राम नाम की महिमा
भक्ति परंपरा में भगवान राम का नाम परम शक्तिशाली माना जाता है - इतना कि संत कहते हैं नाम राम रूप राम से भी बड़ा है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में नाम की महिमा को पूरे छंद समर्पित किए हैं, कहते हुए कि नाम हृदय को पवित्र करता, पाप हरता और मुक्ति देता है। श्री राम का जप एक सरल, सार्वभौमिक अभ्यास है जो सबके लिए खुला है, जिसमें किसी विशेष अनुष्ठान, स्थान या समय की आवश्यकता नहीं।
तारक मंत्र
राम नाम तारक मंत्र के रूप में जाना जाता है - वह मंत्र जो आत्मा को जन्म-मृत्यु के सागर से तार देता है। कहा जाता है कि काशी (वाराणसी) में भगवान शिव स्वयं मरणासन्न के कान में यह राम नाम सुनाते हैं, जिससे मुक्ति मिलती है। दो अक्षर, रा और म, विष्णु व शिव के महामंत्रों से लिए गए हैं, जो दोनों की कृपा को एक करते हैं। इसीलिए राम नाम का एक भी सच्चा उच्चारण अत्यंत पवित्र करने वाला माना जाता है।
जप - श्री राम जय राम जय जय राम
सबसे प्रिय और व्यापक रूप से गाया जाने वाला राम नाम धुन है:
श्री राम जय राम जय जय राम
यह तेरह अक्षरों का जप, संत समर्थ रामदास द्वारा दिया गया, जप के रूप में दोहराया जाता है और घरों व मंदिरों में धुन या कीर्तन के रूप में मधुरता से भी गाया जाता है। अन्य सरल रूपों में राम राम और सीता राम की कोमल पुनरावृत्ति शामिल है। इन जपों की सुंदरता यह है कि इन्हें दिन के किसी भी क्षण ऊँचे स्वर में, धीमे, या मन में मौन रूप से किया जा सकता है।
राम नाम लिखना

भक्ति का एक प्रिय रूप है राम नाम लिखना - राम को एक समर्पित राम नाम बही या कॉपी में बार-बार लिखना। अनेक भक्त इसे प्रतिदिन 108 बार लिखते हैं, जबकि मंदिर व आश्रम ऐसे लिखे करोड़ों नाम एकत्र करते हैं। यह अभ्यास हाथ, आँख और मन की एकाग्रता को जोड़ता है, जो इसे शक्तिशाली, ध्यानमय साधना बनाता है। लिखी राम नाम पुस्तकें बड़े आदर से रखी जाती हैं और कभी-कभी पवित्र स्थलों या नदियों में अर्पित की जाती हैं।
जप विधि - अभ्यास कैसे करें
1. स्नान कर स्वच्छ आसन पर बैठें, शांत स्थान में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करें। 2. यदि संभव हो तो भगवान राम के चित्र के सामने दीप या धूप जलाएँ। 3. दाएँ हाथ में 108 मनकों की तुलसी माला लें। 4. प्रत्येक मनके पर श्री राम जय राम जय जय राम या केवल राम राम जपें, एक या अधिक माला पूर्ण करें। 5. मन को कोमलता से अर्थ और भगवान राम के स्वरूप पर केंद्रित रखें। 6. राम नाम लिखने हेतु अपनी बही में राम को निश्चित संख्या में पूर्ण ध्यान से लिखें। 7. प्रणाम कर पुण्य सभी प्राणियों को समर्पित कर समापन करें। ब्रह्म मुहूर्त आदर्श है, पर राम नाम किसी भी समय जपा जा सकता है।
राम नाम जाप के लाभ
राम नाम का निरंतर स्मरण मन को पवित्र करता, भय व चिंता को घोलता और हृदय को शांति व भक्ति से भरता माना जाता है। यह श्वास को स्थिर करता और बेचैनी घटाता है, जिससे यह ध्यान का सहज रूप बन जाता है। संत सिखाते हैं कि यह संचित कर्म को भस्म करता, संकट में रक्षा करता और अंततः आत्मा को मोक्ष की ओर ले जाता है। दैनिक कार्य के बीच भी राम नाम की मौन पुनरावृत्ति मन को स्थिर व शांत रखती है।
राम नाम को दैनिक जीवन में लाना

आरंभ करने के लिए लंबे घंटों की आवश्यकता नहीं। चलते, पकाते या सोने से पहले राम राम जपें, और हर सुबह राम नाम का एक पृष्ठ लिखें। दूसरों का राम राम या जय सिया राम से अभिवादन स्वयं एक मधुर स्मरण है। लक्ष्य है अजपा जप - वह अवस्था जहाँ नाम स्वतः हृदय में बहता है, हर श्वास को एक मौन प्रार्थना बना देता है।
पाठकों के प्रश्न
राम नाम जप क्या है?+
सबसे प्रिय जप 'श्री राम जय राम जय जय राम' है, समर्थ रामदास द्वारा दिया तेरह अक्षरों का मंत्र। 'राम राम' और 'सीता राम' जैसे सरल रूप भी व्यापक रूप से दोहराए जाते हैं।
राम नाम को तारक मंत्र क्यों कहते हैं?+
इसे तारक मंत्र इसलिए कहते हैं क्योंकि यह आत्मा को जन्म-मृत्यु के सागर से पार लगाता है। काशी में भगवान शिव मरणासन्न के कान में राम नाम सुनाकर मुक्ति देते माने जाते हैं।
राम नाम लिखना क्या है?+
राम नाम लिखना एक समर्पित बही, जिसे राम नाम बही कहते हैं, में 'राम' को बार-बार लिखने का अभ्यास है। यह हाथ, आँख और मन को एकाग्र, ध्यानमय भक्ति में जोड़ता है।
राम नाम प्रतिदिन कितनी बार जपना चाहिए?+
अनेक भक्त प्रतिदिन 108 की एक माला जपते हैं, या राम नाम 108 बार लिखते हैं। कोई निश्चित सीमा नहीं - सबसे अधिक नियमितता और भक्ति मायने रखती है। निरंतर मौन स्मरण भी अत्यधिक मूल्यवान है।
राम नाम जाप के क्या लाभ हैं?+
यह मन को पवित्र करता, भय व चिंता दूर करता, शांति व भक्ति लाता और सहज ध्यान का कार्य करता है। संत सिखाते हैं कि यह कर्म भस्म करता, संकट में रक्षा करता और मोक्ष की ओर ले जाता है।
क्या कोई भी राम नाम जाप कर सकता है?+
हाँ। राम नाम एक सार्वभौमिक अभ्यास है जो सबके लिए खुला है, जिसमें किसी विशेष अनुष्ठान, स्थान या समय की आवश्यकता नहीं। तुलसीदास ने सिखाया कि नाम श्रद्धा से जपने वाले हर किसी को पवित्र करता है।
About the author
Acharya Vinaya Kapoor · M.A. Sanskrit, Mantra & Stotra Studies
Acharya Vinaya holds an M.A. in Sanskrit from Banaras Hindu University and writes the mantra and stotra commentary on Vandnaa. Her focus is on accurate pronunciation, traditional context, and helping modern readers connect with classical texts.
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