काली अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
अष्टोत्तर शतनामावली 'एक सौ आठ नामों की माला' है (अष्टोत्तर शत = 108)। काली अष्टोत्तर शतनामावली देवी काली के 108 पवित्र नामों की लड़ी है, जो एक के बाद एक पढ़े जाते हैं, प्रत्येक सामान्यतः ॐ से आरंभ और नमः ('नमस्कार') से समाप्त होता है।
काली दिव्य माता का उग्र फिर भी गहन करुणामयी स्वरूप हैं। रात्रि के आकाश सी श्याम, मुंडमाला धारण किए और शिव पर खड़ी, वे काल, अहंकार और अज्ञान की संहारक तथा निर्भयता व मुक्ति की दात्री हैं। उनके अनेक नाम उनकी शक्ति, स्वरूप, ब्रह्मांडीय भूमिका और असीम कृपा का वर्णन करते हैं। सभी 108 का जप शक्ति के प्रति पूर्ण भक्ति का कार्य है।
108 नामों में से एक चयन
पूर्ण माला में 108 नाम हैं। नीचे इन नामों में से लगभग पच्चीस का एक प्रतिनिधि चयन है, लिप्यंतरण और अर्थ सहित, ताकि सम्पूर्ण का भाव मिले:
1. ॐ कालिकायै नमः - काली देवी 2. ॐ कालरात्र्यै नमः - प्रलय की काली रात्रि 3. ॐ कङ्कालिन्यै नमः - अस्थिमाला धारिणी 4. ॐ कमलायै नमः - कमल समान शुभ देवी 5. ॐ कलिदर्पघ्न्यै नमः - कलियुग के अहंकार की नाशिनी 6. ॐ कपालिन्यै नमः - कपाल धारिणी 7. ॐ कमलाक्षिण्यै नमः - कमल नयनी 8. ॐ कारुण्यर्द्रायै नमः - करुणा से आर्द्र 9. ॐ कलावत्यै नमः - कलाओं से पूर्ण 10. ॐ कमलासनवासिन्यै नमः - कमलासन पर विराजमान 11. ॐ चामुण्डायै नमः - चंड और मुंड की संहारिका 12. ॐ चण्डिकायै नमः - उग्र देवी 13. ॐ जगन्मात्रे नमः - जगत की माता 14. ॐ भद्रकाल्यै नमः - शुभ काली 15. ॐ भयानकायै नमः - बुराई के लिए भयंकर 16. ॐ दक्षिणायै नमः - दक्षिणा काली, कृपामयी 17. ॐ शिवायै नमः - शुभा, शिव की संगिनी 18. ॐ शिवप्रियायै नमः - शिव की प्रिया 19. ॐ महामायायै नमः - महान ब्रह्मांडीय माया 20. ॐ मुक्तकेश्यै नमः - खुले केशों वाली 21. ॐ घोररूपायै नमः - विकराल स्वरूप वाली 22. ॐ करालिकायै नमः - भयंकर रूपा 23. ॐ विद्यायै नमः - स्वयं पवित्र विद्या 24. ॐ ब्रह्मविद्यायै नमः - ब्रह्म की विद्या 25. ॐ अभयायै नमः - निर्भयता की दात्री
ये पूर्ण 108 का केवल एक भाग हैं। साथ में, सम्पूर्ण नामावली देवी को बुराई की उग्र संहारक और ज्ञान व मुक्ति देने वाली प्रेममयी माता दोनों रूप में चित्रित करती है।
108 नामों के जप के लाभ
काली अष्टोत्तर का पाठ एक प्रिय शक्ति साधना है:
- निर्भयता: काली अभय (निर्भयता) की दात्री हैं; उनके नाम कठिनाइयों, शत्रुओं और मृत्यु तक का भय घोलते हैं।
- नकारात्मकता का नाश: उनके अनेक रूपों का आह्वान नकारात्मक ऊर्जा, बुरे प्रभावों और आंतरिक अंधकार को भस्म करता है, ऐसा माना जाता है।
- अहंकार और अज्ञान का नाश: काल (समय) और अहंकार की संहारक रूप में, काली आत्मज्ञान का मार्ग साफ करती हैं।
- रक्षा: भक्त स्वयं और परिवार पर उनकी उग्र, मातृवत रक्षा चाहते हैं।
- मुक्ति (मोक्ष): तंत्र और वेदांत दोनों में काली मुक्ति की दात्री रूप में पूजी जाती हैं।
- आंतरिक शक्ति और शांति: यह नामावली मन को स्थिर करती और दिव्य माता के प्रति भक्ति जगाती है।
काली की उग्रता कभी क्रूरता नहीं - यह माँ का उग्र प्रेम है जो आत्मा और स्वतंत्रता के बीच जो कुछ भी खड़ा हो उसे नष्ट कर देता है।
नामावली का जप कैसे करें

1. उत्तम समय: प्रातः या रात्रि, विशेषकर मंगलवार, शुक्रवार, अमावस्या, और नवरात्रि तथा काली पूजा में। 2. तैयारी: माँ काली के चित्र के समक्ष स्वच्छ आसन पर बैठें, दीप (तेल या घी) जलाएँ और लाल पुष्प, विशेषकर गुड़हल, अर्पित करें जो उन्हें प्रिय है। 3. आरंभ: देवी और अपने गुरु को प्रणाम करें, फिर 'ॐ' और नामों को एक-एक कर जपें, प्रत्येक 'नमः' से समाप्त। 4. माला: बहुत लोग पूरे 108 नामों को 108 की गिनती रूप में पढ़ते हैं, जो माला के एक चक्र के लिए स्वाभाविक रूप से उपयुक्त है। 5. श्रद्धा: काली की उपासना सच्चाई, पवित्रता और विनम्रता माँगती है। शांत, भक्तिपूर्ण हृदय से, निर्भय होकर जपें, यह जानते हुए कि उनकी उग्रता माँ का प्रेम है। 6. समापन: देवी की आरती, निर्भयता और कृपा की प्रार्थना से समापन करें, और प्रसाद अर्पित करें। यदि सभी 108 न आते हों, तो जो नाम आते हैं उन्हें भक्ति से पढ़ें और शेष धीरे-धीरे सीखें।
लोग सबसे ज़्यादा क्या पूछते हैं
काली अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?+
यह देवी काली के 108 पवित्र नामों की लड़ी है, जो एक के बाद एक पढ़े जाते हैं, प्रत्येक सामान्यतः 'ॐ' से आरंभ और 'नमः' से समाप्त होता है। इसका जप दिव्य माता के प्रति पूर्ण भक्ति का कार्य है।
काली के इतने नाम क्यों हैं?+
प्रत्येक नाम देवी के एक भिन्न पक्ष का वर्णन करता है - उनकी शक्ति, स्वरूप, ब्रह्मांडीय भूमिका और कृपा। साथ में 108 नाम व्यक्त करते हैं कि वे बुराई की उग्र संहारक और ज्ञान व मुक्ति देने वाली प्रेममयी माता दोनों हैं।
क्या यहाँ सभी 108 नाम सूचीबद्ध हैं?+
नहीं। यहाँ दिखाए नाम पूर्ण काली अष्टोत्तर शतनामावली में से लगभग पच्चीस का एक प्रतिनिधि चयन हैं, जो इसके भाव को व्यक्त करने हेतु दिए गए हैं। सम्पूर्ण माला में सभी 108 नाम हैं।
क्या साधारण भक्तों के लिए काली की उपासना सुरक्षित है?+
हाँ। यद्यपि काली उग्र दिखती हैं, वे गहन प्रेममयी माता हैं। उनकी उपासना सच्चाई, पवित्रता और विनम्रता से, शांत निर्भय हृदय से करें। उनकी उग्रता केवल अहंकार और नकारात्मकता का नाश करती है, अपने भक्तों का कभी नहीं।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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