कामिका कौन सी एकादशी है
कामिका एकादशी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष (कृष्ण पक्ष) की ग्यारहवीं तिथि (एकादशी) को आती है, प्रायः जुलाई या अगस्त में। यह पवित्र चातुर्मास-श्रावण काल की पहली एकादशी है, जब भगवान विष्णु की भक्ति विशेष प्रभावशाली मानी जाती है। इसका नाम कामना (इच्छा) से आया है, क्योंकि यह व्रत सच्ची कामनाएँ पूर्ण करने और मुक्ति देने वाला कहा जाता है। कृपया अपने शहर हेतु 2026 की सटीक तिथि व पारण समय की पुष्टि वंदना पंचांग पर करें, क्योंकि तिथि समय स्थान अनुसार बदलते हैं।
महत्व और लाभ
शास्त्र कामिका एकादशी की प्रशंसा ऐसे व्रत रूप में करते हैं जिसका पुण्य महान तीर्थों व यज्ञों के समान है। भक्त मानते हैं कि यह संचित पाप, यहाँ तक कि गंभीर पाप भी धो देती है, मृत्यु का भय दूर करती है और पूर्वजों को शांति देती है। इस दिन विशेषकर तुलसी पत्रों से भगवान विष्णु की उपासना अनगिनत अर्पणों से अधिक उन्हें प्रसन्न करती कही जाती है। यह व्रत आंतरिक शुद्धि, धर्मसम्मत कामनाओं की पूर्ति, उत्तम स्वास्थ्य और अंततः मोक्ष हेतु रखा जाता है, जो इसे गृहस्थों व साधकों दोनों को प्रिय बनाता है।
कामिका एकादशी की कथा
यह कथा, जो भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई, एक वीर पर क्रोधी क्षत्रिय की है जिसने एक विवाद में अनजाने एक ब्राह्मण की हत्या कर दी। अपराधबोध से ग्रस्त उसने अंतिम संस्कार करना चाहा पर मना कर दिया गया, क्योंकि ब्रह्म-हत्या का पाप उससे चिपका था। एक विद्वान ऋषि ने उसे पूर्ण भक्ति से कामिका एकादशी व्रत रखने और भगवान विष्णु की उपासना करने की सलाह दी। उस व्यक्ति ने उपवास किया, प्रार्थना की और प्रभु को तुलसी अर्पित की। विष्णु की कृपा से उसका भयानक पाप धुल गया और उसे शांति मिली - जो व्रत की सबसे भारी कर्म को भी शुद्ध करने की शक्ति दर्शाता है।
व्रत नियम - ग्रहण योग्य और त्याज्य

व्रत एकादशी को सूर्योदय से आरंभ होता और अगली प्रातः पारण समय पर खोला जाता है। फलाहार व्रत रखने वालों के लिए ग्रहण योग्य: फल, दूध, जल, और साबूदाना, सिंघाड़ा/कुट्टू आटा, आलू व सेंधा नमक जैसे व्रत पदार्थ। पूर्णतः त्याज्य हैं चावल, सभी अन्न व दालें, प्याज, लहसुन और मांसाहार। अनेक लोग निर्जला (बिना जल) या केवल जल का व्रत रखते हैं। क्रोध, झूठ, चुगली और दूसरों को हानि से बचें; दिन विष्णु भजन, जप और कथा पाठ में बिताएँ।
चरण-दर-चरण व्रत विधि
1. दशमी (एक दिन पूर्व) को सादा सात्विक भोजन करें और व्रत का संकल्प लें। 2. एकादशी को जल्दी उठें, स्नान करें व स्वच्छ वस्त्र पहनें। 3. भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें; घी का दीपक व धूप जलाएँ। 4. तुलसी पत्र, पीले पुष्प, फल, पंचामृत व मिठाई अर्पित करें; विष्णु पूजा में तुलसी अनिवार्य है। 5. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें और कामिका एकादशी कथा पढ़ें। 6. प्रातः-संध्या विष्णु आरती करें, और संभव हो तो रात्रि भर भजन गाते हुए जागरण करें। 7. अगली प्रातः (द्वादशी) पुनः उपासना करें, ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन व दान दें, फिर पारण समय पर व्रत खोलें।
तुलसी का महत्व
कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अर्पित करना परम शुभ माना जाता है - शास्त्र कहते हैं कि प्रेम से अर्पित एक तुलसी पत्र भी स्वर्ण या रत्नों से अधिक उन्हें प्रसन्न करता है। पत्तों को सम्मान से सूर्यास्त से पूर्व तोड़ें (कुछ परंपराओं में एकादशी को कभी नहीं; दशमी को एकत्र करें), और इन्हें कभी न चबाएँ। तुलसी पौधे के सामने दीप जलाना और उसकी परिक्रमा व्रत के पुण्य को बढ़ाते हैं।
पाठकों के प्रश्न
कामिका एकादशी कब मनाई जाती है?+
यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को आती है, प्रायः जुलाई या अगस्त में। अपने शहर हेतु 2026 की सटीक तिथि वंदना पंचांग पर देखें।
कामिका एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं?+
फलाहार व्रत रखने वाले फल, दूध, जल और साबूदाना, कुट्टू, आलू व सेंधा नमक जैसे व्रत पदार्थ ले सकते हैं। चावल, अन्न, दालें, प्याज, लहसुन और मांसाहार त्याज्य हैं।
कामिका एकादशी व्रत का क्या लाभ है?+
यह संचित पापों को धोने, धर्मसम्मत कामनाएँ पूर्ण करने, पूर्वजों को शांति देने, मृत्यु का भय दूर करने और सच्चे भक्त को मोक्ष की ओर ले जाने वाला माना जाता है।
इस एकादशी पर तुलसी क्यों महत्वपूर्ण है?+
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। शास्त्र कहते हैं भक्ति से अर्पित एक तुलसी पत्र भी स्वर्ण से अधिक उन्हें प्रसन्न करता है। इसे सम्मान से एकत्र करें और कभी न चबाएँ।
कामिका एकादशी पर कौन सा मंत्र जपा जाता है?+
भक्त 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और विष्णु के नामों का जप करते हैं, विष्णु आरती करते हैं, कामिका एकादशी कथा पढ़ते हैं और भजनों का रात्रि जागरण कर सकते हैं।
कामिका एकादशी व्रत कब खोलना चाहिए?+
व्रत अगली प्रातः द्वादशी को पारण समय में, उपासना और ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान के बाद खोला जाता है। सटीक पारण समय वंदना पंचांग पर देखें।
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Pandit Mahesh Trivedi · Festival Traditions & Panchang
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