नवरात्रि की नौ रंगों की परंपरा
शारदीय नवरात्रि के दौरान देश भर में लाखों महिलाएं नौ दिनों में हर दिन एक विशेष रंग पहनती हैं - नवदुर्गा के हर स्वरूप के लिए एक रंग। यह परंपरा महाराष्ट्र और गुजरात में सबसे प्रबल है, जहां दिन का रंग लोकल ट्रेनों, दफ्तरों और गरबा पंडालों को एक ही रंग के समुद्र में बदल देता है। दशकों पहले मुंबई के अखबारों में छपने वाली रंगों की सूची से शुरू हुई यह परंपरा आज पूरे भारत की भक्ति-परंपरा बन गई है। दिन का रंग पहनना देवी को पूरे दिन याद रखने का सरल और आनंदमय तरीका है - रसोई में, सफर में या काम पर। यही दैनिक जीवन में बुनी हुई भक्ति है। इस लेख में जानिए रंग कैसे तय होते हैं, हर रंग का अर्थ, और हर दिन का भोग व मंत्र।
हर दिन का रंग कैसे तय होता है
बहुत से लोग मानते हैं कि नौ रंग हर साल एक जैसे होते हैं, लेकिन वास्तव में ये नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है, उसी के अनुसार बदलते हैं। महाराष्ट्र में प्रचलित प्रणाली में हर वार का एक पारंपरिक रंग है। पहले दिन (प्रतिपदा) का रंग उस दिन के वार का रंग होता है, और बाकी दिन क्रम से वार के रंगों का पालन करते हैं। अंतिम दो दिन बैंगनी और मोरपंखी हरे रंग से पूरे होते हैं। इसलिए 2026 की सूची पूरी तरह इस पर निर्भर है कि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा किस वार को पड़ती है - शारदीय नवरात्रि 2026 सितंबर-अक्टूबर के आसपास आएगी, और नौ परिधानों की योजना बनाने से पहले वंदना पंचांग पर सटीक प्रारंभ तिथि अवश्य देखें। पहला वार पता चलते ही नीचे दिए मानचित्र से पूरी सूची अपने आप बन जाती है।
वार से रंग का मानचित्र
हर वर्ष नवरात्रि की रंग-सूची बनाने के लिए यह पारंपरिक वार-रंग मानचित्र उपयोग होता है: 1. रविवार - नारंगी - सूर्य की ऊर्जा और उष्णता 2. सोमवार - सफेद - चंद्रमा की शांति और पवित्रता 3. मंगलवार - लाल - शक्ति और कर्म 4. बुधवार - गहरा नीला (रॉयल ब्लू) - गहराई और दिव्य विस्तार 5. गुरुवार - पीला - शुभता और विद्या 6. शुक्रवार - हरा - समृद्धि और विकास 7. शनिवार - स्लेटी (ग्रे) - संतुलन और वैराग्य सातों वार के रंग पूरे होने के बाद आठवां और नौवां दिन बैंगनी (वैभव और महत्वाकांक्षा) तथा मोरपंखी हरे (विशिष्टता और करुणा) रंग से पूर्ण होता है। प्रतिपदा के वार से शुरू कीजिए, क्रम से आगे बढ़िए, और नवरात्रि 2026 की पूरी दिन-वार सूची आपके सामने होगी।
साड़ियां, ऑफिस समूह और नौ रंगों का उत्सव
नौ रंगों की परंपरा इसलिए सुंदर है क्योंकि यह सामूहिक है। मुंबई में महिलाएं हफ्तों पहले अपनी नौ साड़ियों की योजना बनाती हैं, और दिन का रंग लोकल ट्रेनों के महिला डिब्बों में छा जाता है। दफ्तरों में नवरात्रि समूह बनते हैं जहां सहकर्मी मिलकर परिधान तय करते हैं और हर दिन समूह-चित्र खिंचवाते हैं - यह अक्सर ऑफिस के साल के सबसे प्रतीक्षित नौ दिन होते हैं। गुजरात में ये रंग गरबा और डांडिया की रातों में घुल जाते हैं, जहां चनिया चोली भी इसी सूची का पालन करती है। सोसाइटियों में रंग-आधारित आरतियां होती हैं, और दादी, मां और बेटी अक्सर एक ही रंग में सजती हैं। यह कोई शास्त्रीय अनिवार्यता नहीं है - शास्त्र किसी रंग का आदेश नहीं देते। यह जीवंत लोक-भक्ति है: पूरे शहर के एक साथ देवी को याद करने का तरीका। किसी दिन रंग छूट जाए तो कुछ नहीं बिगड़ता; वस्त्र से अधिक भाव महत्वपूर्ण है।
नवरात्रि 2026 का दिन-वार भोग और मंत्र

दिन के रंग के साथ हर स्वरूप का पारंपरिक भोग अर्पित करें और सरल नाम मंत्र का जप करें: 1. पहला दिन - शैलपुत्री: शुद्ध घी का भोग; ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः 2. दूसरा दिन - ब्रह्मचारिणी: शक्कर या मिश्री; ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः 3. तीसरा दिन - चंद्रघंटा: दूध या खीर; ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः 4. चौथा दिन - कूष्मांडा: मालपुआ; ॐ देवी कूष्मांडायै नमः 5. पांचवां दिन - स्कंदमाता: केला; ॐ देवी स्कंदमातायै नमः 6. छठा दिन - कात्यायनी: शहद; ॐ देवी कात्यायन्यै नमः 7. सातवां दिन - कालरात्रि: गुड़; ॐ देवी कालरात्र्यै नमः 8. आठवां दिन - महागौरी: नारियल; ॐ देवी महागौर्यै नमः 9. नौवां दिन - सिद्धिदात्री: तिल और हलवा-पूरी; ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः हर मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें। हर दिन की सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।
पाठकों के प्रश्न
नवरात्रि 2026 के नौ रंग कौन से हैं?+
2026 की सूची इस पर निर्भर है कि शारदीय नवरात्रि किस वार से शुरू होती है। पहला दिन अपने वार का रंग लेता है (रविवार-नारंगी, सोमवार-सफेद, मंगलवार-लाल, बुधवार-रॉयल ब्लू, गुरुवार-पीला, शुक्रवार-हरा, शनिवार-ग्रे), अगले दिन क्रम से चलते हैं, और अंतिम दो दिन बैंगनी और मोरपंखी हरे होते हैं। सटीक सूची के लिए वंदना पंचांग पर प्रारंभ तिथि देखें।
पहले दिन का रंग कैसे तय होता है?+
प्रचलित महाराष्ट्रीयन प्रणाली में पहले दिन (प्रतिपदा) का रंग उस वार का पारंपरिक रंग होता है जिस दिन वह पड़ती है। उदाहरण के लिए, यदि नवरात्रि मंगलवार से शुरू हो तो पहला दिन लाल होगा। बाकी दिन क्रम से वार के रंगों का पालन करते हैं, और आठवें-नौवें दिन बैंगनी व मोरपंखी हरे रंग से सूची पूर्ण होती है।
क्या नवरात्रि व्रत में दिन का रंग पहनना अनिवार्य है?+
नहीं। शास्त्रों में नवरात्रि व्रत के लिए किसी रंग का विधान नहीं है। नौ रंग एक प्रिय लोक-परंपरा है जो उत्सव में सामूहिक आनंद जोड़ती है। आपका व्रत, पूजा और भक्ति किसी भी स्वच्छ वस्त्र में पूर्ण है। यदि रंग आपको दिन के भाव से जोड़ते हैं तो अवश्य पहनें, पर इनके बिना व्रत अधूरा न समझें।
किस दिन किस नवदुर्गा स्वरूप की पूजा होती है?+
पहला दिन शैलपुत्री, दूसरा ब्रह्मचारिणी, तीसरा चंद्रघंटा, चौथा कूष्मांडा, पांचवां स्कंदमाता, छठा कात्यायनी, सातवां कालरात्रि, आठवां महागौरी और नौवां सिद्धिदात्री। नवदुर्गा का यह क्रम हर वर्ष समान रहता है, चाहे किसी भी दिन कोई भी वार-रंग पड़े।
नवरात्रि में हर दिन कौन सा भोग चढ़ाएं?+
पारंपरिक दिन-वार भोग है: घी (पहला दिन), शक्कर या मिश्री (दूसरा), दूध या खीर (तीसरा), मालपुआ (चौथा), केला (पांचवां), शहद (छठा), गुड़ (सातवां), नारियल (आठवां) और तिल व हलवा-पूरी (नौवां)। दिन की आरती के बाद शुद्ध मन से अर्पित करें और प्रसाद रूप में बांटें।
शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?+
शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होती है, जो 2026 में सितंबर-अक्टूबर के आसपास पड़ेगी। चूंकि सटीक तारीख तिथि पर निर्भर करती है, इसलिए रंगों, व्रत और पूजा की योजना से पहले वंदना पंचांग पर सटीक प्रारंभ दिवस और पूरा नौ-दिवसीय कैलेंडर अवश्य देखें।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.
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