पौष मास क्या है
पौष मास हिंदू चंद्र पंचांग का दसवाँ मास है और लगभग दिसंबर और जनवरी में, शीत के मध्य में पड़ता है। यह सूर्य देव की उपासना से सबसे निकटता से जुड़ा मास है, जिनकी गर्माहट व प्रकाश ठंडे व छोटे दिनों में सर्वाधिक वांछित होते हैं। पौष भले बड़े सांसारिक संस्कारों हेतु कम शुभ माना जाता है, इसे सूर्य उपासना, जप और शांत आंतरिक भक्ति का उत्तम समय माना जाता है।
पौष मास का महत्व
पौष में सूर्य क्षीण व दूर प्रतीत होते हैं, इसलिए शास्त्र भक्तों को सूर्य की उपासना हेतु प्रेरित करते हैं ताकि उनकी शक्ति, स्वास्थ्य व ओज जीवन में लौटें। यह चिंतनशील, अंतर्मुखी मास है - अनुशासन गढ़ने, मंत्र जपने और शीत भर दूसरों की सेवा का समय। मास का अंत मकर संक्रांति के निकट होता है, जब सूर्य अपनी उत्तरी यात्रा (उत्तरायण) आरंभ करते हैं, जो लंबे, उज्जवल दिनों और नवीन शुभता के लौटने का संकेत है।
पौष में विवाह क्यों टाले जाते हैं
पौष परंपरागत रूप से विवाह व अन्य बड़े शुभ संस्कारों हेतु टाला जाता है। एक कारण यह है कि ओज व अधिकार के कारक सूर्य इस मास में क्षीण माने जाते हैं। दूसरा यह कि यह काल अक्सर खरमास / धनुर्मास से मिलता है, जब सूर्य धनु राशि में गोचर करते हैं और बड़े उत्सव रुक जाते हैं। भक्त इस शांत समय को सांसारिक उत्सवों की बजाय उपासना, आत्म-अनुशासन व दान में लगाते हैं, और मकर संक्रांति के बाद उत्सव पुनः आरंभ करते हैं।
सूर्य पूजा और अर्घ्य

पौष का केंद्रीय अभ्यास दैनिक सूर्य अर्घ्य है: 1. प्रातः जल्दी उठें, स्नान करें, और पूर्व में उगते सूर्य की ओर मुख करें। 2. ताँबे के पात्र में स्वच्छ जल भरें, थोड़ा रोली (लाल सिंदूर), लाल पुष्प व अक्षत (चावल) मिलाएँ। 3. जल को धीरे-धीरे अर्घ्य रूप में अर्पित करें ताकि सूर्य की किरणें गिरती धारा से होकर निकलें, सूर्य का नाम जपते हुए। 4. इसे विशेषकर रविवार को, सूर्य के दिन, और आदर्श रूप से मास के हर प्रातः अर्पित करें। 5. स्वास्थ्य, ऊर्जा व उद्देश्य की स्पष्टता हेतु एक छोटी प्रार्थना से समापन करें।
पौष हेतु सूर्य मंत्र
पौष में सूर्य देव के शक्तिशाली जप में सम्मिलित हैं:
ॐ सूर्याय नमः - सूर्य को सरल नमन, अर्घ्य अर्पित करते हुए जपा जाता है।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः - ऊर्जा व ओज हेतु एक पूर्ण बीज मंत्र।
सावित्र के सौर प्रकाश को संबोधित गायत्री मंत्र भी इस मास में आदर्श है। इनमें से किसी का सूर्योदय पर 108 बार जप भक्त को स्वास्थ्य, आत्मविश्वास व स्थिर इच्छाशक्ति का आशीर्वाद देता माना जाता है।
पौष नियम - करें और न करें
करें: प्रत्येक प्रातः सूर्य अर्घ्य दें, सूर्य या गायत्री मंत्र जपें, गर्म सात्विक भोजन करें, जरूरतमंदों को गर्म वस्त्र, कंबल, तिल व भोजन दान करें, और शांत, अनुशासित दिनचर्या रखें।
न करें: पौष व खरमास में विवाह या बड़े उत्सव न करें, और क्रोध, आलस्य व तामसिक भोजन से बचें। मास को आंतरिक तैयारी का समय मानें, ताकि मकर संक्रांति के बाद के उज्जवल दिनों का स्वागत स्थिर, भक्तिपूर्ण मन से हो।
पौष उपासना के लाभ

पौष भर सूर्य की उपासना अच्छा स्वास्थ्य, ओज, आत्मविश्वास और शीत से जुड़े आलस्य व रोग से मुक्ति देती मानी जाती है। प्रातः जागरण, अर्घ्य व दान का अनुशासन आंतरिक शक्ति व कृतज्ञता गढ़ता, जबकि नियमित मंत्र जप मन को स्थिर करता है। भक्त पौष से नवीन ऊर्जा व श्रद्धा के साथ मकर संक्रांति के शुभ उत्तरायण सूर्य का स्वागत करने को तैयार निकलते हैं।
पाठकों के प्रश्न
पौष मास किन महीनों में पड़ता है?+
पौष दसवाँ हिंदू चंद्र मास है और लगभग दिसंबर और जनवरी में, शीत के मध्य में पड़ता है। सटीक तिथियाँ हर वर्ष बदलती हैं, इसलिए इन्हें वर्तमान पंचांग से पुष्टि करें।
पौष मास में किस देव की पूजा होती है?+
पौष सूर्य देव की उपासना से सबसे निकटता से जुड़ा है। ठंडी शीत में भक्त अर्घ्य अर्पित कर और सूर्य मंत्र जपकर उनकी गर्माहट, शक्ति, स्वास्थ्य व ओज को जीवन में लौटने हेतु आमंत्रित करते हैं।
पौष मास में विवाह क्यों टाले जाते हैं?+
ओज के कारक सूर्य पौष में क्षीण माने जाते हैं, और यह मास अक्सर खरमास या धनुर्मास से मिलता है जब बड़े उत्सव रुक जाते हैं। इसलिए विवाह व बड़े संस्कार सामान्यतः मकर संक्रांति के बाद तक टाल दिए जाते हैं।
पौष में सूर्य अर्घ्य कैसे दिया जाता है?+
प्रातः स्नान के बाद, ताँबे के पात्र में रोली, लाल पुष्प व चावल मिले स्वच्छ जल के साथ उगते सूर्य की ओर मुख करें, और 'ॐ सूर्याय नमः' जपते हुए इसे धीरे-धीरे अर्पित करें ताकि किरणें धारा से होकर निकलें।
पौष में कौन से मंत्र जपना सर्वोत्तम है?+
'ॐ सूर्याय नमः', पूर्ण बीज मंत्र 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः', और गायत्री मंत्र आदर्श हैं। इनमें से किसी का सूर्योदय पर 108 बार जप स्वास्थ्य, आत्मविश्वास व इच्छाशक्ति का आशीर्वाद देता माना जाता है।
पौष उपासना के क्या लाभ हैं?+
पौष में सूर्य की उपासना स्वास्थ्य, ओज व आत्मविश्वास देती और शीत के आलस्य को दूर करती मानी जाती है। प्रातः जागरण, अर्घ्य व दान का अनुशासन आंतरिक शक्ति, कृतज्ञता व स्थिर मन गढ़ता है।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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