पुरी धाम और भगवान जगन्नाथ
ओडिशा के पूर्वी तट पर स्थित पुरी, जगन्नाथ मंदिर का घर है, जो भारत भर में स्थापित हिंदू तीर्थयात्रा परंपरा के चार धामों में से एक है।
यहाँ भगवान कृष्ण को उनके विशिष्ट स्वरूप जगन्नाथ, ब्रह्मांड के स्वामी, के रूप में उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ पूजा जाता है।
इतिहास और कथा
परंपरा के अनुसार जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विशिष्ट काष्ठ स्वरूप एक कथा से जुड़े हैं, जिसमें राजा इंद्रद्युम्न और देव शिल्पी विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्होंने इस शर्त पर मूर्तियाँ बनाने की सहमति दी थी कि कार्य के दौरान उन्हें न देखा जाए। जब राजा अधीर होकर कार्य पूरा होने से पहले अंदर देख बैठे, तो मूर्तियाँ अपने वर्तमान अपूर्ण, विशिष्ट रूप में ही रह गईं।
पुरी सहित चार धामों को परंपरागत रूप से आदि शंकराचार्य से जोड़ा जाता है, जिन्होंने यहाँ अपने चार मठों में से एक की स्थापना की थी।
चार धाम में महत्व
चार धामों में पुरी का स्थान भारत की पवित्र भूगोल में पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, माना जाता है कि इससे श्रद्धालु की भगवान विष्णु के चार प्रमुख धामों की यात्रा पूर्ण होती है।
श्रद्धालु यहाँ मोक्ष और दैनिक जीवन में भगवान की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। पुरी हिंदू परंपरा के सात सबसे पवित्र नगरों, सप्त पुरी में से भी एक है।
यात्रा गाइड: अनुष्ठान और रथ यात्रा

मंदिर में प्रातःकालीन मंगला आरती से शुरू होकर दिनभर कई चरणों में भोग और दर्शन का क्रम चलता है।
पुरी आषाढ़ मास में होने वाली वार्षिक रथ यात्रा के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है, जब जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को विशाल रथों में नगर की सड़कों से होकर निकाला जाता है, जिसे लाखों श्रद्धालु देखते हैं। श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले मंदिर की प्रकाशित समय-सारणी जांच लेनी चाहिए।
पुरी कैसे पहुँचें
पुरी का अपना रेलवे स्टेशन है जो भारत के प्रमुख शहरों से भलीभांति जुड़ा है, और निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर में है, जो सड़क मार्ग से लगभग डेढ़ घंटे की दूरी पर है।
यह ओडिशा का एक सुस्थापित तीर्थ एवं समुद्र-तटीय नगर है।
जप हेतु मंत्र और सार
श्रद्धालु पूजा में जय जगन्नाथ और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करते हैं। सरल अर्थ - उस भगवान को प्रणाम जो हृदय में निवास करते हैं।
चार धाम में पुरी का स्थान यह स्मरण कराता है कि परमात्मा को भव्य और सरल, दोनों रूपों में पाया जा सकता है - पूजा एक विश्वास और प्रेम का कार्य है, कोई सौदा नहीं।
भक्तों के सामान्य प्रश्न
पुरी चार धामों में से एक क्यों है?+
ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर का घर पुरी, भारत भर में स्थापित परंपरागत चार धाम तीर्थयात्रा चक्र में पूर्वी बिंदु का प्रतिनिधित्व करता है।
पुरी के जगन्नाथ स्वरूप में क्या विशिष्ट है?+
जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के साथ, एक विशिष्ट काष्ठ स्वरूप में पूजे जाते हैं, परंपरा इनके अपूर्ण रूप को राजा इंद्रद्युम्न और विश्वकर्मा की कथा से जोड़ती है।
पुरी की रथ यात्रा क्या है?+
आषाढ़ मास में होने वाला वार्षिक उत्सव, जब देवताओं को विशाल रथों में नगर की सड़कों से निकाला जाता है, जिसमें देश भर से श्रद्धालु आते हैं।
About the author
Pandit Ravindra Sharma · Vedic Rituals & Bhakti, 22+ years
Pandit Ravindra is the Vandnaa editorial team's resident specialist on aarti, chalisa, and daily devotion. He has performed home and temple pujas across Varanasi and Delhi for over two decades and contributes the bhakti-focused articles on this site.
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