← सभी ब्लॉगRead in English8 मिनट पढ़ें
गंगा स्तोत्र (देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे): अर्थ और लाभ
Stotras

गंगा स्तोत्र (देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे): अर्थ और लाभ

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 23, 2026
VK

By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

गंगा स्तोत्र का महत्व

गंगा स्तोत्र आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तुति है, जो भारत की पवित्रतम नदी माँ गंगा की वंदना करती है। यह अमर पंक्ति देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे से आरंभ होता है और उसी लयबद्ध प्रवाह में बहता है जो स्वयं नदी से मेल खाता है।

सनातन परंपरा में गंगा केवल जल नहीं हैं - वे एक जीवंत देवी हैं जो स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं पर पृथ्वी को पवित्र करने हेतु अवतरित हुईं। वे त्रिपथगा (तीनों लोकों में बहने वाली) और पतित पावनी (पतितों को पावन करने वाली) कहलाती हैं। इस स्तोत्र का पाठ उनके चरणों में शरण लेना और यह प्रार्थना करना है कि वे आत्मा को संसार-सागर से पार कराएँ।

यह स्तुति हरिद्वार, ऋषिकेश, काशी और प्रयाग की गंगा आरती में गाई जाती है, और हर उस व्यक्ति को प्रिय है जो शुद्धि और कृपा हेतु पवित्र नदी की ओर मुड़ता है।

मुख्य श्लोक और अर्थ

आरंभिक श्लोक:

देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे। शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले॥

अर्थ: हे देवी गंगा, देवों की ईश्वरी, भगवती, अपनी तरल तरंगों से तीनों लोकों को तारने वाली, शंकर के मस्तक पर विहार करने वाली, हे निर्मले - मेरी मति सदा आपके चरणकमलों में स्थिर रहे।

आगे का श्लोक:

भगवति भवकलुषविनाशिनि भवविनाशिनि भवतारिणि।

अर्थ: हे भगवती, आप सांसारिक जीवन के मलों का नाश करती हैं, जन्म-मरण के बंधन को मिटाती हैं, और आत्माओं को भव-सागर से पार उतारती हैं।

सम्पूर्ण स्तोत्र इसी छंद में चलता है, यह घोषित करते हुए कि जो श्रद्धा से गंगा जल की एक बूँद भी लेता है उसे यमराज का भय नहीं रहता, और उनकी कृपा अकेले मोक्ष दे सकती है। प्रत्येक श्लोक इसी टेक के साथ समाप्त होता है जो भक्त की मति को उनके पवित्र चरणों में रखती है।

गंगा स्तोत्र पाठ के लाभ

  • पापों का शमन: भक्त मानते हैं कि श्रद्धापूर्ण पाठ संचित पापों को धो देता है, ठीक जैसे गंगा जल देह को पवित्र करता है।
  • मन की शांति: प्रवाहमय लय मन को शांत करती है और विचारों को ईश्वर की ओर मोड़ती है।
  • रक्षा और निर्भयता: स्तोत्र गंगा-भक्त को मृत्यु के भय से मुक्ति का वचन देता है।
  • भक्ति का वरदान: यह मन को देवी के चरणों में स्थिर करता है, भक्ति को गहरा करता है।
  • तीर्थ का पुण्य: श्रद्धा से पाठ, विशेषकर पवित्र घाटों पर या गंगा जल अर्पित करते समय, पवित्र स्नान का पुण्य देता है।

यह स्तोत्र प्रायः गंगा आरती के समय, गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी पर, और जब भी कोई नदी में स्नान करे या उसकी पूजा करे, पढ़ा जाता है।

पाठ विधि

पाठ विधि

1. समय: प्रातः या संध्या में, श्रेष्ठ है स्नान के बाद, पूर्व की ओर या निकट हो तो नदी की ओर मुख करके पाठ करें। 2. तैयारी: माँ गंगा या भगवान शिव के चित्र के समक्ष गंगा जल का छोटा पात्र, घी का दीप और कुछ पुष्प रखें। 3. संकल्प: एक क्षण संकल्प लें, गंगा को और जिनकी जटाओं पर वे विराजती हैं उन शिव को प्रणाम करें। 4. पाठ: स्तोत्र को धीरे-धीरे पढ़ें, छंद को बहने दें। सम्पूर्ण स्तुति पढ़ना श्रेष्ठ है; श्रद्धा से केवल आरंभिक श्लोक भी फलदायी है। 5. अर्पण: पुष्प और दीप अर्पित करें, थोड़ा गंगा जल स्वयं पर और घर में छिड़कें, और मन-देह की पवित्रता हेतु प्रार्थना करें। 6. समापन: हर हर गंगे से समापन करें और गंगा जल प्रसाद रूप में बाँटें।

प्रतिदिन, या हर सोमवार और नदी पर्वों पर पाठ करना आशीर्वाद को गहरा करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा स्तोत्र किसने लिखा?+

'देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे' से आरंभ होने वाला गंगा स्तोत्र परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है, 8वीं शताब्दी के महान संत और दार्शनिक जिन्होंने अनेक भक्ति स्तुतियाँ रचीं।

'देवि सुरेश्वरि भगवति गंगे' का अर्थ क्या है?+

इसका अर्थ है 'हे देवी गंगा, देवों की ईश्वरी, दिव्य भगवती'। यह माँ गंगा को तीनों लोकों की तारिणी के रूप में संबोधित करता है जिनकी तरल तरंगें आत्माओं को भव-सागर से पार उतारती हैं।

गंगा स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?+

इसे स्नान के बाद प्रातः या संध्या में, गंगा आरती के समय, गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी पर, और जब भी गंगा जल अर्पित करें या नदी में स्नान करें, पढ़ा जाता है। प्रतिदिन पाठ भी शुभ है।

गंगा स्तोत्र पाठ के लाभ क्या हैं?+

भक्त मानते हैं कि यह पापों का शमन करता है, शांति और निर्भयता देता है, भक्ति को गहरा करता है और पवित्र स्नान का पुण्य देता है। यह स्तुति मन को देवी के चरणों में रखती है और मोक्ष की प्रार्थना करती है।

VK

About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

Meet the Vandnaa editorial team →

Listen all aartis, mantras & bhajans in one place.

Download Vandnaa App.

Download Now

Explore on Vandnaa

संबंधित लेख