← सभी ब्लॉगRead in English10 मिनट पढ़ें
शारदीय नवरात्रि 2026: 9 दिन के रंग, पूजा विधि, व्रत नियम व कन्या पूजन गाइड
Festivals

शारदीय नवरात्रि 2026: 9 दिन के रंग, पूजा विधि, व्रत नियम व कन्या पूजन गाइड

10 मिनट पढ़ेंअद्यतन फ़रवरी 20, 2026
MT

By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Dr. Suresh Iyer · Vastu Shastra & Jyotish, 18+ years

क्यों शारदीय नवरात्रि सबसे शक्तिशाली शक्ति पर्व है

Goddess Durga slaying Mahishasura - Sharad Navratri imagery
Durga defeated Mahishasur over 9 days and nights - the origin of Navratri.

हिंदू वर्ष में चार नवरात्रि होती हैं। सर्वाधिक महत्वपूर्ण - शारदीय नवरात्रि - अक्टूबर-नवंबर में, जब चंद्र बढ़ता, रातें शीतल, व पृथ्वी स्वयं शक्ति की ऊर्जा ग्रहण करने योग्य होती है।

उद्गम कथा: महिषासुर नामक दैत्य को वरदान मिला - कोई पुरुष या देव उसे न मार सके। अहंकार में उसने तीनों लोक जीत लिए व इंद्र को निष्कासित किया। देवों ने शक्ति मिलाकर दुर्गा को रचा - वह अग्नि से प्रकट हुईं, सिंहारूढ़, दस भुजाओं में शिव का त्रिशूल, विष्णु का चक्र, इंद्र का वज्र, हर देव का अस्त्र लिए। नौ दिन-नौ रातें उन्होंने महिषासुर से युद्ध किया। दसवें दिन - विजयादशमी (दशहरा) - उसका वध किया।

वही नौ-रात्रि युद्ध हर हिंदू भक्त नवरात्रि के रूप में स्मरण करता है। हर नौ रातों में दुर्गा ने महिषासुर की भिन्न मायाओं से लड़ने हेतु भिन्न रूप धारण किए। ये हैं नव दुर्गा - नौ विशिष्ट दिनों पर पूजित नौ रूप।

शारदीय नवरात्रि 2026 रविवार, 11 अक्टूबर 2026 (घटस्थापना) से आरंभ, सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को दुर्गा विसर्जन / विजयादशमी 20 अक्टूबर।

  • प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 11 अक्टूबर 2026, सुबह 6:49
  • प्रतिपदा तिथि समाप्त: 12 अक्टूबर 2026, सुबह 4:52
  • घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 6:18 – 7:50 (11 अक्टूबर)
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 – दोपहर 12:29 (भी मान्य)
  • कन्या पूजन: अष्टमी (18 अक्टूबर) या नवमी (19 अक्टूबर)
  • विजयादशमी: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

इस लेख में: दिनवार रंग व दुर्गा रूप, घटस्थापना विधि, व्रत नियम, अष्टमी-नवमी कन्या पूजन, व दशहरा।

🙏 वंदना ऐप में 9-दिन का मंत्र रिमाइंडर सेट करें - सर्वाधिक कृपा हेतु सूर्योदय पर हर दिन का दुर्गा मंत्र जपें।

शारदीय नवरात्रि 2026 के 9 दिन - रंग, दुर्गा रूप व मंत्र

हर दिन का विशिष्ट रंग + दुर्गा रूप + भोग + मंत्र। सूर्योदय से उस दिन का रंग पहनें।

दिवस 1 | 11 अक्टूबर (रवि) - शैलपुत्री | रंग: श्वेत | भोग: शुद्ध घी पर्वतराज पुत्री। दुर्गा का पहला रूप, शक्ति का प्रतीक। मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः गौ घी अर्पित; स्वास्थ्य हेतु ब्राह्मण को दान।

दिवस 2 | 12 अक्टूबर (सोम) - ब्रह्मचारिणी | रंग: लाल | भोग: शक्कर तपस्विनी रूप। आत्मानुशासन व तपस्या हेतु। मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः मिश्री अर्पित; पारिवारिक सौहार्द हेतु शक्कर दान।

दिवस 3 | 13 अक्टूबर (मंगल) - चन्द्रघण्टा | रंग: रॉयल ब्लू | भोग: खीर माथे पर घंटा। शत्रु व बुराई से रक्षा। मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः दूध की खीर अर्पित; साहस व रक्षा की प्रार्थना।

दिवस 4 | 14 अक्टूबर (बुध) - कूष्माण्डा | रंग: पीला | भोग: मालपुआ मुस्कान से ब्रह्मांड रचयित्री। स्वास्थ्य हेतु। मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः मालपुआ अर्पित; आंतरिक उपचार हेतु कुम्हड़ा दान।

दिवस 5 | 15 अक्टूबर (गुरु) - स्कन्दमाता | रंग: हरा | भोग: केला स्कन्द (कार्तिकेय) की माँ। संतान आशीर्वाद हेतु। मंत्र: ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः केला अर्पित; निःसंतान दंपत्ति आज 108 जप करें।

दिवस 6 | 16 अक्टूबर (शुक्र) - कात्यायनी | रंग: स्लेटी | भोग: शहद कात्यायन ऋषि पुत्री। उत्तम पति प्राप्ति हेतु। मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः अविवाहित कन्याएँ विवाह हेतु आज पूजा अवश्य करें।

दिवस 7 | 17 अक्टूबर (शनि) - कालरात्रि | रंग: नारंगी | भोग: गुड़ श्याम वर्ण उग्र रूप। सभी भय व नकारात्मक शक्तियाँ नाश। मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः गुड़ अर्पित; काले जादू नाश हेतु विशेष।

दिवस 8 | 18 अक्टूबर (रवि) - महागौरी | रंग: मयूर हरा | भोग: नारियल चमेली सी गौर, पवित्र व शांत। सभी पाप धो देती हैं। मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः अष्टमी - अनेक घरों में आज कन्या पूजन।

दिवस 9 | 19 अक्टूबर (सोम) - सिद्धिदात्री | रंग: गुलाबी | भोग: तिल लड्डू 8 सिद्धि व 9 निधि प्रदायिनी। आध्यात्मिक सिद्धि हेतु। मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः नवमी - अधिकांश घरों में कन्या पूजन। व्रत समाप्ति।

दिवस 10 | 20 अक्टूबर (मंगल) - विजयादशमी (दशहरा) दुर्गा व राम की विजय उत्सव। रावण दहन। शस्त्र पूजा व वाहन पूजा। शमी वृक्ष के दर्शन।

घटस्थापना विधि + 9-दिन व्रत नियम + कन्या पूजन

घटस्थापना (दिवस 1 प्रातः) - पवित्र कलश स्थापना: घर का उत्तर-पूर्व कोना साफ करें। चौकी पर लाल वस्त्र। छोटा मिट्टी का पात्र मिट्टी भरकर। 7 प्रकार के साबुत अनाज (जौ, गेहूँ, चना, मूँग, उड़द, मसूर, चावल) बोएँ व जल छिड़कें - ये जवारे (पवित्र अंकुर)।

साथ पीतल/ताँबे का कलश, गंगाजल मिले जल सहित। कलश की गर्दन पर लाल मौली। अंदर सिक्का, सुपारी, लौंग। मुख पर 5 आम्रपत्र। ऊपर लाल वस्त्र में लपेटा नारियल।

पीछे दुर्गा चित्र/मूर्ति स्थापित। अखंड दीप (निरंतर तेल दीया) जलाएँ - 9 दिन बिना बुझे जलना चाहिए। जपें: 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥'

प्रतिदिन 108 जप। जवारे पात्र को दिन में दो बार जल, अष्टमी/नवमी को वे अंकुर प्रसाद रूप में बाँटें।

9-दिन व्रत नियम:

  • 9 दिन प्याज, लहसुन, माँसाहार, मदिरा नहीं (व्रत न रखें तब भी)
  • व्रती दिन में एक बार - फलाहारी भोजन (फल, आलू, कुट्टू, सिंघाड़ा, सेंधा नमक)
  • सूर्योदय पूर्व जागें, स्नान, फिर पूजा व मंत्र
  • बाल, नाखून, दाढ़ी न काटें
  • सहवास नहीं
  • पलंग पर न सोएँ - कई व्रती फर्श पर चटाई पर सोते हैं
  • उस दिन का रंग पहनें
  • दुर्गा सप्तशती पाठ (कम से कम 1 अध्याय प्रतिदिन)

कन्या पूजन (अष्टमी/नवमी): नवरात्रि का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अनुष्ठान। 9 नौ दुर्गाओं का प्रतिनिधित्व करती 9 छोटी कन्याओं (आयु 2-10) + एक बालक (लंगूरा - भैरव प्रतीक) को आमंत्रित करें।

चरण जल से धोएँ। कुमकुम तिलक। कलाई पर लाल मौली। नए वस्त्र, लाल चुन्नी, व छोटे उपहार (नकद/खिलौने)।

पारंपरिक भोजन परोसें: पूरी + चना सब्जी + सूजी हलवा। यह दुर्गा प्रिय है। भोजन के बाद वे आपके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद देती हैं।

विश्वास: नवरात्रि में दुर्गा से जो माँगा, वह उचित कन्या पूजन के बाद ही सत्य होता है। इसे छोड़ना 9-दिन व्रत अपूर्ण बनाता है।

दशहरा (विजयादशमी): शस्त्र पूजा - लैपटॉप, कार, वाद्य, पुस्तकें। शमी वृक्ष दर्शन, पत्ता तोड़ दशहरा बधाई रूप में आदान-प्रदान। प्रतीकात्मक रावण दहन। नई दिशा में वाहन चलाएँ (दिशा विजय)।

दुर्गाष्टमी व महानवमी: शारद नवरात्रि के 2 सबसे शक्तिशाली दिन

यदि आप केवल दो नवरात्रि दिन मना सकते हैं, तो अष्टमी और नवमी चुनें। आठवाँ और नौवाँ दिन 9-दिन के शक्ति महोत्सव का चरमोत्कर्ष है।

दुर्गाष्टमी 2026 - 29 सितंबर 2026: अष्टमी दुर्गा का दिन है। देवी भागवत के अनुसार देवी ने 8वें दिन राक्षस सेना को काली रूप में नष्ट किया। इसीलिए अष्टमी दुर्गा हवन, कन्या पूजन और दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए सर्वाधिक शुभ है।

अष्टमी विशेष पूजा: 1. ब्रह्म मुहूर्त में उठें 2. देवी को लाल वस्त्र, 8 लाल फूल, 8 पान पत्ते, 8 सुपारी 3. देवी कवच पाठ (दुर्गा सप्तशती से) 4. दुर्गा हवन - अष्टमी पर अग्नि अर्पण अन्य दिनों से 100 गुना अधिक शक्तिशाली 5. कन्या पूजन: 9 कन्याएँ (2-10 वर्ष) आमंत्रित करें। पाँव धोएँ, कुमकुम-सिंदूर, नवरात्रि प्रसाद (हलवा-पूरी-चना)। प्रत्येक कन्या एक देवी रूप है।

महानवमी 2026 - 30 सितंबर 2026: नवमी सिद्धिदात्री का दिन। नवमी पर सभी साधनाएँ 10 गुना अधिक प्रभावी।

नवमी विशेष साधना: 1. दुर्गा सप्तशती (700 श्लोक, या कम से कम अर्गला स्तोत्र) 2. काले तिल, सरसों तेल, लाल फूलों से चामुंडा हवन 3. अंतिम भव्य कन्या पूजन 4. देवी को 108 लाल गुड़हल फूल 5. नवमी रात या दशमी प्रातः कलश विसर्जन

विजयादशमी 2026 - 2 अक्टूबर: देवी की विजय पूर्ण। दशहरा - राम की रावण पर विजय (रामायण) + देवी की महिषासुर पर विजय - बुराई पर अच्छाई।

वंदना ऐप का नवरात्रि 9-दिन ट्रैकर प्रत्येक दिन अलग मंत्र और पूजा गाइड भेजता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कठोर 9-दिन नियमों के बिना नवरात्रि व्रत रख सकते हैं?+

हाँ। पारंपरिक विकल्प: (a) 2-दिन व्रत - केवल पहला व अंतिम (प्रतिपदा व नवमी); (b) 3-दिन व्रत - पहले 3 दिन; (c) एकांतर दिन व्रत; (d) 9 दिन केवल एक बार फलाहारी भोजन। हर रूप मान्य। शास्त्र कहता है दिनों की संख्या से श्रद्धा अधिक। अष्टमी या नवमी कन्या पूजन वह एक अनिवार्य अनुष्ठान है - व्रत न रख सकें तब भी यह करें।

अष्टमी या नवमी - कौन सा कन्या पूजन अधिक महत्वपूर्ण?+

दोनों मान्य - चयन पारिवारिक परंपरा का है। उत्तर भारत सामान्यतः अष्टमी (महागौरी) पसंद करता है। महाराष्ट्र, बंगाल व दक्षिण नवमी (सिद्धिदात्री)। दुर्गा सप्तशती दोनों को समान शुभ बताता है। अपनी पारिवारिक परंपरा से चुनें। कुछ श्रद्धालु घर दोनों दिन करते हैं - अष्टमी विवाह/करियर इच्छा हेतु, नवमी सिद्धि/मोक्ष हेतु।

यदि कन्या पूजन हेतु 9 छोटी कन्याएँ न मिलें तो?+

न्यूनतम आवश्यकता 2 कन्याएँ (आपात स्थिति में 1 भी स्वीकार्य)। शहरों के अपार्टमेंट में अक्सर कठिन। कम कन्याओं को बुला सकते हैं, या समीप मंदिर/अनाथालय जाकर कन्या पूजन के रूप में वहाँ की कन्याओं को भोजन कराएँ। कई सोसाइटियाँ सामूहिक कन्या पूजन आयोजित करती हैं - उसमें योगदान दें। अष्टमी/नवमी पर वंचित कन्याओं को भोजन + वस्त्र + धन दान उतना ही पुण्य देता है।

MT

About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

Meet the Vandnaa editorial team →

Listen all aartis, mantras & bhajans in one place.

Download Vandnaa App.

Download Now

Explore on Vandnaa

संबंधित लेख