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गुरु पूर्णिमा 2026: तिथि, महत्व, पूजा विधि और गुरु को सम्मान देने के 5 मंत्र
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गुरु पूर्णिमा 2026: तिथि, महत्व, पूजा विधि और गुरु को सम्मान देने के 5 मंत्र

9 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 13, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

गुरु पूर्णिमा क्या है और क्यों मनाई जाती है

गुरु पूर्णिमा आषाढ़ मास की पूर्णिमा को आती है - 2026 में यह बुधवार, 29 जुलाई 2026 है। इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है, जो चार वेदों, 18 पुराणों और महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास के जन्म का प्रतीक है।

गुरु = गु (अंधकार) + रु (हटाने वाला)। गुरु वह है - आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक, माता-पिता या ग्रंथ - जो आपके जीवन से अज्ञान का अंधकार हरते हैं।

इस एक दिन शिष्य की कृतज्ञता गुरु तक कई गुना होकर पहुँचती है। आज गुरु का नाम 108 बार जपना अन्य दिनों के 1 लाख बार के बराबर है।

घर पर गुरु पूर्णिमा पूजा विधि (चरणबद्ध)

ब्रह्म मुहूर्त (4:30–6:00 AM) सर्वश्रेष्ठ है। यदि गुरु जीवित हैं, उनके पास जाएं; यदि नहीं, स्वच्छ पीले वस्त्र पर उनकी फोटो रखें।

चरण 1: सूर्योदय से पूर्व स्नान, स्वच्छ पीले या श्वेत वस्त्र धारण करें।

चरण 2: गुरु की फोटो / व्यासजी के चित्र के सम्मुख घी का दीप व धूप जलाएं।

चरण 3: पीले पुष्प, फल और मिष्ठान (खीर या लड्डू) अर्पित करें।

चरण 4: व्यास पूजन करें - जल छिड़कें, अक्षत (चावल + हल्दी) चढ़ाएं और 'ॐ व्यासाय नमः' 21 बार जपें।

चरण 5: गुरु गीता, श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 4, या श्री गुरु चरित्र का कम से कम एक अध्याय पढ़ें।

चरण 6: गुरु के चरण स्पर्श करें (या उनके चित्र के) - आज का यह एक कार्य 7 जन्मों का गुरु-ऋण उतारता है।

चरण 7: पीली वस्तुएं दान करें - मूंग दाल, केला, हल्दी, स्वर्ण रंग वस्त्र - किसी ब्राह्मण, शिक्षक या जरूरतमंद विद्यार्थी को।

आज जपने योग्य 5 शक्तिशाली गुरु मंत्र

1. गुरु वंदना (सर्वाधिक आवश्यक - 11 बार): 'गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णुः, गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परब्रह्म, तस्मै श्रीगुरवे नमः॥'

2. गुरु बीज मंत्र (108 बार): 'ॐ गुरवे नमः।'

3. व्यास मंत्र (21 बार): 'ॐ नमो भगवते व्यासाय, विष्णु रूपाय व्यासाय नमो नमः।'

4. दक्षिणामूर्ति मंत्र - आदि गुरु शिव (108 बार): 'ॐ श्री दक्षिणामूर्तये नमः।'

5. गुरु गायत्री (3, 11 या 108 बार): 'ॐ गुरुदेवाय विद्महे, परम गुरवे धीमहि, तन्नो गुरुः प्रचोदयात्।'

समाप्ति: 'हे गुरु देव, अज्ञानी हूँ, मार्ग दिखाएं।'

गुरु को क्या भेंट दें (और क्या नहीं)

गुरु को क्या भेंट दें (और क्या नहीं)

✅ सर्वश्रेष्ठ भेंट: हस्तलिखित कृतज्ञता पत्र, ताजे फल, पीले पुष्प, केसरिया शाल, धर्म ग्रंथ, घी, मिश्री या शुद्ध शहद।

✅ सर्वाधिक मूल्यवान भेंट: शेष वर्ष उनकी एक शिक्षा का पालन करने का सच्चा वचन।

❌ टालें: चमड़े की वस्तुएं, अल्कोहल युक्त इत्र, काले रंग की भेंट, तामसिक भोजन, तीखी वस्तुएं (चाकू, कैंची), और अशुभ राशि में नकद (सदा ₹11, ₹21, ₹51, ₹101, ₹501, ₹1,101)।

यदि गुरु शरीर त्याग चुके हैं, वही वस्तुएं किसी मंदिर, आश्रम या योग्य शिक्षक को दान करें। पुण्य सीधे उन तक पहुँचता है।

महर्षि व्यास - संपूर्ण मानवता के आदि गुरु

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं - महर्षि कृष्ण द्वैपायन व्यास के सम्मान में, जिनका मानव ज्ञान को योगदान इतिहास में अतुलनीय है:

व्यास ने मानवता को क्या दिया:

  • एक मूल वेद को 4 में विभाजित किया - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद
  • महाभारत की रचना - 1,00,000 श्लोक, विश्व की सबसे लंबी महाकाव्य रचना
  • 18 पुराणों की रचना - भागवत, विष्णु, शिव, लिंग, स्कंद, देवी भागवत आदि
  • ब्रह्मसूत्रों का संकलन - समस्त वेदांत दर्शन का आधार

इसी पूर्णिमा पर क्यों: व्यास का जन्म आषाढ़ पूर्णिमा को हुआ था। व्यास का सम्मान करके हम हर परंपरा के हर गुरु का सम्मान करते हैं - क्योंकि सभी ज्ञान उन्हीं से प्रवाहित होता है।

व्यास वंदना (गुरु पूजा से पहले जपें): 'व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे। नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः॥'

🙏 वंदना ऐप में व्यास वंदना और गुरु स्तोत्रम - पूर्ण संस्कृत उच्चारण गाइड के साथ।

गुरु-शिष्य परंपरा: कैसे इसने समस्त ज्ञान को संरक्षित रखा

छापेखाने से पहले, इंटरनेट से पहले - भारत के पास गुरु-शिष्य परंपरा थी। इस मौखिक संचरण प्रणाली ने वेद, उपनिषद, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, ज्योतिष और आयुर्वेद को बिना एक शब्द लिखे हजारों वर्षों तक संरक्षित रखा।

यह कैसे काम करती थी:

  • गुरु छात्र को योग्यता के आधार पर स्वीकार करते थे, धन के आधार पर नहीं
  • छात्र गुरुकुल में 12-25 वर्ष रहता था
  • ज्ञान श्रुति (सुनकर) और स्मृति (याद करके) से संचारित होता था
  • छात्र की गुरु-सेवा ही ज्ञान का मूल्य थी - धन नहीं

आधुनिक गुरु-शिष्य संबंध: 2026 में गुरुकुल में रहना जरूरी नहीं। संबंध कई स्तरों पर काम करता है:

  • औपचारिक आध्यात्मिक गुरु (मंत्र या साधना में दीक्षा देने वाले)
  • धार्मिक शिक्षक (आध्यात्मिक अभ्यास का मार्गदर्शक)
  • जीवन-मार्गदर्शक (जिसके मार्गदर्शन से कष्ट कम होता है)

वह एक सिद्धांत जो कभी नहीं बदलता: 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः' - गुरु एक रूप में पूरी त्रिमूर्ति हैं।

🙏 वंदना ऐप में गुरु स्तोत्रम, गुरु वंदना और गुरु पादुका स्तोत्रम - ऑडियो और लिप्यंतरण सहित।

गुरु पूर्णिमा 2026 पर क्या करें: संपूर्ण साधना गाइड

गुरु पूर्णिमा 2026 पर क्या करें: संपूर्ण साधना गाइड

गुरु पूर्णिमा 2026: बुधवार, 29 जुलाई 2026। पूर्णिमा प्रारंभ: 28 जुलाई सुबह 10:27 | समाप्ति: 29 जुलाई दोपहर 12:40 सबसे शुभ पूजा समय: 29 जुलाई सुबह 6:00 – दोपहर 12:40

संपूर्ण गुरु पूर्णिमा साधना:

प्रातः (9 बजे से पहले): 1. ब्रह्म मुहूर्त में जागें, स्नान, सफेद या पीले वस्त्र 2. पूजा स्थान पर घी का दीया 3. गुरु की फोटो या महर्षि व्यास का चित्र रखें 4. पीले फूल, पीले फल (केला, आम), पीली/सफेद मिठाई अर्पण 5. गुरु वंदना 108 बार: 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु...' 6. यदि गुरु जीवित हैं - आज फोन करें या मिलने जाएं

दिन के दौरान:

  • उपवास या केवल सात्विक भोजन
  • गुरु की शिक्षाएं पढ़ें या सुनें
  • आध्यात्मिक संस्था, विद्यालय में दान या किसी जरूरतमंद को पुस्तकें दें

संध्या:

  • सूर्यास्त पर 5 दीप
  • 'ॐ गुरवे नमः' 108 बार
  • 10 मिनट का ध्यान - जीवन के हर शिक्षक के प्रति कृतज्ञता पर केंद्रित

दक्षिणा के रूप में क्या दें:

  • पहला विकल्प: अगले 41 दिनों की नियमित साधना का संकल्प
  • दूसरा विकल्प: ज्ञान दान - पुस्तकें, किसी बच्चे की शिक्षा में सहयोग
  • तीसरा विकल्प: जो उचित लगे वह मुद्रा दक्षिणा

🙏 गुरु पूर्णिमा के तुरंत बाद 41-दिन की मंत्र साधना शुरू करें। वंदना ऐप में रिमाइंडर सेट करें।

त्वरित उत्तर

मेरा कोई औपचारिक गुरु नहीं है। क्या फिर भी गुरु पूर्णिमा मना सकता हूँ?+

हाँ - बिल्कुल। महर्षि वेद व्यास (सभी गुरुओं के मूल गुरु), भगवान दक्षिणामूर्ति (आदि गुरु शिव), या स्वयं गीता/रामायण को गुरु-ग्रंथ रूप में पूजें। पीले वस्त्र पर रखकर पूजन करें और 'ॐ गुरवे नमः' 108 बार जपें। समय पर ब्रह्मांड स्वयं सही गुरु भेजेगा।

क्या आज माता-पिता या शिक्षक को गुरु रूप में पूज सकता हूँ?+

हाँ - और करना चाहिए। प्रथम गुरु माता, द्वितीय पिता, तृतीय शिक्षक हैं। आज उनके चरण स्पर्श करें, पीले पुष्प व मिष्ठान भेंट दें, और आशीर्वाद लें। यह किसी भी मंदिर अनुष्ठान से अधिक व्यासजी को प्रिय है।

क्या गुरु पूर्णिमा पर व्रत रखना चाहिए?+

व्रत अनिवार्य नहीं पर अत्यंत पुण्यदायक है। सात्विक व्रत - केवल फल, दूध और जल संध्या पूजा तक - आज के फल को कई गुना करता है। अनाज, नमक, प्याज, लहसुन त्यागें। पहले गुरु (या उनकी फोटो) को भोग लगाकर ही व्रत खोलें।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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