नर्मदाष्टक का महत्व
नर्मदाष्टक, या नर्मदाष्टकम्, आदि शंकराचार्य द्वारा रचित आठ श्लोकों का स्तोत्र है जो नर्मदा नदी, जिसे रेवा भी कहते हैं, की वंदना करता है। यह सबिन्दु सिन्धु शब्दों से आरंभ होता है और प्रत्येक श्लोक इस टेक से समाप्त होता है त्वदीयपादपंकजं नमामि देवि नर्मदे - 'मैं आपके चरणकमलों को नमन करता हूँ, हे देवी नर्मदा।'
नर्मदा भारत की पवित्रतम नदियों में है और एकमात्र प्रमुख नदी जो नर्मदा परिक्रमा द्वारा पूजी जाती है, उसके दोनों तटों पर पैदल की जाने वाली पवित्र परिक्रमा। परंपरा मानती है कि गंगा और यमुना में स्नान पवित्र करता है, पर नर्मदा के दर्शन मात्र से मोक्ष मिल सकता है। यह नदी भगवान शिव से भी जुड़ी है, और उसके तल में मिलने वाले स्वतः निर्मित बाणलिंग शिवलिंग बिना प्राण-प्रतिष्ठा के सम्पूर्ण भारत में पूजे जाते हैं।
नर्मदाष्टक का पाठ इस प्राचीन, जीवनदायिनी नदी का सम्मान और उसकी पावन कृपा प्राप्त करने का मार्ग है।
मुख्य श्लोक और अर्थ
आरंभिक श्लोक:
सबिन्दुसिन्धुसुस्खलत्तरंगभंगरंजितं द्विषत्सु पापजातजातकारिवारिसंयुतम्। कृतान्तदूतकालभूतभीतिहारिवर्मदे त्वदीयपादपंकजं नमामि देवि नर्मदे॥
अर्थ: हे देवी नर्मदा, आपका जल उछलती, लहराती तरंगों से सुशोभित है; आपकी प्रवाहमय धारा शरण में आने वालों के पापसमूह का नाश करती है; आप मृत्यु, यमदूतों और भूत-प्रेतों का भय हरकर रक्षा प्रदान करती हैं - मैं आपके चरणकमलों को नमन करता हूँ, हे देवी नर्मदे।
समापन फलश्रुति:
इदं तु नर्मदाष्टकं त्रिकालमेव यः पठेत् च सर्वपापनाशनं धनं च धर्मवर्धनम्।
अर्थ: जो इस नर्मदाष्टक को तीनों कालों में पढ़ता है वह सभी पापों से मुक्त होता है, और धन तथा धर्म की वृद्धि पाता है।
सम्पूर्ण स्तोत्र में आठ श्लोक हैं, प्रत्येक नदी की सुंदरता और उद्धारक शक्ति का चित्र खींचता है, और हर एक इस प्रेमपूर्ण नमन नमामि देवि नर्मदे से समाप्त होता है।
नर्मदाष्टक पाठ के लाभ
- पापों का नाश: फलश्रुति श्रद्धा से पाठ करने वाले को सभी पापों से मुक्ति का वचन देती है।
- भय से मुक्ति: स्तोत्र मृत्यु, यमदूतों और बुरी शक्तियों का भय हरता है।
- धन और धर्म: यह समृद्धि लाता और पाठक के जीवन में धर्म को निरंतर बढ़ाता है, ऐसा कहा जाता है।
- मन की शांति: प्रवाहमय छंद और नदी के प्रति भक्ति शांति और आंतरिक शुद्धि लाते हैं।
- तीर्थ का पुण्य: श्रद्धा से पाठ, विशेषकर नर्मदा के निकट या उसकी परिक्रमा के समय, पवित्र नदी की कृपा देता है।
यह नर्मदा जयंती पर, नर्मदा परिक्रमा के दौरान, और जब भी कोई नदी में स्नान करे या उसकी या उसके तल के बाणलिंग की पूजा करे, पढ़ा जाता है।
पाठ विधि

1. समय: प्रातः, मध्याह्न या संध्या में पाठ करें - फलश्रुति पूर्ण फल हेतु तीनों कालों (त्रिकाल) की सलाह देती है। 2. तैयारी: निकट हो तो नदी की ओर मुख करके बैठें, या देवी नर्मदा या नर्मदेश्वर (बाणलिंग) शिवलिंग के समक्ष, घी के दीप और पुष्प सहित। 3. संकल्प: देवी को और जिन्हें नर्मदा प्रिय हैं उन भगवान शिव को प्रणाम करें, और एक क्षण संकल्प लें। 4. पाठ: आठों श्लोक धीरे-धीरे पढ़ें, प्रत्येक के अंत में टेक नमामि देवि नर्मदे का सम्मान करते हुए। 5. अर्पण: पुष्प और दीप अर्पित करें, और थोड़ा नर्मदा या गंगा जल स्वयं पर तथा आसपास छिड़कें। 6. समापन: नर्मदे हर (नर्मदा तटों के पारंपरिक अभिवादन) से समापन करें और पवित्रता तथा रक्षा की प्रार्थना करें।
नर्मदा परिक्रमा के दौरान या नर्मदा जयंती पर पाठ आशीर्वाद को गहरा करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नर्मदाष्टक किसने रचा?+
'सबिन्दु सिन्धु' से आरंभ होने वाला नर्मदाष्टक परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य को आरोपित है, जिन्होंने गंगा और नर्मदा सहित देवताओं और पवित्र नदियों के अनेक स्तोत्र रचे।
नर्मदा इतनी पवित्र क्यों मानी जाती है?+
परंपरा मानती है कि अन्य पवित्र नदियों में स्नान पवित्र करता है, पर नर्मदा के दर्शन मात्र से मोक्ष मिलता है। वे भगवान शिव को प्रिय हैं, और उनके तल के बाणलिंग शिवलिंग सम्पूर्ण भारत में पूजे जाते हैं।
नर्मदाष्टक में कितने श्लोक हैं?+
'अष्टक' नाम के अनुरूप, इसमें आठ श्लोक हैं, साथ में एक समापन फलश्रुति। प्रत्येक श्लोक इस टेक से समाप्त होता है 'त्वदीयपादपंकजं नमामि देवि नर्मदे' - 'मैं आपके चरणकमलों को नमन करता हूँ, हे देवी नर्मदा।'
नर्मदाष्टक कब पढ़ना चाहिए?+
फलश्रुति पूर्ण लाभ हेतु इसे दिन में तीन बार (त्रिकाल) पढ़ने की सलाह देती है। यह विशेषकर नर्मदा जयंती पर, नर्मदा परिक्रमा के दौरान, और नदी में स्नान या उसकी पूजा करते समय पढ़ा जाता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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