सावन 2026 की तिथियाँ और चारों सावन सोमवार
2026 में सावन (श्रावण) मास शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 से प्रारंभ होकर रविवार, 9 अगस्त 2026 (रक्षा बंधन) को समाप्त होता है।
2026 के चार सावन सोमवार:
- प्रथम सोमवार: 13 जुलाई 2026
- द्वितीय सोमवार: 20 जुलाई 2026
- तृतीय सोमवार: 27 जुलाई 2026
- चतुर्थ सोमवार: 3 अगस्त 2026
सावन शिव को प्रिय क्यों: समुद्र मंथन में जब घातक हलाहल विष निकला और सृष्टि पर संकट आया, शिव ने उसे पीकर कंठ में धारण किया (नीलकंठ बने)। उन्हें शीतल करने हेतु देवताओं ने पूरे मास उन पर जल चढ़ाया। इसीलिए आज भी सावन में भक्त शिवलिंग पर जल और दूध चढ़ाते हैं - रक्षक को शीतल करने का कार्य।
सावन सोमवार व्रत विधि (चरणबद्ध)
संकल्प (एक रात पूर्व): व्रत व शिव पूजा का संकल्प लें।
प्रातः: सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें, स्वच्छ श्वेत या केसरिया वस्त्र पहनें (काला कभी नहीं)।
अभिषेक (सर्वाधिक महत्वपूर्ण): शिव मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करें। इसी क्रम में चढ़ाएं: 1. शुद्ध जल (गंगाजल श्रेष्ठ) 2. कच्चा दूध 3. दही 4. शहद 5. घी 6. शक्कर 7. पुनः शुद्ध जल
चढ़ाते समय निरंतर 'ॐ नमः शिवाय' जपें।
फिर अर्पित करें: बेल पत्र - तीन पत्ती, अखंडित - चंदन तिलक, श्वेत पुष्प (विशेष आक/धतूरा), भांग या धतूरा फल (वैकल्पिक), श्वेत अक्षत और धूप।
पाठ या श्रवण: शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, या महामृत्युंजय स्तोत्र।
व्रत भोजन: शिव पूजा पश्चात केवल एक संध्या भोजन - फलाहारी (साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, फल, दूध)। अनाज, साधारण नमक (सेंधा नमक मान्य), प्याज, लहसुन निषिद्ध।
व्रत पारण: अगली प्रातः शिव को भोग लगाकर तथा ब्राह्मण/गाय को भोजन कराकर।
सावन सोमवार के 5 सर्वाधिक शक्तिशाली शिव मंत्र
1. पंचाक्षरी मंत्र (108 × कोई भी संख्या - न्यूनतम 1 माला): 'ॐ नमः शिवाय।' सरलतम और सर्वाधिक शक्तिशाली। प्रत्येक सावन सोमवार कम से कम 108 बार जपें।
2. महामृत्युंजय मंत्र (108 बार - आरोग्य व दीर्घायु हेतु): 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' रोग, दुर्घटना व अकाल मृत्यु के भय को हटाने में सिद्ध।
3. रुद्र गायत्री (54 या 108 बार): 'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि, तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।'
4. शिव बीज मंत्र (108 बार): 'ॐ ह्रीं श्रीं शिवाय नमः।' वैराग्य सहित धन हेतु।
5. बिल्व पत्र मंत्र (प्रत्येक पत्ते के साथ): 'त्रिदलं, त्रिगुणाकारं, त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्। त्रिजन्म पाप संहारं, एक बिल्वं शिवार्पणम्॥'
सावन में 7 कार्य जो कभी न करें

सावन तप का मास है। इन नियमों को तोड़ने से कर्म तीव्र होता है।
1. ❌ मांस, अंडा, मद्य, प्याज, लहसुन निषिद्ध - पूरे मास, केवल सोमवार को नहीं।
2. ❌ परिवार के पुरुष प्रमुख दूध न पीएं - इस मास दूध शिव का है; केवल अर्पित करें। महिलाएं व बच्चे पी सकते हैं।
3. ❌ केवड़ा, केतकी, चंपा पुष्प, या नारियल पानी शिवलिंग पर कभी न चढ़ाएं - शिव ने स्वयं इन्हें श्रापित किया।
4. ❌ सावन या सोमवार को स्वयं वृक्ष से बेल पत्र कभी न तोड़ें - रविवार को सोमवार हेतु तोड़ें या मंदिर से खरीदें।
5. ❌ पुरुष सावन (विशेष सोमवार) में बाल, दाढ़ी, नाखून न काटें।
6. ❌ किसी पशु का अपमान, मारपीट, हत्या न करें - विशेष सर्प, बैल, श्वान (शिव का वाहन परिवार)।
7. ❌ माता-पिता, पत्नी, अतिथि से कभी विवाद न करें। सावन में नकारात्मक वाणी शिव को सीधे अप्रिय।
सावन शिव का महीना क्यों है - समुद्र मंथन का संबंध
सावन (श्रावण) भगवान शिव की सबसे बड़ी परीक्षा का महीना है - और उनके सबसे बड़े वरदान का भी।
समुद्र मंथन की कथा: जब देवताओं और असुरों ने क्षीर सागर को मथा, तो 14 दिव्य रत्न निकले। 13वाँ था अमृत। पर सबसे पहला था हलाहल - इतना प्रचंड विष कि एक बूँद समस्त सृष्टि को नष्ट कर सकती थी।
न देव न असुर इसे सँभाल सकते थे। समस्त ब्रह्मांड विनाश के कगार पर था। तब देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। शिव ने बिना संकोच वह विष पिया - उसे अपने कंठ में रोक लिया (नीलकंठ) ताकि वह फैले नहीं। यह घटना सावन मास में हुई।
शिव के कंठ को शीतल करने के लिए पार्वती माँ ने उनका कंठ दबाया। चंद्रमा ने सहायता की - इसीलिए शिव चंद्रशेखर हैं। गंगा जी भी उनकी जटाओं से बहकर शीतलता देती हैं। और शिव भक्तों ने शिवलिंग पर जल चढ़ाना शुरू किया - एक परंपरा जो 5000 वर्ष बाद आज भी हर सावन सोमवार जारी है।
सावन 2026 की तिथियाँ: 11 जुलाई – 9 अगस्त 2026 (4 सोमवार: 13, 20, 27 जुलाई और 3 अगस्त)
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सावन विशेष प्रथाएं: कांवड़ यात्रा, हरा भोजन और श्रावण नक्षत्र
सावन सोमवार व्रत केवल शुरुआत है - पूरा सावन मास आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण प्रथाओं से भरा है:
1. कांवड़ यात्रा: भक्त (कांवड़िए) नंगे पाँव गंगा तक चलते हैं, बाँस के पात्रों में गंगाजल लाते हैं और स्थानीय शिव मंदिर में जलाभिषेक करते हैं। कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता - कंधे से कंधे पर।
2. सावन का हरा भोजन: सावन में अधिकांश भक्त हरी पत्तेदार सब्जियाँ (साग, पालक) नहीं खाते - क्योंकि इस मौसम में पत्तियों के अंदर सूक्ष्म जीव सर्वाधिक होते हैं। परंपरागत कारण: अहिंसा।
क्या खाएं: दूध, दही, फल, साबूदाना, समा चावल, आलू, कंद।
3. सावन में प्रदोष व्रत: हर पक्ष की त्रयोदशी को प्रदोष। सावन 2026 में - 24 जुलाई (शुक्ल) और 7 अगस्त (कृष्ण)। प्रदोष काल में शिव मंदिर जाना किसी सामान्य दिन से 1000 गुना अधिक प्रभावशाली।
4. सावन में तीज और नाग पंचमी:
- हरतालिका तीज: 7 अगस्त 2026
- नाग पंचमी: 9 अगस्त 2026 (सावन का अंतिम दिन)
महिलाओं के लिए हरतालिका तीज मास का सबसे बड़ा व्रत - पति की दीर्घायु के लिए, पार्वती माँ की कथा के साथ।
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सावन सोमवार व्रत: पूर्ण उपवास नियम और क्या खाएं

चाहे पहली बार व्रत कर रहे हों या वर्षों से - ये नियम आपका व्रत आध्यात्मिक रूप से वैध और शारीरिक रूप से टिकाऊ बनाते हैं:
व्रत कैसे शुरू करें:
- सावन के पहले सोमवार से शुरू करें। 2026 में: 13 जुलाई
- संकल्प लें: 'मैं सावन 2026 के सभी 4 सोमवार (13, 20, 27 जुलाई और 3 अगस्त) भगवान शिव की कृपा के लिए व्रत रखूँगा/रखूँगी'
- सभी 4 सोमवार बिना नागा रखें। बीच में छोड़ने पर प्रायश्चित्त पूजा जरूरी
उपवास नियम:
- सूर्योदय से पहले उठें, स्नान, सफेद या हल्का नीला वस्त्र
- मुख्य व्रत भोजन केवल एक बार - सूर्यास्त के बाद मंदिर दर्शन के बाद
- स्वीकार्य भोजन: समा चावल, साबूदाना खिचड़ी, दूध उत्पाद, फल, सिंघाड़े के आटे की रोटी, आलू
- निषेध: गेहूं, चावल, दाल, प्याज, लहसुन, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, मांस, मद्य
5-चरण सोमवार पूजा: 1. ब्रह्म मुहूर्त में शिव मंदिर 2. शिवलिंग पर कच्चा दूध + गंगाजल - OM NAMAH SHIVAYA 108 बार 3. बेल पत्र - शिव को सर्वाधिक प्रिय, विषम संख्या में (1, 3, 5, 11, 21) 4. घी या तिल का दीया 5. शिव आरती और वापस प्रसाद के लिए
यदि उपवास संभव न हो: शिव मंदिर में जलाभिषेक + 108 बार OM NAMAH SHIVAYA - बिना उपवास के भी - सावन का महत्वपूर्ण लाभ देता है।
🙏 वंदना ऐप में सावन सोमवार व्रत कथा - हिंदी ऑडियो में - सोमवार का अलार्म सेट करें।
पाठकों के प्रश्न
क्या अविवाहित कन्याएं सावन सोमवार व्रत रख सकती हैं? क्या लाभ मिलता है?+
हाँ - सावन सोमवार व्रत अविवाहित कन्याओं के लिए शिव-समान पति प्राप्ति हेतु सर्वाधिक अनुशंसित है। माँ पार्वती ने स्वयं शिव प्राप्ति हेतु 108 वर्ष यह व्रत किया था। एक ही सावन के चारों व्रत मांगलिक दोष, विवाह में विलंब हटाते हैं और गुणी, प्रेमी जीवनसाथी देते हैं।
मुझे रक्तचाप/शुगर है और पूर्ण व्रत नहीं रख सकता। क्या करूँ?+
शिव भोले भण्डारी हैं - प्रसन्न करने में सरलतम। स्वास्थ्य प्रथम है। केवल प्रातः एक फलाहारी भोजन लें, दिनभर दूध व जल लें, और 'ॐ नमः शिवाय' का यथासंभव मानसिक जप करें। संध्या में शिव मंदिर जाकर केवल जल + बेल पत्र चढ़ाएं। यह पूर्णतः स्वीकार्य है।
कांवड़ यात्रा क्या है और क्या सावन में आवश्यक है?+
कांवड़ यात्रा वह तीर्थ है जिसमें भक्त (कांवड़िये) हरिद्वार/गंगोत्री से बांस की कांवड़ पर पवित्र गंगा जल लाकर अपने स्थानीय शिव मंदिर में शिवरात्रि (अंतिम सावन सोमवार) को चढ़ाते हैं। यह अनिवार्य नहीं है। घर पर साधारण जल से पूर्ण भक्ति सहित अभिषेक भी उतना ही पुण्यदायक है - शिव भाव देखते हैं, दूरी नहीं।
About the author
Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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