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कलश स्थापना - विधि, महत्व और मंत्र
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कलश स्थापना - विधि, महत्व और मंत्र

9 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Reviewed by Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

कलश स्थापना क्या है

कलश स्थापना, जिसे घटस्थापना भी कहते हैं, पूजा या पर्व के आरंभ में पवित्र जलपात्र स्थापित करने का अनुष्ठान है। कलश ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है और माना जाता है कि इसमें सभी देवताओं, पवित्र नदियों व दिव्य ऊर्जा की उपस्थिति निहित है। यह वह केंद्रीय कर्म है जो नवरात्रि, गृह प्रवेश, और अनेक व्रत व पूजा अनुष्ठानों को आरंभ करता है, घर में मंगल व समृद्धि का आह्वान करते हुए।

कलश स्थापना के लिए आवश्यक वस्तुएँ

आरंभ से पहले ये वस्तुएँ एकत्र करें: 1. एक तांबे, पीतल या मिट्टी का पात्र (कलश)। 2. स्वच्छ जल, उपलब्ध हो तो थोड़ा गंगा जल मिलाकर। 3. कलश के मुख पर रखने हेतु आम के पत्ते (पाँच या सात)। 4. लाल वस्त्र में लिपटा एक साबुत नारियल। 5. कलश के चारों ओर बाँधने हेतु पवित्र धागा (मौली या कलावा)। 6. रोली, कुमकुम, अक्षत, सिक्के, सुपारी व पुष्प। 7. नवरात्रि हेतु, कलश रखने के लिए मिट्टी व जौ के बीज वाला चौड़ा मिट्टी का पात्र भी रखें।

कलश स्थापना विधि - चरण-दर-चरण

स्थापना प्रातः शुभ मुहूर्त में करें: 1. पूजा स्थान के ईशान कोण में जगह साफ करें और चावल या मिट्टी की छोटी शय्या बिछाएँ। 2. कलश के गले में पवित्र धागा बाँधें और उस पर रोली से स्वस्तिक व तिलक लगाएँ। 3. कलश को स्वच्छ जल से भरें और अक्षत, एक सिक्का, सुपारी व कुछ पुष्प डालें। 4. आम के पत्ते मुख पर रखें ताकि उनके सिरे बाहर की ओर दिखें। 5. पत्तों के ऊपर वस्त्र में लिपटा नारियल रखें। 6. देवता का आह्वान करें, दीप व धूप जलाएँ, पुष्प व अक्षत अर्पित करें, और मंत्र का उच्चारण करें। नवरात्रि हेतु मिट्टी के पात्र में जौ के बीज बोएँ और नौ दिन कलश उस पर रखें।

कलश का महत्व

कलश का महत्व

कलश का हर भाग अर्थ रखता है। जल जीवन के स्रोत व ब्रह्मांडीय सागर का प्रतिनिधित्व करता है, आम के पत्ते उर्वरता व जीवन की श्वास के प्रतीक हैं, और नारियल दिव्य मस्तक व पूर्ण हुई मनोकामना का प्रतीक है। माना जाता है कि पात्र स्वयं सभी पवित्र नदियों, ग्रहों व देवताओं को धारण करता है। इस प्रकार कलश स्थापित करना संपूर्ण सृष्टि व उसके आशीर्वाद को पूजा स्थान में आकर्षित करता है, इसे दिव्य उपस्थिति का आसन बना देता है।

कलश स्थापना मंत्र

कलश स्थापित करते समय इस पारंपरिक मंत्र से दिव्य जल व देवताओं का आह्वान करें:

ॐ आपो हि ष्ठा मयो भुवः, ता न ऊर्जे दधातन।

या सरल आह्वान का उच्चारण करें:

ॐ भूर्भुवः स्वः, कलशस्य मुखे विष्णुः।

हाथ जोड़ें, शुद्धि हेतु कलश का थोड़ा जल छिड़कें, और पूजा की सफलता व परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें। पूजा या पर्व पूर्ण होने तक कलश को अविचल रखें।

नियम और बचने योग्य बातें

कलश स्थापना केवल शुभ मुहूर्त में करें और चित्रा नक्षत्र या अशुभ काल में कभी नहीं। स्वच्छ, अखंडित पात्र का उपयोग करें - कभी दरार वाला या जंग लगा नहीं। एक बार स्थापित होने पर कलश को न हिलाएँ और न ही उसके पास का दीप बुझने दें, विशेषकर नवरात्रि में। अनुष्ठान के बाद कलश का जल व अर्पण किसी स्वच्छ स्थान या पौधे में आदरपूर्वक प्रवाहित करें, और इन्हें कभी कूड़े में न फेंकें।

लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं

कलश स्थापना क्या है?+

कलश स्थापना, या घटस्थापना, पूजा या पर्व के आरंभ में पवित्र जलपात्र स्थापित करने का अनुष्ठान है। कलश ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता और देवताओं व दिव्य ऊर्जा को पूजा में आमंत्रित करता है।

कलश स्थापना के लिए कौन सी वस्तुएँ चाहिए?+

आपको तांबे, पीतल या मिट्टी का पात्र, स्वच्छ जल, आम के पत्ते, लाल वस्त्र में लिपटा नारियल, पवित्र धागा, रोली, कुमकुम, अक्षत, सिक्के व पुष्प चाहिए। नवरात्रि हेतु मिट्टी व जौ के बीज भी रखें।

कलश किस दिशा में रखना चाहिए?+

कलश को पूजा स्थान के ईशान कोण (ईशान्य, उत्तर-पूर्व) में रखना सर्वोत्तम है, जो दिव्य ऊर्जा का क्षेत्र है। स्थापना करते समय उपासक को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करना चाहिए।

कलश पर नारियल क्यों रखा जाता है?+

लाल वस्त्र में लिपटा नारियल दिव्य मस्तक, समृद्धि व पूर्ण हुई मनोकामना का प्रतीक है। कलश के ऊपर आम के पत्तों पर रखा यह पात्र में दिव्य उपस्थिति के प्रतीक को पूर्ण करता है।

क्या नवरात्रि में कलश हिलाया जा सकता है?+

नहीं। एक बार स्थापित होने पर कलश नवरात्रि के नौ दिन अविचल रहना चाहिए, और उसके पास का दीप आदर्श रूप से जलता रखा जाता है। पर्व पूर्ण होने के बाद ही इसे आदरपूर्वक प्रवाहित किया जाता है।

कलश स्थापना का मंत्र क्या है?+

एक पारंपरिक मंत्र है 'ॐ आपो हि ष्ठा मयो भुवः, ता न ऊर्जे दधातन', जो पवित्र जल का आह्वान करता है। एक सरल विकल्प है 'ॐ भूर्भुवः स्वः, कलशस्य मुखे विष्णुः'।

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About the author

Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies

Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.

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