← सभी ब्लॉगRead in English8 मिनट पढ़ें
पुत्रदा एकादशी 2026 - व्रत विधि, कथा और महत्व
Vrats

पुत्रदा एकादशी 2026 - व्रत विधि, कथा और महत्व

8 मिनट पढ़ेंप्रकाशित जून 3, 2026
MT

By Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Reviewed by Anjali Mehta · Editor, M.A. Religious Studies

पुत्रदा कौन सी एकादशी है

पुत्रदा एकादशी शुक्ल पक्ष (शुक्ल पक्ष) की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को आती है, और वर्ष में दो बार मनाई जाती है - एक बार श्रावण (जुलाई-अगस्त) में, जिसे श्रावण पुत्रदा एकादशी कहते हैं, और एक बार पौष (दिसंबर-जनवरी) में, जिसे पौष पुत्रदा एकादशी कहते हैं। दोनों भगवान विष्णु को समर्पित हैं। पुत्रदा नाम का अर्थ है 'संतान देने वाली', क्योंकि यह व्रत मुख्यतः स्वस्थ संतान और सुखी वंश के आशीर्वाद हेतु रखा जाता है। कृपया अपने शहर हेतु 2026 की सटीक तिथियों व पारण समय की पुष्टि वंदना पंचांग पर करें।

व्रत का महत्व

पुत्रदा एकादशी दंपतियों व माता-पिता को अत्यंत प्रिय है। यह श्रद्धालुओं को सद्गुणी, स्वस्थ और दीर्घायु संतान का आशीर्वाद देने, और मौजूदा संतान व पूरे परिवार की हानि से रक्षा करने वाली मानी जाती है। संतान के परे, सभी एकादशियों की भाँति यह मन को शुद्ध करती, पापों को मिटाती और भगवान विष्णु की कृपा खींचती है। यहाँ संतान का आशीर्वाद व्यापक, कोमल अर्थ में समझा जाता है - सुसंतान, वंश-निरंतरता, और पारिवारिक जीवन का आनंद व सौहार्द - और यह व्रत विष्णु की कृपा चाहने वाले किसी भी सच्चे भक्त के लिए समान फलदायी है।

पुत्रदा एकादशी की कथा

कथा महिष्मती के राजा महीजित की है, जो समृद्ध व न्यायप्रिय पर अत्यंत दुखी थे, क्योंकि उनका वंश आगे बढ़ाने वाली कोई संतान न थी। मंत्रियों की सलाह पर उन्होंने वन में ऋषियों को खोजा। विद्वान लोमश ऋषि ने बताया कि पूर्वजन्म का एक दोष इसका कारण है और राजा-रानी को पूर्ण भक्ति से भगवान विष्णु की श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत रखने की सलाह दी। राजदंपती ने प्रजा सहित सच्चे मन से उपवास व उपासना की। विष्णु की कृपा से रानी को शीघ्र एक श्रेष्ठ पुत्र का आशीर्वाद मिला, जो संतान की हार्दिक अभिलाषा पूर्ण करने की व्रत-शक्ति दर्शाता है।

व्रत नियम - ग्रहण योग्य और त्याज्य

व्रत नियम - ग्रहण योग्य और त्याज्य

हर एकादशी की भाँति व्रत एकादशी के सूर्योदय से अगले दिन पारण तक चलता है। फलाहार व्रत हेतु ग्रहण योग्य: फल, दूध, जल, और साबूदाना, कुट्टू/सिंघाड़ा आटा, आलू व सेंधा नमक जैसे व्रत पदार्थ। पूर्णतः त्याज्य: चावल, सभी अन्न व दालें, प्याज, लहसुन और मांसाहार। कुछ लोग स्वास्थ्य अनुसार निर्जला या केवल जल का व्रत रखते हैं। दिन भर सत्य, शांति व दयालुता बनाए रखें; क्रोध, कटु वचन व आलस्य से बचें, समय विष्णु उपासना में बिताएँ।

चरण-दर-चरण व्रत विधि

1. दशमी को सादा सात्विक भोजन करें और व्रत का संकल्प लें। 2. एकादशी को सूर्योदय से पूर्व उठें, स्नान करें व स्वच्छ वस्त्र पहनें। 3. भगवान विष्णु (या बाल गोपाल / कृष्ण) स्थापित करें और घी का दीपक व धूप जलाएँ। 4. भक्ति से तुलसी पत्र, पीले पुष्प, फल, पंचामृत व मिठाई अर्पित करें। 5. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें और पुत्रदा एकादशी कथा पढ़ें; संतान हेतु प्रार्थना करने वाले दंपती शांत, आशापूर्ण हृदय से ऐसा करें। 6. विष्णु आरती करें और संभव हो तो भजनों के साथ रात्रि जागरण करें। 7. द्वादशी प्रातः पुनः उपासना करें, ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन व दान दें, फिर पारण समय पर व्रत खोलें।

दंपतियों के लिए एक कोमल बात

यद्यपि पुत्रदा एकादशी संतान की अभिलाषा रखने वालों को प्रिय है, इसे श्रद्धा, धैर्य व आंतरिक शांति का व्रत मानना सर्वोत्तम है, दबाव या चिंता का नहीं। इसका सच्चा उपहार भगवान विष्णु की निकटता, शांत मन और सौहार्दपूर्ण घर है, जहाँ संतान का आशीर्वाद उनकी व्यापक कृपा का अंग माना जाता है। दंपती व्रत को प्रसन्नता से रखें, एक-दूसरे का सहारा बनें, और अपनी प्रार्थनाओं के साथ कोई भी चिकित्सकीय देखभाल जारी रखें। सटीक एकादशी तिथियाँ व पारण वंदना पंचांग पर देखें।

त्वरित उत्तर

पुत्रदा एकादशी कब मनाई जाती है?+

यह वर्ष में दो बार शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है - एक बार श्रावण (जुलाई-अगस्त) और एक बार पौष (दिसंबर-जनवरी) में। सटीक 2026 तिथियाँ वंदना पंचांग पर देखें।

पुत्रदा एकादशी क्यों रखी जाती है?+

यह मुख्यतः माता-पिता व दंपतियों द्वारा सद्गुणी, स्वस्थ संतान और परिवार के कल्याण की प्रार्थना हेतु रखी जाती है। सभी एकादशियों की भाँति यह मन को शुद्ध करती और विष्णु की कृपा लाती है।

पुत्रदा एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?+

फलाहार व्रत में फल, दूध, जल और साबूदाना, कुट्टू, आलू व सेंधा नमक जैसे व्रत पदार्थ ले सकते हैं। चावल, अन्न, दालें, प्याज, लहसुन और मांसाहार त्याज्य हैं।

पुत्रदा एकादशी की कथा क्या है?+

महिष्मती के राजा महीजित की कोई संतान न थी। लोमश ऋषि की सलाह पर राजा-रानी ने भक्ति से श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत रखा, और विष्णु की कृपा से उन्हें एक श्रेष्ठ पुत्र का आशीर्वाद मिला।

क्या कोई भी पुत्रदा एकादशी व्रत रख सकता है?+

हाँ। यद्यपि संतान की अभिलाषा रखने वालों को प्रिय है, यह किसी भी सच्चे भक्त के लिए फलदायी है। इसे श्रद्धा व धैर्य से रखें, कभी दबाव से नहीं, और प्रार्थना के साथ कोई भी चिकित्सकीय देखभाल जारी रखें।

पुत्रदा एकादशी व्रत कब खोला जाता है?+

व्रत अगली प्रातः द्वादशी को पारण समय में, उपासना और ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन या दान के बाद खोला जाता है। सटीक पारण समय वंदना पंचांग पर देखें।

MT

About the author

Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang

Pandit Mahesh leads the festival-date and Panchang content on Vandnaa. He cross-references multiple regional panchangs (Drik, Vaishnava, Bengali, Marathi) for every festival date published on the site.

Meet the Vandnaa editorial team →

Listen all aartis, mantras & bhajans in one place.

Download Vandnaa App.

Download Now

Explore on Vandnaa

संबंधित लेख