खाटू श्याम जी कौन हैं
खाटू श्याम जी बर्बरीक का पूजित रूप हैं, महाभारत में भीम के पराक्रमी पौत्र, जिनके पास तीन अमोघ बाण और अद्वितीय वीरता थी। महायुद्ध से पहले उन्होंने हारती पक्ष की ओर से लड़ने की प्रतिज्ञा की थी, जिससे युद्ध का परिणाम तय करना असंभव हो जाता। धर्म की रक्षा हेतु भगवान कृष्ण ने उनसे उनका शीश दान में माँगा, और बर्बरीक ने प्रसन्नता से दे दिया। उनके अनुपम बलिदान व भक्ति से प्रसन्न होकर कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे कृष्ण के ही नाम श्याम से पूजे जाएँगे, और अपने हर पुकारने वाले के उद्धारक होंगे।
महत्व - हारे का सहारा
खाटू श्याम जी को प्रेम से 'हारे का सहारा' कहा जाता है - जो जीवन में हार चुके या पराजित हैं उनका सहारा। खाटू गाँव, सीकर (राजस्थान) के प्रसिद्ध मंदिर में पूजित उनका शीश, असहायों व टूटे हृदय वालों की सच्ची प्रार्थनाएँ पूरी करता माना जाता है। भक्त उन्हें श्याम बाबा, तीन बाण धारी और लीला के अस्वार जैसे अनेक प्रेम-नामों से पुकारते हैं। उनकी उपासना सिखाती है कि सच्चे हृदय से शरण आने वाला कोई भक्त, चाहे कितना भी गिर चुका हो, कभी लौटाया नहीं जाता।
खाटू श्याम जी आरती
श्याम बाबा की लोकप्रिय आरती मंदिर में और घरों में बड़े प्रेम से गाई जाती है:
ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। निज भक्तों के तुमने, पूरे काज करे।
तीन बाण का तरकश, कर में लिये श्याम। खाटू नगरी में राजे, श्याम तेरा धाम।
छंद बाबा को तीन बाण धारी रूप में महिमामंडित करते हैं जो अपने भक्तों के सभी कार्य पूरे करते और खाटू में अपने धाम में विराजते हैं। भक्त 'श्याम तेरी बंसी पुकारे राधा नाम' जैसे अनगिनत भजन भी गाते हैं।
खाटू श्याम मंत्र

श्याम बाबा का आह्वान करने का मुख्य मंत्र है:
ॐ श्याम देवाय नमः
एक और प्रिय मंत्र है:
ॐ श्री श्याम देवाय नमः, श्याम शरणं ममः।
भक्त सरल जयकारा 'हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा' और पुकार 'जय श्री श्याम' भी लगाते हैं। उनका नाम प्रेम से दोहराना ही कलियुग में उनकी कृपा का सबसे सरल मार्ग माना जाता है।
फाल्गुन मेला और उपासना के दिन
खाटू श्याम जी का सबसे भव्य उत्सव फाल्गुन मेला है, जो फाल्गुन शुक्ल एकादशी से द्वादशी (फरवरी-मार्च) के आसपास कई दिनों तक चलता है, जब लाखों भक्त निशान (ध्वज) लेकर पैदल खाटू जाते हैं। एकादशी विशेष पवित्र है क्योंकि इसी दिन बर्बरीक का शीश प्रकट हुआ कहा जाता है। हर मास की एकादशी और शुक्ल पक्ष उनकी उपासना के लिए प्रिय हैं, और कई भक्त मनोकामना पूरी होने पर खाटू जाने का व्रत रखते हैं। फाग शैली के भजन और निशान यात्रा मार्ग को भक्ति से भर देते हैं।
खाटू श्याम पूजा विधि
श्याम बाबा की उपासना सरल और प्रेम से भरी है: 1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, विशेषकर एकादशी या शुक्ल पक्ष में। 2. खाटू श्याम जी का चित्र रखें, माला चढ़ाएँ और चंदन व तिलक लगाएँ। 3. घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ; इत्र, मोरपंख, खीर या चूरमा और मौसमी फल अर्पित करें। 4. 'ॐ श्याम देवाय नमः' का 108 बार जाप करें और श्याम आरती या कुछ भजन पढ़ें। 5. भोग अर्पित करें और फिर उपस्थित सभी को प्रसाद बाँटें। 6. विनम्र हृदय से प्रार्थना करें, विशेषकर हार महसूस करने पर, क्योंकि बाबा असहायों के सहारा हैं। मनोकामना पूरी होने पर कई भक्त खाटू में निशान (ध्वज) चढ़ाते हैं।
खाटू श्याम उपासना के लाभ

भक्त खाटू श्याम जी की उपासना असफलता के समय आशा व सहारे, चिंता व बाधाओं से राहत, रुके कार्यों में सफलता, और हृदय की कामनाओं की पूर्ति के लिए करते हैं। उनकी कृपा टूटे या पराजित अनुभव करने वालों को उठाती और उनका साहस व विश्वास लौटाती मानी जाती है। सबसे बढ़कर, उनके परम बलिदान की कथा निस्वार्थता, वचन का पालन और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण सिखाती है।
त्वरित उत्तर
खाटू श्याम जी कौन हैं?+
खाटू श्याम जी बर्बरीक का पूजित रूप हैं, भीम के पौत्र, जिन्होंने महाभारत युद्ध से पहले अपना शीश दान किया। भगवान कृष्ण ने उन्हें कलियुग में कृष्ण के ही नाम श्याम से पूजे जाने का वरदान दिया।
खाटू श्याम मंत्र क्या है?+
मुख्य मंत्र 'ॐ श्याम देवाय नमः' है। भक्त प्रेम व श्रद्धा से 'जय श्री श्याम' और जयकारा 'हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा' भी लगाते हैं।
खाटू श्याम को हारे का सहारा क्यों कहते हैं?+
कृष्ण ने बर्बरीक को वरदान दिया कि वे जीवन में हारने या पराजित होने वालों का सहारा बनेंगे। इसलिए खाटू श्याम जी को प्रेम से 'हारे का सहारा' कहते हैं, जो सच्चे हृदय से शरण आने वाले किसी को नहीं लौटाते।
खाटू श्याम फाल्गुन मेला कब है?+
फाल्गुन मेला फाल्गुन शुक्ल एकादशी से द्वादशी (फरवरी-मार्च) के आसपास कई दिन चलता है, जब लाखों भक्त निशान ध्वज लेकर सीकर, राजस्थान के खाटू जाते हैं।
खाटू श्याम जी को कौन सा भोग अर्पित करते हैं?+
चूरमा, खीर, मौसमी फल और मिठाई अर्पित किए जाते हैं, साथ ही श्याम बाबा को प्रिय इत्र और मोरपंख भी। फिर प्रसाद सभी भक्तों में बाँटा जाता है।
क्या खाटू श्याम जी भगवान कृष्ण से संबंधित हैं?+
हाँ। बर्बरीक को भगवान कृष्ण ने कृष्ण के ही नाम श्याम से पूजे जाने का वरदान दिया। इसलिए खाटू श्याम उपासना कृष्ण भक्ति का ही एक रूप है, जो परम बलिदान व समर्पण का सम्मान करती है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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