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शुक्रवार लक्ष्मी पूजा विधि घर पर: पूर्ण साप्ताहिक धन अभ्यास
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शुक्रवार लक्ष्मी पूजा विधि घर पर: पूर्ण साप्ताहिक धन अभ्यास

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित मार्च 23, 2026
SI

By Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

शुक्रवार लक्ष्मी का दिन क्यों

शुक्रवार शुक्र ग्रह के नाम पर - प्रेम, सौंदर्य, विलासिता, प्रचुरता का ग्रह। लक्ष्मी शुक्र पर शासन करतीं।

लक्ष्मी का दिन क्यों -

  • शुक्र धन, सौंदर्य, प्रेम, सामंजस्य पर शासन
  • शुक्रवार लेनदेन सर्वाधिक शुभ
  • अधिकांश भारतीय व्यवसाय शुक्रवार पूजा करते
  • विवाह प्रस्ताव, आभूषण खरीद परंपरागत शुक्रवार
  • रियल एस्टेट सौदे शुक्रवार

ब्रह्मांडीय तर्क - दिन स्वयं शुक्र की ऊर्जा वहन करता।

साप्ताहिक क्यों (दैनिक नहीं) - लक्ष्मी अपने दिन पर विशेष ध्यान चाहतीं। दैनिक हल्का ठीक, पर शुक्रवार जब वे विस्तृत पूजा अपेक्षा करतीं।

सोलह शुक्रवार (16-शुक्रवार) व्रत - लगातार 16 शुक्रवार पूर्ण पूजा। 16वें तक एक बड़ा आर्थिक मुद्दा हल।

शुक्रवार लक्ष्मी पूजा हेतु आवश्यक वस्तुएँ

स्थायी - लक्ष्मी मूर्ति, चौकी, पीतल/ताम्र दीया, थाली, घंटी, आसन, माला।

साप्ताहिक -

  • पीला कपड़ा
  • पीले फूल
  • शुद्ध घी (सरसों नहीं)
  • कपूर
  • चंदन
  • अक्षत
  • सिंदूर
  • तुलसी पत्र (अनिवार्य)
  • खीर/पंजीरी/मीठा भोग
  • सिक्के/नकद
  • पीला चना
  • मीठी वस्तुएँ

न उपयोग करें - लाल गुड़हल, काले फूल, मांसाहार/प्याज-लहसुन, सरसों तेल, गहरे रंग का कपड़ा।

रंग नियम - पीला, लाल, नारंगी, श्वेत, हल्का गुलाबी। काला/गहरा नीला/भूरा बचें।

पूर्ण शुक्रवार लक्ष्मी पूजा विधि

सर्वोत्तम समय - सूर्योदय - 10 बजे। प्रदोष काल भी।

कुल समय - 30-45 मिनट।

चरण - 1. व्यक्तिगत तैयारी (10 मिनट पहले) 2. सेटअप (5 मिनट) 3. संकल्प (3 मिनट) 4. आचमन (1 मिनट) 5. लक्ष्मी को तिलक (2 मिनट) 6. घी का दीया (2 मिनट) 7. फूल अर्पण (3 मिनट) 8. तुलसी पत्र (1 मिनट) - अनिवार्य 9. सिक्के रखें (1 मिनट) 10. लक्ष्मी मंत्र (10 मिनट) - 21 बार 'ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः' + 21 बार 'ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' 11. सोलह शुक्रवार कथा (यदि व्रत में) 12. भोग (2 मिनट) 13. आरती (5 मिनट) 14. अंतिम प्रार्थना (2 मिनट) 15. प्रसाद वितरण 16. सफाई - अर्पित नकद बटुए में (कभी न खर्च करें)

छोटा संस्करण (10 मिनट): दीया + तिलक + फूल/तुलसी + 11 जप + संक्षिप्त आरती।

सोलह शुक्रवार व्रत नियम

सोलह शुक्रवार व्रत नियम

16-शुक्रवार व्रत आधुनिक हिंदू घरों में सबसे लोकप्रिय।

व्रत संरचना - लगातार 16 शुक्रवार पूर्ण पूजा। हल्का उपवास। कथा पाठ। अंतिम शुक्रवार विस्तारित।

व्रत भोजन नियम - एकल सात्विक भोजन। दोपहर तक केवल फल/दूध। पीले भोजन बेहतर। सेंधा नमक। प्याज-लहसुन नहीं।

16 शुक्रवारों पर बचने योग्य - वाद-विवाद, मांसाहार, अकमाई धन स्वीकारना, स्त्रियों से कठोर वाणी, सूर्यास्त के बाद घर बुहारना, द्वार पर आए को मना करना।

सक्रिय करने योग्य - गरीब को दान (विशेषतः युवा स्त्री), विवाहित स्त्रियों को मिठाई, तुलसी देखभाल, सूर्यास्त पर दीया, भगवद्गीता पाठ।

16वें शुक्रवार उद्यापन - विस्तारित पूजा, विस्तृत भोग, 16 विवाहित स्त्रियों को प्रसाद, दान।

वचन - 16वें शुक्रवार तक एक बड़ा आर्थिक मुद्दा हल।

सामान्य शुक्रवार लक्ष्मी पूजा गलतियाँ

1. सरसों तेल। घी आवश्यक।

2. तुलसी छोड़ना।

3. गहरे रंग।

4. गंदा कक्ष।

5. भोग छोड़ना।

6. एक दिन पहले मांसाहार।

7. दोपहर 1-4 बजे।

8. आरती में घंटी छोड़ना।

9. अर्पित नकद खर्च करना।

10. एक बार ही करना।

11. लालची धन माँगना।

12. शुक्रवार सूर्यास्त के बाद बुहारना।

13. शुक्रवार भोजन/दान मना करना।

14. प्रसाद वितरण छोड़ना।

विशिष्ट संकल्पों हेतु शुक्रवार पूजा

व्यवसाय सफलता हेतु - दस्तावेज़ रखें, कनकधारा जोड़ें।

नौकरी चाहने वाले।

वेतन वृद्धि।

विवाह प्रस्ताव।

आर्थिक बाधा निवारण।

संपत्ति खरीद।

ऋण निवारण।

पारिवारिक आर्थिक सामंजस्य।

बच्चों का भविष्य।

लक्ष्मी-बंधन निवारण - 16-शुक्रवार + कनकधारा + श्री सूक्तम् संयुक्त।

शुक्रवार को सदा अपना लक्ष्मी दिन बनाएँ

शुक्रवार को सदा अपना लक्ष्मी दिन बनाएँ

सभी लक्ष्मी अभ्यासों में, शुक्रवार साप्ताहिक पूजा सर्वाधिक सुलभ गंभीर प्रतिबद्धता।

तीन स्तर -

  • स्तर 1 - सहज
  • स्तर 2 - मानक 30-45 मिनट
  • स्तर 3 - सोलह शुक्रवार

अंतिम चिंतन - शुक्रवार सप्ताह का दिन नहीं - लक्ष्मी माँ के साथ साप्ताहिक मुलाकात।

ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।

त्वरित उत्तर

शुक्रवार लक्ष्मी पूजा का सर्वोत्तम समय?+

सूर्योदय - 10 बजे शिखर। प्रदोष काल भी। दोपहर 1-4 बजे बचें।

क्या अकेले या परिवार के साथ?+

दोनों काम करते। पारिवारिक पूजा सामूहिक भक्ति से पुण्य बढ़ाती।

क्या पुरुष शुक्रवार लक्ष्मी पूजा कर सकते?+

दोनों - पुरुष व स्त्रियाँ। पारंपरिक रूप से स्त्रियाँ करतीं पर अनन्य नहीं।

16-शुक्रवार व्रत में एक छूट जाए तो?+

गिनती सप्ताह 1 से पुनः। 7 दिन दैनिक 108 जप।

क्या ब्राह्मण पुजारी चाहिए?+

नहीं। पारंपरिक रूप से घरेलू अभ्यास।

क्या मासिक धर्म के दौरान शुक्रवार पूजा?+

परंपरागत नियम प्रतिबंधित। मध्य मार्ग - पूर्ण पूजा न, पर मन में लक्ष्मी मंत्र।

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About the author

Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

Dr. Suresh has practiced traditional Vastu and basic Vedic Jyotish for over 18 years across South India. He contributes the Vastu, direction, and home-puja layout guides on Vandnaa.

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