जीण माता कौन हैं
सीकर से लगभग 30 किलोमीटर दूर रेवासा गांव के निकट अरावली पर्वत श्रंखला की एक पहाड़ी पर जीण माता मंदिर स्थित है, जो राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सबसे प्रिय देवी मंदिरों में से एक है। जीण माता को दुर्गा का रूप माना जाता है, वह उग्र और वात्सल्यमयी आदिशक्ति जिनके दर्शन के लिए सीकर, जयपुर और दूर-दूर से भक्त अटूट श्रद्धा के साथ इस पहाड़ी पर चढ़ते हैं।
पीढ़ियों से शेखावाटी क्षेत्र के परिवार जीण माता को अपनी कुलदेवी मानते आए हैं, और जीवन के हर महत्वपूर्ण अवसर पर उनकी शरण में आते हैं।
जीण माता और हर्ष भैरव की कथा
कहा जाता है कि जीण माता और पड़ोसी पहाड़ी पर विराजमान हर्ष भैरव भाई-बहन थे। कथा के अनुसार दोनों के बीच किसी बात पर मतभेद हुआ, और जीण ने इसी पहाड़ी पर गहन तपस्या का मार्ग चुना, जिससे उन्होंने अपनी दिव्य शक्ति प्रकट की और स्वयं देवी स्वरूप में पूजी जाने लगीं, जबकि हर्ष भैरव को समीप की चोटी पर उनके भक्त भाई और रक्षक के रूप में सम्मान मिलता है।
आज भी अनेक भक्त एक ही यात्रा में दोनों पहाड़ियों के दर्शन करते हैं, दोनों मंदिरों को भक्ति और दिव्य शक्ति की एक ही कथा के दो अध्याय मानते हुए।
महत्व और भक्तों की कामनाएं
श्रद्धालु जीण माता के पास कठिनाइयों से रक्षा, हृदय की सच्ची इच्छाओं की पूर्ति और परिवार की कुशलता का आशीर्वाद मांगने आते हैं। अनेक भक्त मंदिर में मन्नत का धागा बांधते हैं, और प्रार्थना पूरी होने पर वापस आकर उसे खोलते हैं।
आदिशक्ति के हर रूप की भांति, भक्त मानते हैं कि जीण माता की कृपा भय से नहीं बल्कि प्रेम से बहती है, और चाहे भेंट कितनी भी साधारण हो, सच्ची श्रद्धा ही उन तक पहुंचती है।
दर्शन और उत्सव

मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी में बनी लंबी सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, हालांकि वृद्ध श्रद्धालुओं और चढ़ने में असमर्थ भक्तों के लिए रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है। मंदिर में देवी मंदिरों की सामान्य परंपरा अनुसार सुबह-शाम आरती और दिनभर दर्शन होते हैं।
चैत्र और आश्विन की नवरात्रि में यह पहाड़ी जीवंत हो उठती है, जब राजस्थान भर से लाखों श्रद्धालु एक साथ पहाड़ी चढ़ते हैं, और यह चढ़ाई स्वयं भक्ति का एक कार्य बन जाती है।
जीण माता मंदिर कैसे पहुंचें
जीण माता मंदिर राजस्थान के सीकर शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर रेवासा गांव के निकट स्थित है। सीकर सड़क और रेल मार्ग से भलीभांति जुड़ा हुआ है, और ठहरने व यातायात के लिए निकटतम प्रमुख शहर है। निकटतम हवाई अड्डा जयपुर में है, जहां से मंदिर तक सड़क मार्ग से कुछ घंटों में पहुंचा जा सकता है।
अनेक श्रद्धालु इस यात्रा को शेखावाटी के व्यापक तीर्थ मार्ग के भाग के रूप में योजित करते हैं, जो अपनी चित्रित हवेलियों और किलों के लिए भी प्रसिद्ध है।
जप का मंत्र और सार
जीण माता के चरणों में भक्त यह मंत्र जपते हैं:
"जय जीण माता, शक्ति की माता, संकट हर्ता, विपदा तारा" अर्थ: "मां जीण की जय हो, जो शक्ति की माता हैं, संकटों को हरने वाली और विपत्तियों से तारने वाली हैं।"
जीण माता और हर्ष भैरव की यह पहाड़ी भक्तों को स्मरण कराती है कि शक्ति और उसके समर्पित रक्षक सदा साथ खड़े रहते हैं। यहां की उपासना श्रद्धा और प्रेम का कार्य है, कोई सौदा नहीं, जो एक-एक कदम कर पहाड़ी पर चढ़ाई के साथ चढ़ता है।
त्वरित उत्तर
जीण माता कौन हैं?+
जीण माता दुर्गा का एक स्वरूप हैं, जिनकी पूजा सीकर के निकट एक पहाड़ी पर होती है, और उन्हें शेखावाटी क्षेत्र के अनेक परिवार अपनी कुलदेवी मानते हैं।
जीण माता और हर्ष भैरव के बीच क्या संबंध है?+
परंपरा के अनुसार दोनों भाई-बहन हैं, जिनके मंदिर पड़ोसी पहाड़ियों पर स्थित हैं, और अनेक भक्त दोनों मंदिरों के दर्शन एक ही यात्रा में करते हैं।
जीण माता मंदिर कब जाना चाहिए?+
चैत्र और आश्विन की नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण अवसर हैं, हालांकि मंदिर वर्षभर दर्शन के लिए भक्तों का स्वागत करता है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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