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गुड़ी पड़वा और उगादी 2027 - महत्व और पूजा विधि
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गुड़ी पड़वा और उगादी 2027 - महत्व और पूजा विधि

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
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By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years

गुड़ी पड़वा और उगादी क्या हैं

गुड़ी पड़वा मराठी और कोंकणी नववर्ष है, जबकि उगादी तेलुगु और कन्नड़ लोगों का नववर्ष है। दोनों एक ही पर्व हैं जो एक ही दिन भिन्न नामों से मनाए जाते हैं। गुड़ी महाराष्ट्रीय घरों के बाहर फहराई जाने वाली विजय-ध्वजा है, और उगादी युग + आदि से बना है, अर्थात नए युग का आरंभ। यह नई शुरुआत, समृद्धि और कृतज्ञता का दिन है।

तिथि और यह कब आती है

दोनों पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आते हैं, प्रथम चंद्र मास के शुक्ल पक्ष का पहला दिन। ग्रेगोरियन कैलेंडर में यह मार्च या अप्रैल में आता है, वसंत के आगमन का प्रतीक। पारंपरिक रूप से इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि का आरंभ किया माना जाता है। 2027 की सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें, क्योंकि तिथि का समय प्रतिवर्ष थोड़ा बदलता है।

महत्व और गुड़ी

गुड़ी एक बाँस का दंड है जिसके शीर्ष पर उल्टा चाँदी या ताँबे का कलश, चमकीला रेशमी वस्त्र, नीम व आम के पत्ते और एक माला होती है, जिसे विजय, स्वास्थ्य और समृद्धि के आह्वान हेतु द्वार पर फहराया जाता है। इसे अयोध्या लौटते भगवान राम और राजा शालिवाहन की विजय-ध्वजा का प्रतीक कहा जाता है। दक्षिण में इसी दिन से शालिवाहन शक संवत आरंभ होता है, जो इसे काल, नवीनीकरण और नए संकल्पों से गहराई से जोड़ता है।

गुड़ी पड़वा और उगादी पूजा विधि

गुड़ी पड़वा और उगादी पूजा विधि

1. प्रातः जल्दी उठें, तेल स्नान करें, और घर को रंगोली व आम के पत्तों के तोरण से स्वच्छ व सुसज्जित करें। 2. द्वार या खिड़की पर गुड़ी फहराएँ, उसका मुख बाहर रखते हुए, और हल्दी-कुमकुम, पुष्प व धूप से उसकी पूजा करें। 3. कलश स्थापित कर ब्रह्मा, विष्णु और कुलदेवता की पूजा करें, दीप जलाएँ और नैवेद्य अर्पित करें। 4. उगादी घरों में उगादी पच्चड़ी बनाएँ और बाँटें, छह स्वादों का मिश्रण जो जीवन के सुख-दुख का प्रतीक है। 5. आने वाले वर्ष हेतु नववर्ष का पंचांग श्रवण (पंचांग पठन) सुनें। 6. बड़ों का आशीर्वाद लें और कोई नया कार्य या खरीद आरंभ करें, क्योंकि यह दिन अत्यंत शुभ है।

उगादी पच्चड़ी - जीवन के छह स्वाद

उगादी पच्चड़ी छह स्वादों का मेल है जो जीवन के हर अनुभव को स्वीकारना सिखाते हैं: 1. नीम के फूल (कड़वा) दुख और कठिनाई के लिए। 2. गुड़ (मीठा) सुख के लिए। 3. कच्चा आम (खट्टा-मीठा) आश्चर्य के लिए। 4. इमली (खट्टा) अरुचि के लिए। 5. मिर्च (तीखा) क्रोध के लिए। 6. नमक भय के लिए। छहों को साथ खाना हमें संपूर्ण जीवन को संतुलन और समता से अपनाने की याद दिलाता है।

पर्व के लाभ और भाव

गुड़ी पड़वा और उगादी मनाना आने वाले वर्ष हेतु समृद्धि, स्वास्थ्य और बाधाओं पर विजय का आह्वान करता माना जाता है। यह दिन नए घर, वाहन, व्यापार और अध्ययन हेतु सबसे शुभ मुहूर्तों में एक माना जाता है। सबसे बढ़कर, यह भाव को नया करता है - स्वच्छ घर, नए संकल्प, ईश्वर के प्रति कृतज्ञता और यह मीठी-कड़वी सीख कि जीवन को संपूर्ण रूप से अपनाना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुड़ी पड़वा और उगादी 2027 कब है?+

दोनों चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आते हैं, प्रायः मार्च या अप्रैल में। 2027 की सटीक तिथि और शुभ मुहूर्त वंदना पंचांग पर अवश्य देखें।

क्या गुड़ी पड़वा और उगादी एक ही पर्व हैं?+

हाँ। दोनों चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हिंदू नववर्ष मनाते हैं। महाराष्ट्र और कोंकण इसे गुड़ी पड़वा कहते हैं, जबकि तेलुगु व कन्नड़ समुदाय इसे उगादी कहते हैं।

गुड़ी किसका प्रतीक है?+

गुड़ी विजय और समृद्धि की ध्वजा है, जो भगवान राम की अयोध्या वापसी और राजा शालिवाहन की विजय का सम्मान करती मानी जाती है। इसे सौभाग्य के आह्वान हेतु द्वार पर फहराया जाता है।

उगादी पच्चड़ी क्या है?+

उगादी पच्चड़ी छह स्वादों - नीम, गुड़, कच्चा आम, इमली, मिर्च और नमक - का विशेष व्यंजन है, जो जीवन के सुख-दुख को साथ स्वीकारने का प्रतीक है।

क्या गुड़ी पड़वा नई शुरुआत के लिए शुभ मुहूर्त है?+

हाँ। यह सबसे शुभ दिनों में एक है, घर या वाहन खरीदने, व्यापार या अध्ययन आरंभ करने और किसी भी नए कार्य को आशीर्वाद के साथ शुरू करने के लिए आदर्श।

घर पर गुड़ी पड़वा कैसे मनाएँ?+

घर को स्वच्छ कर सजाएँ, द्वार पर गुड़ी फहराएँ, उसकी व देवताओं की पूजा करें, उत्सव का भोजन बनाएँ, नववर्ष का पंचांग सुनें और बड़ों का आशीर्वाद लें।

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About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

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