पंडित हैं।

दीवाली रात हम क्यों नहीं सोते?+

स्कंद पुराण व्याख्या करता है: लक्ष्मी दीवाली अमावस्या की रात हर गली से गुज़रती हैं। वह देखती हैं कि घर जागता, प्रकाशित व पूजा करता है या नहीं। यदि कोई घर अंधकार में सोया मिले, वह समझ लेती हैं कि यह घर उन्हें नहीं चाहता व आगे निकल जाती हैं। आधी रात के बाद तक जागना, दीया जलाए रखना, व उनके नाम का जाप - यह संकेत है कि 'हम आपको ग्रहण करने को तत्पर हैं।' इसीलिए रात्रि जागरण कहलाती है।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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